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Sunday Surya Puja: रविवार को सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि क्या है? जानें पूजा, उपाय और दान की परंपरा

Sunday Surya Puja

सारांश

  • Sunday Surya Puja: सनातन धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा में रविवार का दिन ग्रहों के अधिपति और सृष्टि के आधार प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर यानी सूर्य देव की उपासना के लिए परम फलदायी माना…
  • सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए धातु चयन में तांबे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
  • धार्मिक और ज्योतिषीय परंपरा में रविवार के दिन कुछ विशेष उपायों के पालन से जीवन में स्थिरता और एकाग्रता आने की मान्यता है।
  • व्रत के दिन तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और तेल से बने गरिष्ठ पदार्थों का सर्वथा त्याग करना चाहिए।

Sunday Surya Puja: सनातन धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा में रविवार का दिन ग्रहों के अधिपति और सृष्टि के आधार प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर यानी सूर्य देव की उपासना के लिए परम फलदायी माना गया है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में सूर्य को जगत की आत्मा और ऊर्जा का अक्षय स्रोत निरूपित किया गया है। मान्यता है कि सूर्य देव ही एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनका प्रत्यक्ष दर्शन प्रत्येक जीव को नित्य प्रातः सुलभ होता है। यही कारण है कि रविवार के दिन सूर्य देव की विधिवत अर्चना, जल अर्पित करने और उनके निमित्त जप-तप करने का विशेष विधान अनादि काल से भारतीय जनजीवन का अभिन्न अंग रहा है।

धार्मिक और ज्योतिषीय विमर्श में सूर्य को आत्मबल, शारीरिक ओज, पिता, यश, सामाजिक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का कारक माना गया है। रविवार के पावन अवसर पर प्रातःकाल स्नान-ध्यान से निवृत्त होकर तांबे के पात्र से सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना, वैदिक अथवा पौराणिक मंत्रों का उच्चारण करना और सामर्थ्य के अनुसार सात्त्विक दान-पुण्य करना जातक के जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और आध्यात्मिक तेज का संचार करता है।

Sunday Surya Puja: रविवार को किस देवता की पूजा करनी चाहिए

सप्ताह के सातों दिनों का संबंध किसी न किसी विशिष्ट ग्रह और देवता से माना गया है, जिसमें रविवार का दिन पूर्णतः भुवन भास्कर सूर्य नारायण को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र की नवग्रह व्यवस्था में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है। जहां अन्य देवताओं का ध्यान अमूर्त रूपों में किया जाता है, वहीं सूर्य देव समस्त चराचर जगत को प्रत्यक्ष रूप से जीवन, प्रकाश और पोषण प्रदान करते हैं।

पौराणिक संदर्भों के अनुसार जो साधक रविवार को श्रद्धापूर्वक सूर्य की उपासना करते हैं, उनके अंतःकरण से तमस और निराशा का नाश होता है। यद्यपि आध्यात्मिक साधना में श्रद्धा और निष्ठा ही सर्वोपरि होती है, फिर भी शास्त्र सम्मत विधि से की गई पूजा मनुष्य के संकल्प को दृढ़ करती है। रविवार को की जाने वाली सूर्य पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि प्रकृति और ऊर्जा के मूल स्रोत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का एक पवित्र माध्यम है।

रविवार की पूजा और अर्घ्य की तैयारी: पात्र और सामग्री का विधान

सूर्य देव की पूजा में शुद्धता और सात्त्विकता का सर्वाधिक महत्व है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय की पहली लालिमा के समय उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए। पूजा के लिए लाल, नारंगी अथवा पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए धातु चयन में तांबे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। तांबा सूर्य की प्रिय धातु मानी जाती है और इसका उपयोग पूजा में विशेष आध्यात्मिक तरंगें उत्पन्न करता है। पूजा की तैयारी के तहत तांबे के लोटे या पात्र में शुद्ध शीतल जल भरें। इस जल में एक चुटकी शुद्ध रोली या कुमकुम, अक्षत यानी बिना टूटे हुए साबुत चावल, सुगंधित लाल फूल जैसे गुड़हल या गुलाब और थोड़ा सा गंगाजल मिलाना चाहिए। इसके अतिरिक्त अर्घ्य जल में गुड़ का एक छोटा टुकड़ा या लाल चंदन मिलाना भी शास्त्रसम्मत माना गया है।

सूर्य देव को अर्घ्य देने की प्रामाणिक और वैज्ञानिक विधि

अर्घ्य देने की प्रक्रिया को केवल जल गिराने तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसके पीछे एक निश्चित यौगिक और आध्यात्मिक तकनीक निहित है। स्नानादि के उपरांत पूर्व दिशा की ओर मुख करके सीधे खड़े हों। तांबे के पात्र को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी छाती के मध्य भाग के स्तर से ऊपर उठाएं।

पात्र को इस प्रकार ऊंचा रखें कि जल की गिरती हुई धार के मध्य से होकर सूर्य की सुनहरी किरणें आपकी आंखों और आज्ञा चक्र तक पहुंचें। गिरते हुए जल की पतली धार प्रकाश के एक प्राकृतिक प्रिज्म का कार्य करती है, जिससे सूर्य की सात रंगीन किरणें छनकर शरीर पर पड़ती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

