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मार्गशीर्ष अमावस्या 2026: 8 दिसंबर को मंगलवार के कारण भौमवती अमावस्या, स्नान-दान, पितृ तर्पण और पूजा की परंपराएं

अगहन महीने की अमावस्या इस बार मंगलवार को पड़ रही है। जानिए तिथि और इस दिन की धार्मिक परंपराएं।

नदी घाट पर दीपदान करते श्रद्धालुओं का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदू पंचांग में हर महीने की अमावस्या का अपना महत्व है, लेकिन मार्गशीर्ष यानी अगहन मास की अमावस्या को खास माना जाता है।
  • उत्तर भारत में ज्यादातर पूर्णिमांत पंचांग चलता है, जिसमें महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है।
  • अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध से जुड़े कर्म किए जाते हैं।
  • ग्रामीण इलाकों में अगहन का महीना रबी फसलों की बुआई और देखभाल का समय होता है।

हिंदू पंचांग में हर महीने की अमावस्या का अपना महत्व है, लेकिन मार्गशीर्ष यानी अगहन मास की अमावस्या को खास माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान, पितरों के लिए तर्पण और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा की परंपरा है। 2026 में यह अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और परंपराओं के बारे में।

मार्गशीर्ष अमावस्या 2026 की तारीख

Drik Panchang के अनुसार नई दिल्ली के समय से मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 8 दिसंबर 2026 को सुबह लगभग 4:12 बजे शुरू होगी और 9 दिसंबर को सुबह लगभग 6:21 बजे खत्म होगी। उदया तिथि के आधार पर अमावस्या मंगलवार, 8 दिसंबर को मानी जाएगी। अलग-अलग शहरों में समय थोड़ा बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें।

मुख्य बातें: नदी घाट पर दीपदान करते श्रद्धालुओं का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

अमांत और पूर्णिमांत का फर्क

उत्तर भारत में ज्यादातर पूर्णिमांत पंचांग चलता है, जिसमें महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अमांत पंचांग चलता है, जिसमें महीना अमावस्या पर खत्म होता है। इसी कारण 8 दिसंबर की इस अमावस्या को उत्तर भारत में मार्गशीर्ष अमावस्या और अमांत पंचांग में कार्तिक अमावस्या कहा जाता है। तिथि एक ही है, सिर्फ महीने का नाम अलग है।

भौमवती अमावस्या क्या है

जब अमावस्या मंगलवार को पड़ती है, तो उसे भौमवती या भौमी अमावस्या कहा जाता है। मंगल ग्रह को भौम भी कहते हैं। लोक मान्यता में इस दिन हनुमान जी की पूजा, मंगल से जुड़े दोष की शांति के उपाय और कर्ज से मुक्ति की प्रार्थना की परंपरा है।

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मार्गशीर्ष मास का महत्व

मार्गशीर्ष को धार्मिक परंपरा में बहुत पवित्र महीना माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता के दसवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। इसी कारण इस महीने में किए गए जप, तप और दान का विशेष महत्व माना जाता है।

स्नान और दान

  • अमावस्या के दिन सुबह गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान की परंपरा है।
  • नदी तक न जा सकें, तो घर में नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
  • स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें।
  • सर्दियों का मौसम होने के कारण इस दिन कंबल, गर्म कपड़े, तिल, गुड़ और अन्न का दान विशेष रूप से किया जाता है।
  • जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्य माना जाता है।

पितृ तर्पण

अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध से जुड़े कर्म किए जाते हैं। जिन परिवारों में पितृ दोष की बात कही जाती है, वहां इस दिन विशेष पूजा की परंपरा है। तर्पण के लिए जल में काले तिल और कुश का इस्तेमाल किया जाता है।

पूजा विधि

  1. सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें।
  2. घर के मंदिर में दीपक जलाएं।
  3. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  4. पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करने की परंपरा है।
  5. शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है।
  6. भौमवती अमावस्या होने के कारण हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।

क्या न करें

  • अमावस्या के दिन तामसिक भोजन से बचने की परंपरा है।
  • किसी से विवाद या कटु वचन से बचें।
  • लोक मान्यता में इस दिन सुनसान जगहों पर रात में जाने से मना किया जाता है।
  • नए काम की शुरुआत के लिए अमावस्या को आम तौर पर शुभ नहीं माना जाता।

दीपदान की परंपरा

कई स्थानों पर अमावस्या की शाम को नदी, तालाब या घर के मुख्य द्वार पर दीपदान करने की परंपरा है। मान्यता है कि अमावस्या की अंधेरी रात में दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता आती है और पितरों को भी प्रकाश मिलता है। घर के मंदिर, तुलसी के पास और रसोई में भी दीपक जलाए जाते हैं।

व्रत की परंपरा

कुछ श्रद्धालु अमावस्या पर व्रत रखते हैं और शाम को पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत रखना व्यक्तिगत आस्था का विषय है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या किसी बीमारी से जूझ रहे लोग अपनी सेहत को ध्यान में रखकर ही व्रत का फैसला करें।

किसानों के लिए

ग्रामीण इलाकों में अगहन का महीना रबी फसलों की बुआई और देखभाल का समय होता है। कई इलाकों में इस अमावस्या पर किसान खेतों और पशुओं की सलामती के लिए स्थानीय देवताओं की पूजा करते हैं।

अगली अमावस्या

मार्गशीर्ष के बाद पौष मास आता है। पौष अमावस्या जनवरी 2027 में पड़ेगी। तारीख के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

मार्गशीर्ष अमावस्या 2026 कब है

मंगलवार, 8 दिसंबर 2026 को।

भौमवती अमावस्या किसे कहते हैं

मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या को।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: Drik Panchang: 2026 Amavasya dates, New Delhi, AstroSage: Margashirsha Amavasya 2026

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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