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Highway New Rules: हाईवे पर जानवर छोड़ना पड़ेगा भारी, पशु मालिकों पर होगी सख्त कार्रवाई

Highway New Rules

सारांश

  • Highway New Rules: देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे पर बेलगाम गति से दौड़ते वाहनों के सामने अचानक आ जाने वाले आवारा व लावारिस पशुओं के कारण होने वाली भयावह…
  • सड़क सुरक्षा को केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया तक सीमित न रखकर दीर्घकालिक समाधान में बदलने के लिए नई एसओपी में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित मैपिंग को अनिवार्य बनाया गया है।
  • जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में स्थानीय नगर निगम, नगर पालिका, जिला पंचायत, पशुपालन विभाग और एनएचएआई के परियोजना निदेशक मिलकर एक समन्वित कार्यबल का गठन करेंगे।
  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी यह नई एसओपी देश के राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित और दुर्घटना-मुक्त बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी नीतिगत कदम है।

Highway New Rules: देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे पर बेलगाम गति से दौड़ते वाहनों के सामने अचानक आ जाने वाले आवारा व लावारिस पशुओं के कारण होने वाली भयावह सड़क दुर्घटनाओं पर केंद्र सरकार ने अत्यंत कड़ा संज्ञान लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राष्ट्रीय राजमार्गों को मवेशी-मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए एक व्यापक व सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इस नई विधिक एवं प्रशासनिक नियमावली के तहत अब हाईवे पर केवल जानवरों को हटाने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपने पशुओं को लावारिस या खुला छोड़ने वाले पशु मालिकों की पहचान कर उनके विरुद्ध मौजूदा कानूनों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई और भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा।

भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के तीव्र विस्तार और वाहनों की निर्धारित उच्च गति सीमा के चलते सड़कों पर मवेशियों का अनापेक्षित प्रवेश गंभीर जनहानि और संपत्ति के नुकसान का प्रमुख कारण बनता रहा है। नई एसओपी में राजमार्ग निर्माण और संचालन से जुड़ी एजेंसियों—विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)—तथा संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय जिला प्रशासनों के बीच त्रिस्तरीय जवाबदेही तय की गई है। इसके अंतर्गत पशुओं को तत्काल रेस्क्यू कर सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करने और आधुनिक निगरानी तकनीक लागू करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

Highway New Rules: पशु मालिकों की पहचान और विधिक शिकंजा

मंत्रालय द्वारा जारी नई एसओपी का सबसे निर्णायक और कड़ा पहलू पशु मालिकों की प्रत्यक्ष जवाबदेही तय करना है। ग्रामीण अथवा अर्ध-शहरी इलाकों से गुजरने वाले हाईवे के किनारे अक्सर स्थानीय लोग अपने पालतू दुधारू या अनुत्पादक पशुओं को चरने अथवा भटकने के लिए खुला छोड़ देते हैं। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी स्वामित्व वाले पशु की मौजूदगी के कारण यातायात बाधित होता है या कोई दुर्घटना घटित होती है, तो स्थानीय राजस्व विभाग, पुलिस और ग्राम पंचायतों के सहयोग से संबंधित पशु स्वामी की शिनाख्त की जाएगी।

पहचान स्थापित होने के पश्चात पशु मालिकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सार्वजनिक उपद्रव, लापरवाही और दूसरों के जीवन को संकट में डालने से जुड़ी सुसंगत धाराओं के साथ-साथ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और राज्य स्तरीय मवेशी अतिचार कानूनों (Cattle Trespass Act) के तहत दंडात्मक प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इसके अतिरिक्त पशु को रेस्क्यू करने, सुरक्षित बाड़े में रखने और परिवहन पर आने वाले संपूर्ण व्यय की भरपाई भी संबंधित मालिक से जुर्माने के रूप में वसूल की जाएगी।

हॉटस्पॉट मैपिंग और जीआईएस आधारित निगरानी व्यवस्था

सड़क सुरक्षा को केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया तक सीमित न रखकर दीर्घकालिक समाधान में बदलने के लिए नई एसओपी में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित मैपिंग को अनिवार्य बनाया गया है। राजमार्गों के जिन विशेष खंडों पर बार-बार मवेशियों के झुंड दिखाई देते हैं अथवा जहां पूर्व में पशुओं से टकराने की दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं, उन्हें ‘एनिमल हॉटस्पॉट’ (Accident-Prone Hotspots) के रूप में चिह्नित किया जाएगा।

इस वैज्ञानिक डेटाबेस के आधार पर हाईवे एजेंसियों को यह सटीक जानकारी मिलेगी कि किन विशिष्ट किलोमीटरों में पशुओं की आवाजाही का दबाव सर्वाधिक है। डेटा संकलन के आधार पर इन संवेदनशील खंडों में राजमार्ग के दोनों ओर मजबूत मेटल क्रैश बैरियर, कंक्रीट की चारदीवारी अथवा तारबंदी (कैटल फेंसिंग) स्थापित की जाएगी, ताकि पशु किसी भी परिस्थिति में सीधे मुख्य कैरिजवे पर प्रवेश न कर सकें।

