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CBFC New Guidelines: फिल्मों में ड्रग्स वाले सीन पर दिखानी होगी खास चेतावनी, जानिए नए नियम

CBFC New Guidelines

सारांश

  • CBFC New Guidelines: भारतीय सिनेमा और मनोरंजन जगत में फिल्मों के प्रमाणन, संपादन और सामाजिक संवेदनशीलता को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने एक युगांतरकारी कदम उठाया है।
  • यदि किसी फिल्म की कहानी, पटकथा या पात्र की पृष्ठभूमि के लिए नारकोटिक ड्रग्स अथवा साइकोट्रोपिक पदार्थों का उपयोग, सेवन या तस्करी दिखाना अपरिहार्य हो, तो निर्माताओं को उस दृश्य के चलते समय…
  • संशोधित दिशा-निर्देशों में महिलाओं के सम्मान और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नैतिक व विधिक पैमानों को अत्यंत कठोर बनाए रखा गया है।
  • इस उच्चस्तरीय बोर्ड में प्रमुख अभिनेत्रियों प्रीति जिंटा और रूपाली गांगुली, दिग्गज अभिनेता पंकज त्रिपाठी और सुनील शेट्टी, बंगाली सिनेमा के सुपरस्टार प्रसेनजीत चटर्जी, प्रख्यात फिल्म…

CBFC New Guidelines: भारतीय सिनेमा और मनोरंजन जगत में फिल्मों के प्रमाणन, संपादन और सामाजिक संवेदनशीलता को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने एक युगांतरकारी कदम उठाया है। केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश में फिल्म प्रमाणन से जुड़े नियमों का व्यापक पुनरीक्षण करते हुए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लगभग 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद फिल्म प्रमाणन की आधिकारिक गाइडलाइंस में इस प्रकार का ऐतिहासिक ढांचागत सुधार देखने को मिला है, जिसने दिसंबर 1991 से चले आ रहे पुराने दिशा-निर्देशों का स्थान लिया है।

इस संशोधित नियमावली का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित पहलू यह है कि अब फिल्मों में नशीले पदार्थों यानी नारकोटिक ड्रग्स या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन, उनके उपयोग, लेनदेन अथवा तस्करी से जुड़े किसी भी दृश्य के प्रदर्शन के दौरान स्क्रीन पर अनिवार्य वैधानिक चेतावनी (Statutory Warning) प्रदर्शित करनी होगी। इसके साथ ही उम्र-आधारित प्रमाणन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाते हुए यू/ए (U/A) श्रेणी के आयु संकेतकों को कानूनी रूप से सुदृढ़ किया गया है, ताकि समाज में बच्चों और किशोरों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों को नियंत्रित किया जा सके।

CBFC New Guidelines: 35 साल बाद बदला प्रमाणन ढांचा

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा अधिसूचित यह नया प्रमाणन ढांचा भारतीय समाज, तकनीक और सिनेमाई मुहावरे में आए आधुनिक बदलावों को परिलक्षित करता है। 1991 के बाद से अब तक सिनेमाई तकनीक, अंतरराष्ट्रीय कंटेंट तक पहुंच और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के उभार ने दर्शकों के मिजाज को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में पुराने नियमों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य के अनुकूल बनाना अनिवार्य हो गया था।

संशोधित नियमों का उद्देश्य रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करना है। सेंसर बोर्ड का दायित्व केवल कैंची चलाना या फिल्मों पर प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए आने वाली सामग्री दर्शकों की उम्र और मानसिक परिपक्वता के अनुकूल हो। नया ढांचा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए यह तय करता है कि संवेदनशील विषयों को किस गरिमा और विधिक सीमाओं के भीतर पर्दे पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

ड्रग्स के दृश्यों पर अनिवार्य वैधानिक चेतावनी: तंबाकू और मदिरा की तर्ज पर नया नियम

संशोधित गाइडलाइंस में सबसे बड़ा विधिक बदलाव नशीले पदार्थों के चित्रण को लेकर हुआ है। अब तक फिल्मों में धूम्रपान और शराब के सेवन के दृश्यों के दौरान स्क्रीन के निचले हिस्से में स्वास्थ्य चेतावनी दिखाना अनिवार्य था, किंतु ड्रग्स से जुड़े दृश्यों के लिए ऐसा कोई स्पष्ट वैधानिक चेतावनी का नियम लागू नहीं था। यद्यपि पुराने नियमों में ड्रग्स की लत को बढ़ावा देने, उसे महिमामंडित करने या उसे आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा दिखाने पर रोक थी, किंतु नई व्यवस्था में स्पष्ट चेतावनी का अनिवार्य प्रदर्शन जोड़ दिया गया है।