अर्घ्य अर्पित करते समय दोनों हाथों को धीरे-धीरे आगे झुकाते हुए जल की निरंतर धार प्रवाहित करें। ध्यान रखें कि अर्घ्य का जल पैरों पर न गिरे; इसके लिए किसी साफ थाली, गमले या पौधे की क्यारी के ऊपर खड़े होकर जल अर्पित करना श्रेष्ठ रहता है। जल अर्पित करने के उपरांत उसी स्थान पर खड़े होकर तीन बार घड़ी की सुई की दिशा में परिक्रमा करें और सूर्य देव को साष्टांग या पंचांग प्रणाम करें।

रविवार को किन सूर्य मंत्रों का जाप करना चाहिए

अर्घ्य देते समय और उसके उपरांत सूर्य देव के दिव्य मंत्रों का मानसिक अथवा उपांशु जाप करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है। साधक अपनी सुविधानुसार सरल अथवा वैदिक मंत्रों का चयन कर सकते हैं।

सामान्य अर्घ्य दान के समय ‘ॐ सूर्याय नमः’, ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ अथवा ‘ॐ आदित्याय नमः’ का उच्चारण किया जाता है। जो साधक बारह नामों से अर्घ्य देना चाहते हैं, वे प्रत्येक अर्घ्य के साथ ‘ॐ मित्राय नमः’, ‘ॐ रवये नमः’, ‘ॐ भानवे नमः’, ‘ॐ खगाय नमः’, ‘ॐ पूष्णे नमः’, ‘ॐ हिरण्यगर्भाय नमः’, ‘ॐ मरीचये नमः’, ‘ॐ सवित्रे नमः’, ‘ॐ अर्काय नमः’ और ‘ॐ भास्कराय नमः’ जैसे द्वादश नामों का स्मरण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त रामायण के युद्धकांड में वर्णित ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का रविवार के दिन पाठ करना आत्मिक बल और शत्रुओं पर विजय की भावना को जागृत करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

रविवार के विशेष उपाय: गुड़, तांबा और सूर्य नमस्कार

धार्मिक और ज्योतिषीय परंपरा में रविवार के दिन कुछ विशेष उपायों के पालन से जीवन में स्थिरता और एकाग्रता आने की मान्यता है। इस दिन सूर्य देव को भोग में गुड़ और गेहूं के आटे से बनी सात्त्विक वस्तुएं अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के पश्चात इस प्रसाद को स्वयं ग्रहण करें और परिवार के अन्य सदस्यों में वितरित करें।

शारीरिक स्वास्थ्य और प्राण ऊर्जा के संतुलन के लिए रविवार की सुबह सूर्य नमस्कार के बारह आसनों का अभ्यास करना अत्यंत लाभकारी है। सूर्य नमस्कार केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह सूर्य के प्रति समर्पण की एक पारंपरिक योगिक उपासना है। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार पर थोड़ा सा जल छिड़कना और गायत्री मंत्र का 108 बार रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर जाप करना वातावरण को शुद्ध करता है।

रविवार को क्या दान करना चाहिए: परोपकार और पुण्य की परंपरा

भारतीय संस्कृति में दान को केवल वस्तु देने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने अहंकार के विसर्जन और समाज कल्याण की भावना से जोड़ा गया है। रविवार के दिन सूर्य ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान किसी जरूरतमंद, निर्धन अथवा ब्राह्मण को देना विशेष पुण्यकारी माना गया है।

दान की प्रमुख सामग्रियों में गेहूं, शुद्ध देसी गुड़, तांबे के बर्तन, लाल या केसरिया वस्त्र, लाल मसूर की दाल और लाल चंदन शामिल हैं। धार्मिक दृष्टि से दान देते समय किसी प्रकार का अहंकार या सांसारिक लाभ का लोभ मन में नहीं होना चाहिए। सामर्थ्य के अनुसार निस्वार्थ भाव से किया गया लघु दान भी अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराता है।

रविवार के व्रत के नियम: भोजन और आचरण की शुद्धता

जो श्रद्धालु रविवार का विधिवत व्रत रखते हैं, उनके लिए शास्त्रों में कुछ आचार-विचार निर्धारित किए गए हैं। रविवार के व्रत में दिनभर निराहार अथवा केवल एक समय सात्त्विक भोजन करने की परंपरा है। इस व्रत में नमक का त्याग करना प्रमुख नियम माना गया है। बिना नमक का भोजन, जैसे दलिया, खीर, मीठी रोटी या फल ग्रहण किए जाते हैं।

व्रत के दिन तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और तेल से बने गरिष्ठ पदार्थों का सर्वथा त्याग करना चाहिए। इसके साथ ही शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करना, क्रोध, कटु वचन, ईर्ष्या और व्यर्थ के वाद-विवाद से दूर रहना अनिवार्य है। पिता और घर के वरिष्ठजनों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना सूर्य देव की असीम अनुकंपा प्राप्त करने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग माना गया है।

Sunday Surya Puja: निष्कर्ष

रविवार के दिन सूर्य देव की विधिवत उपासना, अर्घ्य दान और सात्त्विक नियमों का पालन मनुष्य को अनुशासन, उत्तम स्वास्थ्य, तेजस्विता और मानसिक शांति प्रदान करता है। प्रातःकालीन सूर्य की किरणें जहां एक ओर शरीर को नवजीवन और विटामिन डी जैसी प्राणशक्ति देती हैं, वहीं वैदिक मंत्रों की ध्वनि अंतर्मन को एकाग्र और निर्मल बनाती है। शुद्ध मन, निष्काम श्रद्धा और शास्त्रोक्त विधि से किया गया सूर्य पूजन साधक के जीवन के अंधकार को दूर कर उसे यश, कीर्ति और आत्मसम्मान के स्वर्णिम मार्ग पर अग्रसर करता है।

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About The Author

Netsha Singh Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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