हाई-टेक निगरानी: एआई सीसीटीवी कैमरे और हाई-मास्ट लाइटिंग

हाईवे पर रात्रि के समय दृश्यता अत्यंत सीमित होने के कारण काले या गहरे रंग के पशु वाहन चालकों को बहुत निकट पहुंचने पर ही दिखाई देते हैं, जिससे अचानक ब्रेक लगाने पर गाड़ियां अनियंत्रित होकर पलट जाती हैं। इस जोखिम को समाप्त करने के लिए संवेदनशील घोषित किए गए सभी हॉटस्पॉट्स पर हाई-मास्ट लाइटिंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

इसके साथ ही हाईवे प्रबंधन प्रणाली (ATMS) से जुड़े आधुनिक सीसीटीवी कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेंसरों के माध्यम से सड़क पर किसी भी जानवर के प्रवेश की रियल-टाइम सूचना नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) को भेजी जाएगी। सड़क पर वाहन चालकों को पहले से सचेत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वेरिएबल मैसेज साइनबोर्ड्स (VMS) और विशेष चेतावनी संकेत पट्ट लगाए जाएंगे, ताकि चालक समय रहते वाहन की गति नियंत्रित कर सकें।

नोडल अधिकारियों की तैनाती और अंतर-विभागीय समन्वय तंत्र

राजमार्गों से पशुओं को हटाने का कार्य किसी एक विभाग के वश में न होने के कारण अक्सर अधिकार क्षेत्र का विवाद खड़ा हो जाता था। इस प्रशासनिक शिथिलता को दूर करने के लिए नई एसओपी के तहत राज्य और जिला दोनों स्तरों पर समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया गया है।

जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में स्थानीय नगर निगम, नगर पालिका, जिला पंचायत, पशुपालन विभाग और एनएचएआई के परियोजना निदेशक मिलकर एक समन्वित कार्यबल का गठन करेंगे। यदि किसी हाईवे खंड पर मवेशियों की समस्या गंभीर होती है, तो यह कार्यबल संयुक्त अभियान चलाकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। पूरी प्रणाली की प्रगति और हादसों में आई कमी का मूल्यांकन करने के लिए प्रत्येक छह महीने में अनिवार्य उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।

रेस्क्यू किए गए पशुओं का कल्याण: सुरक्षित गौशाला और चिकित्सीय देखरेख

न्यायिक निर्देशों और पशु अधिकार मानकों का अक्षरशः पालन करते हुए सड़क परिवहन मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सड़क से हटाए जाने वाले जानवरों के साथ किसी भी प्रकार की अमानवीयता न बरती जाए। पकड़े गए मवेशियों को केवल बेदखल करने के बजाय स्थानीय पंजीकृत गौशालाओं, कांजी हाउसों अथवा पशु आश्रय स्थलों में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जाएगा।

इस संपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन, परिवहन और चारे-पानी का आरंभिक वित्तीय भार संबंधित हाईवे विकास एजेंसियां वहन करेंगी। आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किए जाने वाले प्रत्येक पशु की प्राथमिक पशु चिकित्सीय जांच कराई जाएगी और बीमार या चोटिल पशुओं को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। यदि कोई लावारिस पशु गंभीर रूप से घायल मिलता है, तो उसे हाईवे एम्बुलेंस के माध्यम से पशु चिकित्सालय पहुंचाया जाएगा।

1033 हेल्पलाइन और चौबीसों घंटे हाईवे पेट्रोलिंग

राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवागमन करने वाले आम नागरिकों और वाहन चालकों की भागीदारी भी इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग बनाई गई है। यदि किसी चालक को एक्सप्रेसवे अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोई लावारिस मवेशी या मवेशियों का झुंड दिखाई देता है, तो वह तत्काल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की आपातकालीन हेल्पलाइन संख्या 1033 पर कॉल करके सटीक लोकेशन दर्ज करा सकता है।

सूचना प्राप्त होते ही संबंधित रूट पर तैनात 24×7 हाईवे पेट्रोलिंग वाहन और विशेष कैटल-कैचर वाहन को तुरंत मौके पर रवाना किया जाएगा। एनएचएआई द्वारा अमरावती मॉडल की तर्ज पर अन्य संवेदनशील कॉरिडोरों पर भी चौबीसों घंटे समर्पित पेट्रोलिंग यूनिट्स को सक्रिय रखने की योजना बनाई गई है, जो सड़क पर किसी भी अवरोध को तुरंत हटाकर सुगम यातायात बहाल करेंगी।

Highway New Rules: निष्कर्ष

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी यह नई एसओपी देश के राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित और दुर्घटना-मुक्त बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी नीतिगत कदम है। आवारा पशुओं की समस्या को केवल सफाई या सामान्य अवरोध के बजाय सीधे मानव जीवन और सड़क सुरक्षा से जोड़ना शासन की परिपक्व सोच को दर्शाता है। पशु मालिकों पर कानूनी मुकदमे और भारी जुर्माने की व्यवस्था जहां मवेशियों को खुला छोड़ने की गैर-जिम्मेदाराना प्रवृत्ति पर लगाम लगाएगी, वहीं हॉटस्पॉट मैपिंग, सीसीटीवी निगरानी और 1033 हेल्पलाइन का तंत्र भारतीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाएगा।

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Netsha Singh Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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