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रबी दलहन: मसूर MSP बढ़कर 7390 रुपये हुआ, लागत पर 92% मार्जिन, बोने वाले किसानों के लिए इसका क्या मतलब

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए मसूर का MSP 7390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। जानिए किसानों के लिए इसका क्या मतलब है।

लाल मसूर दाल के दानों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • रबी की बुआई का मौसम चल रहा है और कई इलाकों में किसान दलहन की फसलें बो रहे हैं।
  • PIB के अनुसार मसूर की उत्पादन लागत 3854 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है।
  • MSP सरकार की ओर से तय न्यूनतम कीमत है, जबकि मंडी भाव मांग, आवक, आयात की स्थिति और गुणवत्ता के आधार पर रोज बदलता है।
  • भारत दालों का बड़ा उत्पादक होने के साथ बड़ा उपभोक्ता भी है और घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए कुछ दालों का आयात करना पड़ता है।

रबी की बुआई का मौसम चल रहा है और कई इलाकों में किसान दलहन की फसलें बो रहे हैं। मसूर रबी की प्रमुख दाल फसलों में से एक है। बुआई से पहले यह जानना फायदेमंद होता है कि सरकार ने अगली कटाई के बाद के विपणन सीजन के लिए इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य कितना तय किया है। केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2026 को रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए सभी अधिसूचित रबी फसलों का MSP घोषित किया। इस लेख में जानिए मसूर MSP कितना है और किसानों के लिए इसका क्या मतलब है।

मसूर MSP 2027-28 कितना है

PIB की जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए मसूर का MSP 7390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले सीजन यानी 2026-27 में यह 7000 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी मसूर के MSP में 390 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। कुसुम और सरसों के बाद यह रबी फसलों में तीसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।

मुख्य बातें: लाल मसूर दाल के दानों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

लागत पर कितना मार्जिन

PIB के अनुसार मसूर की उत्पादन लागत 3854 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है। इस हिसाब से MSP लागत पर लगभग 92 प्रतिशत का मार्जिन देता है। सरकार के अनुसार यह 2018-19 के बजट की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना तय करने की बात कही गई थी।

विपणन सीजन 2027-28 का मतलब

ध्यान रहे कि रबी विपणन सीजन 2027-28 का MSP उस फसल पर लागू होगा जो अभी 2026 की सर्दियों में बोई जा रही है और 2027 में कटकर मंडी में आएगी। यानी बुआई के समय ही किसानों को अंदाजा मिल जाता है कि कटाई के बाद सरकारी खरीद में न्यूनतम कितना दाम मिल सकता है।

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मसूर कहां उगाई जाती है

मसूर मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों में उगाई जाती है। यह कम पानी में होने वाली फसल है और ठंडे मौसम में अच्छी बढ़ती है। दलहन होने के कारण यह मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती है, इसलिए फसल चक्र में इसका खास महत्व है। धान की कटाई के बाद कई इलाकों में मसूर बोई जाती है।

बुआई के समय ध्यान दें

  • अपने इलाके के लिए अनुशंसित किस्म का प्रमाणित बीज लें।
  • बुआई से पहले बीज उपचार कराएं, ताकि शुरुआती रोगों से बचाव हो।
  • खेत में जल निकासी अच्छी रखें, क्योंकि ज्यादा नमी से नुकसान हो सकता है।
  • मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
  • बुआई का सही समय अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से पता करें।

MSP और मंडी भाव का फर्क

MSP सरकार की ओर से तय न्यूनतम कीमत है, जबकि मंडी भाव मांग, आवक, आयात की स्थिति और गुणवत्ता के आधार पर रोज बदलता है। दालों के दाम पर आयात नीति का भी असर पड़ता है। जब मंडी भाव MSP से नीचे जाता है, तब सरकारी खरीद अहम हो जाती है। दालों की सरकारी खरीद तय एजेंसियों के जरिये होती है, जिसके लिए पंजीकरण जरूरी होता है।

बिक्री की तैयारी अभी से

  • सरकारी खरीद के पंजीकरण से जुड़ी जानकारी अपने राज्य के कृषि विभाग से समय रहते लें।
  • जमीन के कागजात, आधार और बैंक खाते का ब्योरा अपडेट रखें।
  • कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही बेचें।
  • आसपास की मंडियों के भाव e-NAM पोर्टल या राज्य कृषि विपणन बोर्ड की वेबसाइट पर देखते रहें।

भंडारण की तैयारी

मसूर के दानों में भंडारण के दौरान घुन जैसे कीट लग सकते हैं। कटाई के बाद दानों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं और साफ, सूखी बोरियों या कोठियों में रखें। बोरियों को जमीन और दीवार से थोड़ा हटाकर रखें। भंडारण में किसी रसायन के इस्तेमाल से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें। अच्छा भंडारण होने पर किसान दाम बेहतर होने तक कुछ समय रुक भी सकते हैं।

दाल उत्पादन बढ़ाने पर जोर

भारत दालों का बड़ा उत्पादक होने के साथ बड़ा उपभोक्ता भी है और घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए कुछ दालों का आयात करना पड़ता है। इसलिए सरकार दलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। MSP में बढ़ोतरी को भी किसानों को दलहन की ओर प्रोत्साहित करने के कदम के रूप में देखा जाता है।

दूसरी रबी फसलों का MSP

PIB के अनुसार रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का MSP 2610 रुपये, जौ का 2286 रुपये, चने का 5958 रुपये, सरसों का 6613 रुपये और कुसुम का 7215 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

मसूर MSP 2027-28 कितना है

7390 रुपये प्रति क्विंटल।

पिछले साल से कितनी बढ़ोतरी हुई

390 रुपये प्रति क्विंटल।

सलाह लें: बुआई, बिक्री या भंडारण का फैसला लेने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें।

स्रोत: PIB: Cabinet approves MSP for Rabi Crops for Marketing Season 2027-28, New Indian Express: Cabinet approves higher MSPs for Rabi crops 2027-28

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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