यदि किसी फिल्म की कहानी, पटकथा या पात्र की पृष्ठभूमि के लिए नारकोटिक ड्रग्स अथवा साइकोट्रोपिक पदार्थों का उपयोग, सेवन या तस्करी दिखाना अपरिहार्य हो, तो निर्माताओं को उस दृश्य के चलते समय निर्धारित भाषा और प्रारूप में स्वास्थ्य एवं कानूनी चेतावनी दिखानी होगी। इस चेतावनी का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थों के विनाशकारी शारीरिक, मानसिक और विधिक दुष्परिणामों के प्रति सीधे तौर पर सचेत करना है।

U/A 7+, U/A 13+ और U/A 16+ एज रेटिंग: माता-पिता के मार्गदर्शन को नई दिशा

सिनेमाघरों में अपने परिवार और बच्चों के साथ फिल्म देखने जाने वाले अभिभावकों की सुविधा के लिए उम्र-आधारित वर्गीकरण को इस नई नियमावली में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पारंपरिक रूप से यू/ए (U/A) प्रमाणपत्र को केवल एक सामान्य पारिवारिक श्रेणी माना जाता था, किंतु वर्ष 2024 के प्रमाणन नियमों और 2025 के प्रशासनिक सुधारों को समाहित करते हुए अब तीन स्पष्ट उप-श्रेणियों—यू/ए 7+, यू/ए 13+ और यू/ए 16+ को पूरी तरह संस्थागत बना दिया गया है।

इन संकेतकों का स्पष्ट अर्थ यह है कि सात वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे यू/ए 7+ फिल्म को माता-पिता के मार्गदर्शन में देख सकते हैं। इसी प्रकार यू/ए 13+ और यू/ए 16+ संकेतकों वाली फिल्मों में भाषा, तनाव, हल्के भय या संवेदनशील संदर्भ हो सकते हैं, जिसके लिए क्रमशः 13 और 16 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए अभिभावकों की उपस्थिति और सहमति आवश्यक मानी जाएगी। यह वर्गीकरण माता-पिता को यह निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार देता है कि उनके बच्चे के लिए कौन सी सामग्री उपयुक्त है।

प्रचार सामग्री में एज मार्कर अनिवार्य: सीबीएफसी चेयरपर्सन का कड़ा निर्देश

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के नवनियुक्त चेयरपर्सन शशि शेखर वेम्पति ने स्पष्ट किया है कि उम्र-आधारित इन संकेतकों का लाभ दर्शकों को तभी मिल सकता है जब उन्हें टिकट खरीदने से पहले इसकी पूर्ण जानकारी हो। उन्होंने सभी फिल्म निर्माताओं, वितरकों और डिजिटल प्रचार एजेंसियों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे फिल्म के सिनेमाई पोस्टरों, डिजिटल टीजर्स, यूट्यूब ट्रेलर्स और विज्ञापनों में इन एज मार्कर्स को प्रमुखता और स्पष्टता से प्रदर्शित करें।

अक्सर देखा जाता है कि दर्शक केवल फिल्म के लोकप्रिय कलाकारों या गानों को देखकर पूरे परिवार के साथ सिनेमाघर पहुंच जाते हैं, जहां बाद में असहज स्थिति उत्पन्न होती है। प्रचार सामग्री पर स्पष्ट रेटिंग अंकित होने से परिवारों को फिल्म चुनने में पारदर्शिता मिलेगी और वे पूर्व-सूचित निर्णय ले सकेंगे।

महिलाओं की गरिमा, यौन हिंसा और बच्चों के संरक्षण पर पूर्ववत कड़े प्रावधान

संशोधित दिशा-निर्देशों में महिलाओं के सम्मान और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नैतिक व विधिक पैमानों को अत्यंत कठोर बनाए रखा गया है। महिलाओं को नीचा दिखाने वाले, उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले अथवा यौन हिंसा को सनसनीखेज बनाकर प्रस्तुत करने वाले दृश्यों पर सेंसर बोर्ड की शून्य-सहनशीलता की नीति जारी रहेगी। यदि किसी गंभीर सामाजिक अपराध पर आधारित कथा में ऐसा दृश्य दिखाना आवश्यक हो, तो उसे अत्यंत प्रतीकात्मक और न्यूनतम सीमा तक ही सीमित रखना होगा।

