DUSU Election Result 2026: देश की सबसे प्रतिष्ठित छात्र राजनीति का अखाड़ा माने जाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के बहुप्रतीक्षित परिणाम शनिवार, 19 सितंबर को घोषित कर दिए गए हैं। नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में 20 राउंड की सघन मतगणना के उपरांत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार में से तीन केंद्रीय पदों पर अपना परचम लहराया है। विद्यार्थी परिषद के प्रत्याशी यश डबास ने कांटे की टक्कर में अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि संगठन की रिया छाबड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव पद पर विजयी रहे हैं।
चार केंद्रीय पदों के इस चुनावी दंगल में सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला, जहां कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के बागी और निर्दलीय प्रत्याशी दीपांशु शोकीन ने भारी मतों के अंतर से एकतरफा जीत हासिल कर सबको चौंका दिया। इस प्रकार डूसू के 2026-27 सत्र के केंद्रीय पैनल में एबीवीपी ने तीन सीटों के साथ स्पष्ट दबदबा कायम किया है, वहीं एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार की झोली में गई है, जबकि एनएसयूआई का इस बार केंद्रीय पैनल से पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया।
DUSU Election Result 2026: अध्यक्ष पद पर 20 राउंड का सांस रोक देने वाला मुकाबला
अध्यक्ष पद का चुनावी मुकाबला मतगणना के अंतिम दौर तक अत्यंत रोमांचक और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। प्रारंभिक दौर से ही एबीवीपी के यश डबास और एनएसयूआई के विजय शंकर मीना के बीच बढ़त का अंतर लगातार बदलता रहा। कई राउंड में मीना आगे निकले, तो कई राउंड में डबास ने जोरदार वापसी की।
अंतिम 20वें राउंड की गिनती समाप्त होने पर चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यश डबास को कुल 24,576 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी विजय शंकर मीना 22,523 मतों पर सिमट गए। यश डबास ने 2,053 मतों के निर्णायक अंतर से जीत दर्ज करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के नए अध्यक्ष के रूप में अपनी ताजपोशी सुनिश्चित की।
सचिव पद पर रिया छाबड़ी की एकतरफा जीत: 6,781 मतों के अंतर से दी शिकस्त
सचिव पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की उम्मीदवार रिया छाबड़ी ने शुरुआत से ही अपनी बढ़त बनाए रखी और अपने प्रतिद्वंद्वी को मुकाबले में लौटने का कोई अवसर नहीं दिया। श्री अरबिंदो कॉलेज की पूर्व छात्रा और इंटर-कॉलेज स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुकीं रिया छाबड़ी ने खेल भावना और कैंपस कनेक्टिविटी के दम पर जबरदस्त समर्थन हासिल किया।
मतगणना के समापन पर रिया छाबड़ी को कुल 21,650 वोट मिले, जबकि एनएसयूआई की प्रत्याशी नम्रता चौधरी को मात्र 14,869 मत ही प्राप्त हो सके। रिया छाबड़ी ने 6,781 मतों के विशाल अंतर से सचिव पद पर शानदार विजय दर्ज कर केंद्रीय पैनल में महिला प्रतिनिधित्व को मजबूती से स्थापित किया।
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शोकीन का ऐतिहासिक तूफान: मिला सबसे बड़ा जनादेश
इस वर्ष के छात्रसंघ चुनाव का सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाला परिणाम उपाध्यक्ष पद पर आया। टिकट वितरण से असंतुष्ट होकर निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शोकीन ने पूरे मुकाबले को एकतरफा बना दिया। शोकीन को कुल 30,615 वोट मिले, जो इस वर्ष चारों पदों पर किसी भी विजेता प्रत्याशी को मिले मतों में सर्वाधिक संख्या है।
दीपांशु शोकीन के सामने एबीवीपी के उम्मीदवार ईशु मौर्या 16,910 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि एनएसयूआई के आधिकारिक प्रत्याशी वीर छत्रथ को मात्र 4,313 वोट मिले और वे तीसरे पायदान पर खिसक गए। शोकीन ने 13,705 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। छात्र राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि शोकीन की यह जीत कैंपस में पारंपरिक पार्टी सीमाओं से परे जाकर छात्रों के व्यक्तिगत जुड़ाव और जमीनी नेटवर्क की ताकत को दर्शाती है।
संयुक्त सचिव पद पर कड़ा त्रिकोणीय संघर्ष: मात्र 837 वोटों से चमके लक्ष्य राज सिंह
डूसू चुनाव 2026 का सबसे करीबी और सांस थाम देने वाला मुकाबला संयुक्त सचिव के पद पर देखने को मिला। इस सीट पर एबीवीपी, निर्दलीय और एनएसयूआई के बीच त्रिकोणीय संघर्ष अंतिम राउंड तक खिंचा।
