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संध्या अर्घ्य की विधि: छठ के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य, घाट जाने की तैयारी, सूप सजाना और नियम

छठ के तीसरे दिन शाम को व्रती घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह छठ का सबसे भव्य दृश्य होता है। जानिए दउरा उठाकर घाट जाने की परंपरा, सूप में प्रसाद सजाने का क्रम, अर्घ्य की विधि और घाट पर निभाए जाने वाले नियम।

छठ में संध्या अर्घ्य की विधि का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • छठ महापर्व के तीसरे दिन शाम को व्रती नदी, तालाब या घाट पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
  • 2. वेदी या घाट पर सूप रखे जाते हैं और दीप जलाए जाते हैं
  • 5. व्रती सूप के साथ पांच या सात बार परिक्रमा करते हैं, परंपरा के अनुसार
  • संध्या अर्घ्य के बाद कई परिवार घर पर कोसी भरते हैं, जिसमें गन्नों का मंडप बनाकर उसके नीचे दीप जलाए जाते हैं।

छठ महापर्व के तीसरे दिन शाम को व्रती नदी, तालाब या घाट पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसे संध्या अर्घ्य कहते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026 को है। सूर्यास्त का समय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग में देखें। जानिए संध्या अर्घ्य की विधि।

दिन भर की तैयारी

  • खरना के प्रसाद के बाद से व्रती निर्जला व्रत में रहते हैं
  • सुबह से घर में ठेकुआ, कसार और दूसरे प्रसाद बनाए जाते हैं
  • दोपहर बाद सूप और दउरा सजाया जाता है
  • परिवार के लोग घाट पर जगह साफ करने और सजाने जाते हैं
मुख्य बातें: छठ में संध्या अर्घ्य की विधि का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सूप कैसे सजाएं

हर सूप में आमतौर पर ये चीजें रखी जाती हैं:

  • ठेकुआ और कसार के लड्डू
  • केला, नारियल, सेब, संतरा और दूसरे मौसमी फल
  • गन्ने का टुकड़ा, मूली, अदरक और हल्दी के पौधे
  • सिंघाड़ा और शकरकंद
  • दीया, सिंदूर और फूल

सूप पर पीला या लाल कपड़ा डाला जाता है।

दउरा लेकर घाट जाना

सजा हुआ दउरा परिवार का कोई पुरुष सदस्य, अक्सर बेटा या पति, सिर पर उठाकर घाट तक ले जाता है। रास्ते में छठ के गीत गाए जाते हैं। कई व्रती मन्नत के अनुसार दंडवत करते हुए घाट तक जाते हैं।

यह भी पढ़ें: उषा अर्घ्य और पारण: छठ के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की विधि, घाट की तैयारी और व्रत खोलने का तरीका | छठ पूजा सामग्री: सूप, दउरा, ठेकुआ, फल और अर्घ्य की पूरी सूची, 13 से 16 नवंबर के चार दिन की तैयारी

अर्घ्य की विधि

1. घाट पर पहुंचकर व्रती स्नान करते हैं

2. वेदी या घाट पर सूप रखे जाते हैं और दीप जलाए जाते हैं

3. सूर्यास्त के समय व्रती पानी में खड़े होकर सूप को हाथों में लेकर सूर्य की ओर करते हैं

4. परिवार के लोग लोटे से दूध और जल का अर्घ्य देते हैं

5. व्रती सूप के साथ पांच या सात बार परिक्रमा करते हैं, परंपरा के अनुसार

6. इसके बाद छठी मैया की पूजा और गीत होते हैं

डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों

आमतौर पर पूजा उगते सूर्य की होती है, पर छठ में डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। इसका भाव है कि जीवन के हर चरण, उगने और डूबने दोनों का सम्मान किया जाए। माना जाता है कि सूर्य की पत्नी प्रत्यूषा को शाम का और ऊषा को सुबह का अर्घ्य समर्पित है।

घाट के नियम

  • शुद्धता का पूरा ध्यान, जूते-चप्पल वेदी से दूर रखें
  • प्रसाद को जमीन पर न रखें, साफ कपड़े या पत्ते पर रखें
  • व्रती को कोई छूकर प्रसाद न ले, पहले व्रती खुद देते हैं
  • घाट पर शोर और पटाखों से बचें

रात की परंपरा

संध्या अर्घ्य के बाद कई परिवार घर पर कोसी भरते हैं, जिसमें गन्नों का मंडप बनाकर उसके नीचे दीप जलाए जाते हैं। कई जगह व्रती रात घाट पर ही बिताते हैं और भोर में उषा अर्घ्य देते हैं।

सुरक्षा

घाट पर प्रशासन के बनाए सुरक्षित घेरे में ही पानी में उतरें। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। अंधेरा होने से पहले रोशनी का इंतजाम कर लें।

क्या अर्घ्य तांबे के लोटे से ही देना चाहिए?

तांबे या पीतल का लोटा पारंपरिक है, पर कोई भी साफ पात्र इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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