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Sawan Amavasya 2026: अगस्त में सावन अमावस्या कब है? जानिए सही तारीख, पूजा विधि और स्नान-दान के शुभ मुहूर्त

Sawan Amavasya 2026: अगस्त में सावन अमावस्या कब है? जानिए सही तारीख, पूजा विधि और स्नान-दान के शुभ मुहूर्त
Sawan Amavasya 2026

सारांश

  • Sawan Amavasya 2026: हिंदू धर्म शास्त्रों में सावन माह की अमावस्या तिथि का अत्यंत विशेष और पावन महत्व माना गया है।
  • सावन अमावस्या के दिन प्रातकाल स्नान और दान करने का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है।
  • श्रद्धालु अपने नहाने के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
  • सावन अमावस्या की तिथि पितरों की आत्मा की तृप्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती है।

Sawan Amavasya 2026: हिंदू धर्म शास्त्रों में सावन माह की अमावस्या तिथि का अत्यंत विशेष और पावन महत्व माना गया है। सावन के पवित्र महीने में आने वाली इस अमावस्या को लोक परंपराओं में हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने, गरीबों को दान देने और देवाधिदेव महादेव की विशेष आराधना करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त यह तिथि पितरों की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले तर्पण और पिंडदान के कार्यों के लिए भी बेहद उत्तम मानी गई है।

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त 2026 को पड़ रही है। इस दिन सूर्योदय से लेकर रात तक स्नान-दान और देव पूजा के कई शुभ संयोग बन रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए प्रातकाल ब्रह्म मुहूर्त से ही धार्मिक अनुष्ठान करने के उत्तम अवसर उपलब्ध रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पौधे लगाने से प्रकृति के साथ-साथ गृह दोषों से भी मुक्ति प्राप्त होती है।

Sawan Amavasya 2026की सही तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 12 अगस्त को मध्यरात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन 12 अगस्त को ही रात 11 बजकर 6 मिनट पर हो जाएगा।

उदयातिथि के सर्वमान्य सिद्धांत के अनुसार सावन अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या का व्रत और स्नान-दान 12 अगस्त 2026 को ही किया जाएगा। पूरे दिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन शुभ रहेगा।

Sawan Amavasya 2026: स्नान और दान के लिए प्रातःकालीन मुहूर्त

सावन अमावस्या के दिन प्रातकाल स्नान और दान करने का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस दिन सुबह से ही शुभ मुहूर्तों की शुरुआत हो जाएगी।

आचार्य के अनुसार 12 अगस्त की सुबह ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 23 मिनट से 05 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। वहीं चर-सामान्य मुहूर्त सुबह 05:38 से 07:20 बजे तक रहेगा।

दिन के अन्य शुभ और सर्वोत्तम मुहूर्त

प्रातःकाल के बाद दिन में भी कई शुभ समय उपलब्ध रहेंगे। सुबह 07:20 से 09:03 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त रहेगा, जो किसी भी धार्मिक कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम है।

इसके उपरांत सुबह 09:03 से 10:45 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा। दोपहर में शुभ-उत्तम मुहूर्त 12:27 बजे से दोपहर 02:10 बजे तक रहेगा, जिसमें पूजा-पाठ संपन्न किया जा सकता है।

Sawan Amavasya 2026: पवित्र नदियों में स्नान का महत्व

अमावस्या तिथि पर किसी पवित्र नदी, तीर्थ या सरोवर में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। यदि किसी कारणवश तीर्थ स्थान पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही उपाय कर सकते हैं।

श्रद्धालु अपने नहाने के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से भी पवित्र नदियों में स्नान करने के समान ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

संकल्प के साथ करें दान-पुण्य

सावन अमावस्या के दिन स्नान ध्यान करने के पश्चात दान करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना चाहिए।

विशेष रूप से तिल, वस्त्र, अनाज और धन का दान करना अति शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन किया गया गुप्त दान जीवन में सुख-समृद्धि और आरोग्य लेकर आता है।

Sawan Amavasya 2026: भगवान शिव और पार्वती की विशेष पूजा

सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक अवश्य करना चाहिए। जलाभिषेक के समय जल में थोड़ा गंगाजल और दूध मिलाना शुभ रहता है।

शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद पुष्प अर्पित करें। माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पितृ दोष मुक्ति के लिए करें तर्पण

सावन अमावस्या की तिथि पितरों की आत्मा की तृप्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करना चाहिए।

जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अंजलि देने से पितृ दोष शांत होता है। इसके बाद ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

Sawan Amavasya 2026: हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का महत्व

सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है, जो पर्यावरण और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इस दिन पेड़-पौधे लगाना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना गया है।

इस अवसर पर पीपल, बरगद, नीम, आंवला या शमी का पौधा लगाना अत्यंत पुण्यदायी होता है। मान्यता है कि पौधा लगाने और उसकी सेवा करने से ग्रह दोषों से राहत मिलती है।

सावन अमावस्या सनातन धर्म में केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि प्रकृति, पितरों और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महान अवसर है। 12 अगस्त 2026 को पड़ने वाली इस पावन अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में स्नान, दान, शिव पूजा और पितृ तर्पण करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। इसके साथ ही इस दिन वृक्षारोपण करने से न केवल पर्यावरण का संरक्षण होता है, बल्कि मनुष्य को आरोग्य और अक्षय पुण्य की भी प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा भाव के साथ इस पावन पर्व को मनाकर भगवान शिव और अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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