मतगणना पूरी होने पर एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल कर जीत अपने नाम की। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विशाल यादव ने जबर्दस्त टक्कर देते हुए 15,778 मत प्राप्त किए और वे मात्र 837 मतों के सूक्ष्म अंतर से दूसरे स्थान पर रहे। वहीं एनएसयूआई के गोपाल चौधरी 15,206 वोट हासिल कर तीसरे पायदान पर रहे। इस बेहद कड़े मुकाबले में लक्ष्य राज की जीत ने एबीवीपी की झोली में तीसरा केंद्रीय पद डाल दिया।
40.46 प्रतिशत रहा कुल मतदान: पिछले वर्षों से बढ़ा छात्रों का रुझान
दिल्ली विश्वविद्यालय के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के अनुसार, इस वर्ष डूसू चुनाव में 1,51,000 से अधिक पंजीकृत छात्र-छात्राएं मतदान के पात्र थे। 18 सितंबर को विश्वविद्यालय के 52 मतदान केंद्रों पर दो पालियों में वोट डाले गए थे, जिसमें कुल 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
मतदान का यह प्रतिशत विगत वर्षों की तुलना में बेहतर रहा है। वर्ष 2025 के चुनाव में 39.45 प्रतिशत और वर्ष 2024 में मात्र 29.7 प्रतिशत मतदान हुआ था। दिन की पाली के कॉलेजों में सुबह 8:30 से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम की पाली में दोपहर 3:00 से सायं 7:30 बजे तक छात्रों ने कतारों में लगकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
सत्य निकेतन हादसा, हॉस्टल संकट और कैंपस सुरक्षा बने मुख्य चुनावी विमर्श
इस वर्ष का डूसू चुनाव साधारण राजनीतिक नारों के बजाय छात्रों की सीधी सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। चुनाव से ठीक पहले 6 सितंबर को सत्य निकेतन इलाके में एक निजी छात्र पीजी हॉस्टल की इमारत ढहने से पांच डीयू छात्रों सहित सात लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस त्रासद घटना ने कैंपस में सुरक्षित और किफायती हॉस्टल के मुद्दे को सबसे बड़ा भावनात्मक और नीतिगत मुद्दा बना दिया था।
चुनाव प्रचार के दौरान सभी प्रमुख संगठनों—एबीवीपी, एनएसयूआई और आइसा-एसएफआई गठबंधन—ने नए सरकारी छात्रावासों के निर्माण, निजी पीजी के मनमाने किराए पर विधिक नियंत्रण, महिला सुरक्षा और कैंपस में मेट्रो पास रियायत को अपने घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल किया था। अब नवनिर्वाचित केंद्रीय पैनल के सम्मुख इन वादों को धरातल पर उतारने की कठिन परीक्षा होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त निगरानी: विजय जुलूस और हुड़दंग पर पूर्ण प्रतिबंध
चुनाव नतीजों की घोषणा से पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय परिसर और राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से बेहद सख्त दिशानिर्देश जारी किए थे। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया था कि किसी भी विजयी प्रत्याशी अथवा उसके समर्थक छात्र संगठन को कैंपस के भीतर या सार्वजनिक सड़कों पर विजय जुलूस (विक्ट्री रैली) निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों के विरूपण, पोस्टर चिपकाने और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर हाईकोर्ट ने कई प्रत्याशियों को अवमानना नोटिस भी जारी किए थे। इसी न्यायिक सख्ती के चलते शनिवार को मतगणना केंद्र के बाहर भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती रही और परिणाम आने के बाद किसी भी प्रकार के अनियंत्रित जश्न पर कड़ा पहरा रहा।
DUSU Election Result 2026: निष्कर्ष
डूसू चुनाव 2026 के अंतिम जनादेश ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की दिशा स्पष्ट कर दी है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर विजय हासिल कर अपनी सांगठनिक पकड़ को पुनः प्रमाणित किया है, वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शोकीन की प्रचंड जीत ने स्थापित छात्र संगठनों को यह कड़ा संदेश दिया है कि आम छात्र अब केवल संगठन के नाम पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के काम और आचरण पर भी भरोसा जता रहे हैं। अब यश डबास के नेतृत्व में गठित डूसू का नया केंद्रीय पैनल दिल्ली विश्वविद्यालय के लाखों विद्यार्थियों की आशाओं, छात्रावासों की मांग और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल की चुनौतियों से किस प्रकार निपटता है, इस पर पूरे देश की निगाहें रहेंगी।
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