इसी प्रकार बच्चों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना अथवा यौन दुर्व्यवहार के दृश्यों के प्रदर्शन पर पूर्ण अंकुश रहेगा। बच्चों को स्वयं हिंसा करते हुए अथवा जबरन क्रूरता का गवाह बनते हुए दिखाने वाले दृश्यों पर बोर्ड विशेष सतर्कता बरतेगा। इसके अतिरिक्त मूक-बधिर, शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों का उपहास उड़ाने वाले संवादों तथा जानवरों के प्रति अमानवीय क्रूरता दिखाने वाले दृश्यों पर भी विधिक पाबंदियां यथावत लागू रहेंगी।

राष्ट्रीय संप्रभुता, अखंडता और फिल्मों के शीर्षकों पर भी रहेगी कड़ी नजर

राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की रक्षा से जुड़े बुनियादी सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं किया गया है। गाइडलाइंस में दोहराया गया है कि किसी भी ऐसी दृश्य सामग्री, संवाद अथवा गीत को प्रमाणित नहीं किया जाएगा जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता पर आघात करता हो। किसी विदेशी राष्ट्र के साथ भारत के राजनयिक संबंधों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले, न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करने वाले अथवा अदालत की अवमानना करने वाले कंटेंट पर कैंची चलाई जाएगी।

सांप्रदायिक तनाव, नस्लीय वैमनस्य, अंधविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विरुद्ध अवैज्ञानिक कुरीतियों को बढ़ावा देने वाली सामग्री पर भी कड़ा विधिक नियंत्रण रहेगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल फिल्म के भीतर के दृश्य ही नहीं, बल्कि फिल्म के शीर्षक (Title) का भी गहन परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी फिल्म का नाम भड़काऊ, समाज के किसी वर्ग के लिए अपमानजनक, अश्लील या धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला पाया गया, तो बोर्ड निर्माता को शीर्षक बदलने का आदेश दे सकेगा।

मनोरंजन जगत की जानी-मानी हस्तियों से सुसज्जित हुआ नया सेंसर बोर्ड

यह संशोधित नीतिगत ढांचा ऐसे समय में लागू हुआ है जब केंद्र सरकार ने सीबीएफसी के 18 सदस्यीय केंद्रीय बोर्ड का पुनर्गठन किया है। नए बोर्ड में भारतीय सिनेमा के कई अत्यंत प्रतिष्ठित, अनुभवी और रचनात्मक चेहरों को शामिल किया गया है, जिनका कार्यकाल तीन वर्ष अथवा आगामी प्रशासनिक आदेश तक रहेगा।

इस उच्चस्तरीय बोर्ड में प्रमुख अभिनेत्रियों प्रीति जिंटा और रूपाली गांगुली, दिग्गज अभिनेता पंकज त्रिपाठी और सुनील शेट्टी, बंगाली सिनेमा के सुपरस्टार प्रसेनजीत चटर्जी, प्रख्यात फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री पल्लवी जोशी जैसे नाम शामिल हैं। उद्योग के वास्तविक जानकारों की बोर्ड में उपस्थिति से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रमाणन प्रक्रिया अब अधिक व्यावहारिक, संतुलित और सिनेमाई यथार्थ के अनुकूल होगी।

CBFC New Guidelines: निष्कर्ष

35 वर्षों के उपरांत जारी की गई सीबीएफसी की यह नई गाइडलाइंस भारतीय फिल्म प्रमाणन प्रणाली को आधुनिक वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ा करती है। ड्रग्स के दृश्यों पर अनिवार्य वैधानिक चेतावनी लागू करना जहां देश की युवा पीढ़ी को नशा-विरोधी संदेश देने की दिशा में एक सशक्त कदम है, वहीं यू/ए श्रेणियों के भीतर उम्र-आधारित स्पष्ट संकेतकों का प्रावधान दर्शकों और परिवारों को सिनेमाई चयन की पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करता है। समाज की नैतिक मर्यादाओं, महिला सम्मान और राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा के साथ-साथ सिनेमाई रचनात्मकता को दिशा देने वाला यह संशोधित ढांचा भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक जिम्मेदार और पारदर्शी भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

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Netsha Singh Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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