पाकिस्तान के खिलाफ अंडर 19 एशिया कप 2026 के रोमांचक मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज अर्जुन राजपूत ने जुझारू शतक जड़कर टीम को संकट से निकाला। जब भारतीय टीम के शीर्ष बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे, तब उन्होंने 107 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम का स्कोर 208 रनों तक पहुँचाया। उनकी इस पारी ने न केवल टीम को मजबूती दी बल्कि उनके व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत की कहानी को भी दुनिया के सामने रखा।

मैच का विवरण और अर्जुन की आक्रामक बल्लेबाजी
रविवार, 8 नवंबर को ओमान के अल अमेरात क्रिकेट ग्राउंड, जिसे मिनिस्ट्री टर्फ 2 के नाम से भी जाना जाता है, में भारत और पाकिस्तान की अंडर 19 टीमों के बीच एक ब्लॉकबस्टर मुकाबला खेला गया। इस मैच में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और एक समय टीम ने केवल 22 रनों के कुल स्कोर पर अपने 3 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में 19 वर्षीय अर्जुन राजपूत बल्लेबाजी करने आए और उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजों का निडरता से सामना किया। अर्जुन ने अपनी पारी के दौरान मात्र 80 गेंदों में अपना शतक पूरा किया, जो उनके आक्रामक खेल का प्रमाण है। उन्होंने कुल 85 गेंदों का सामना करते हुए 107 रन बनाए, जिसमें 11 शानदार चौके और 5 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। उनका स्ट्राइक रेट 125 का रहा, जिसने विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा। जब दूसरे भारतीय बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब अर्जुन ने पाकिस्तानी आक्रमण का डटकर मुकाबला किया।
शीर्ष क्रम का पतन और अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन
इस मुकाबले में भारतीय टीम के अन्य प्रमुख बल्लेबाजों से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वे बड़ी पारी खेलने में विफल रहे। टीम के कप्तान लक्ष्य रायचंदानी बिना कोई रन बनाए शून्य पर आउट हो गए। इसके अलावा, पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों के बेटों, आर्यवीर सहवाग और अन्वय द्रविड़ पर भी सबकी नजरें थीं। आर्यवीर ने 22 रन बनाए जबकि अन्वय 10 रन बनाकर आउट हुए। इन दोनों खिलाड़ियों को पाकिस्तान के गेंदबाज निकाब शफीक ने अपना शिकार बनाया। अन्य बल्लेबाजों में वीके विनीत ने 8 रन और यशवर्धन चौहान ने केवल 1 रन का योगदान दिया। अर्जुन राजपूत के बाद टीम की ओर से दूसरा सबसे बड़ा स्कोर काव्य पटेल का रहा, जिन्होंने 23 रनों की पारी खेली। पाकिस्तान की ओर से गेंदबाजी में अली रजा और रिजवानुल्लाह ने दो-दो विकेट लिए, जबकि रिजवानुल्लाह ने ही अंततः अर्जुन राजपूत को आउट किया। अर्जुन के आउट होने के बाद भारत की पारी एक बार फिर लड़खड़ा गई और पूरी टीम 208 रनों पर सिमट गई।
पारिवारिक संघर्ष और पिता का त्याग
अर्जुन राजपूत की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का लंबा संघर्ष और कड़ी मेहनत छिपी है। पंजाब के जालंधर के रहने वाले अर्जुन के पिता, होती राम, ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वर्षों तक सड़क किनारे छोले-कुलचे का ठेला लगाया। होती राम का दिन सुबह बहुत जल्दी शुरू होता था, जब वे खाना तैयार करते थे और फिर दिन भर ग्राहकों का इंतजार करते थे। अर्जुन के दादाजी भी यही काम करते थे। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार परिवार को पड़ोसियों और रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ता था ताकि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चल सके। अर्जुन ने अपने पिता को रोज कड़ी मेहनत करते और अपनी मां को कम संसाधनों में घर संभालते देखा। लगभग एक साल पहले ही होती राम ने ठेला बंद कर एक छोटी बेकरी शुरू की है, जहाँ से वे अब कुलचे तैयार कर डिलीवर करते हैं। अर्जुन ने बताया कि उनके परिवार ने उन्हें कभी अपने संघर्षों का एहसास नहीं होने दिया ताकि वे केवल खेल पर ध्यान दे सकें।
क्रिकेट का सफर और कोच का मार्गदर्शन
अर्जुन ने मात्र सात साल की उम्र में क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने जालंधर स्थित हरभजन सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट में अपनी शुरुआती ट्रेनिंग ली। हालांकि, कुछ समय बाद वह अकादमी बंद हो गई और वहां के कोच भी चले गए, जिससे अर्जुन के क्रिकेट करियर पर संकट के बादल मंडराने लगे। ऐसे कठिन समय में उनके पूर्व कोच विक्रम सिद्धू ने उनकी मदद की। सिद्धू ने अर्जुन की प्रतिभा को पहचाना और उनका दाखिला एक प्रतिष्ठित स्कूल में कराया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से अर्जुन की फीस माफ करने का विशेष अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इससे अर्जुन को अपनी पढ़ाई और क्रिकेट अभ्यास दोनों को जारी रखने में मदद मिली। अर्जुन ने अपनी मेहनत के दम पर पंजाब की अंडर 16 टीम की कप्तानी भी की और वीनू मांकड़ व कूच बिहार ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन करके भारतीय अंडर 19 टीम में अपनी जगह बनाई।
भविष्य की राह और बहुमुखी प्रतिभा
अर्जुन राजपूत केवल एक कुशल बल्लेबाज ही नहीं हैं, बल्कि वे एक प्रभावी ऑफ स्पिनर भी हैं। उन्होंने अपने पिछले मैच में अपनी गेंदबाजी का जलवा दिखाते हुए मात्र 8 रन देकर 3 विकेट हासिल किए थे। पाकिस्तान के खिलाफ उनके इस शतक ने उन्हें चयनकर्ताओं की नजरों में ला दिया है, और उन्हें आगामी श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर 19 टीम में भी शामिल किया गया है। अर्जुन का कहना है कि उनके परिवार ने कभी उन्हें क्रिकेट छोड़ने या नौकरी करने के लिए नहीं कहा, बल्कि हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके पिता अब भी बेकरी के जरिए परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं और उन पर कुछ पुराना कर्ज भी बाकी है। हालांकि, अर्जुन की क्रिकेट में इस तरक्की ने उनके परिवार को एक बेहतर भविष्य की नई उम्मीद दी है।
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