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अन्नपूर्णा जयंती 2026 कब है: 23 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा, मां अन्नपूर्णा की पूजा, कथा और अन्नदान का महत्व BREAKING: पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता: डोनी बल गैंग का सरगना इथियोपिया से भारत लाया गया IPL 2027 Trade: रोहित-हार्दिक ड्रामे का हुआ अंत! मुंबई का साथ छोड़ पंजाब जाएंगे हार्दिक पंड्या, अर्शदीप सिंह पहनेंगे MI की जर्सी – AajTak LIVE: भारत अंडर-19 बनाम पाकिस्तान अंडर-19 8वां मैच, भारत अंडर-19 ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी Natyashastra Explained: Bharata Muni’s Ancient Text on Drama, Dance, Music and Rasa यूपी रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकरण कैसे करें: नौकरी खोजें, रोजगार मेले की जानकारी और प्रोफाइल अपडेट How a Chief Minister Is Appointed: Article 164, Majority, Floor Test and Powers Explained क्रेडिट कार्ड का मिनिमम अमाउंट ड्यू: सिर्फ न्यूनतम रकम चुकाने पर कितना ब्याज लगता है, RBI नियम और बचने का तरीका
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अन्नपूर्णा जयंती 2026 कब है: 23 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा, मां अन्नपूर्णा की पूजा, कथा और अन्नदान का महत्व

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा की जयंती मनाई जाती है। जानिए 2026 में तिथि और इस दिन की परंपराएं।

हाथ में अन्न पात्र और कलछी लिए मां अन्नपूर्णा का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदू परंपरा में अन्न को ब्रह्म का रूप माना गया है। भोजन की देवी के रूप में मां अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है, जिन्हें माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है।
  • अन्नपूर्णा का अर्थ है अन्न से परिपूर्ण। मां अन्नपूर्णा को एक हाथ में अन्न से भरा पात्र और दूसरे हाथ में कलछी लिए दिखाया जाता है।
  • देश के अलग-अलग हिस्सों में मां अन्नपूर्णा की पूजा अलग-अलग समय पर भी होती है।
  • मार्गशीर्ष मास को धार्मिक परंपरा में बहुत पवित्र माना गया है।

हिंदू परंपरा में अन्न को ब्रह्म का रूप माना गया है। भोजन की देवी के रूप में मां अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है, जिन्हें माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा और अन्नदान करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। आइए जानते हैं 2026 में अन्नपूर्णा जयंती कब है और इस दिन की परंपराएं क्या हैं।

अन्नपूर्णा जयंती 2026 की तारीख

पंचांग के अनुसार 2026 में मार्गशीर्ष पूर्णिमा और अन्नपूर्णा जयंती बुधवार, 23 दिसंबर को है। नई दिल्ली के समय के अनुसार पूर्णिमा तिथि 23 दिसंबर को सुबह लगभग 10:47 बजे शुरू होकर 24 दिसंबर को सुबह लगभग 6:58 बजे तक रहेगी। अलग-अलग शहरों में तिथि के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग जरूर देखें। इसी दिन दत्तात्रेय जयंती भी मनाई जाती है।

मुख्य बातें: हाथ में अन्न पात्र और कलछी लिए मां अन्नपूर्णा का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

मां अन्नपूर्णा कौन हैं

अन्नपूर्णा का अर्थ है अन्न से परिपूर्ण। मां अन्नपूर्णा को एक हाथ में अन्न से भरा पात्र और दूसरे हाथ में कलछी लिए दिखाया जाता है। काशी यानी वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित अन्नपूर्णा मंदिर उनका सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है। लोक मान्यता है कि काशी में कोई भूखा नहीं सोता, क्योंकि वहां मां अन्नपूर्णा का वास है।

प्रचलित कथा

एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव ने संसार को माया बताते हुए कहा कि अन्न भी माया है। इससे माता पार्वती अप्रसन्न हुईं और अन्न के महत्व को समझाने के लिए अंतर्धान हो गईं। उनके जाते ही धरती पर अन्न का अभाव हो गया और सभी प्राणी भूख से व्याकुल हो गए। तब माता पार्वती काशी में अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट हुईं और भोजन बांटने लगीं। कहा जाता है कि स्वयं भगवान शिव भिक्षापात्र लेकर उनके पास भिक्षा मांगने पहुंचे और मान गए कि अन्न का महत्व माया से परे है। इसी स्वरूप में मां अन्नपूर्णा को भिक्षा देते हुए और शिव को भिक्षा लेते हुए चित्रों में दिखाया जाता है। यह कथा अलग-अलग परंपराओं में थोड़े बदलाव के साथ सुनाई जाती है।

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पूजा विधि

  • सुबह स्नान के बाद घर और रसोई की सफाई करें।
  • पूजा स्थान पर मां अन्नपूर्णा का चित्र या प्रतिमा रखें।
  • रसोई में चूल्हे या गैस स्टोव की साफ-सफाई करके उसकी भी पूजा करने की परंपरा है।
  • मां को रोली, अक्षत, फूल और धूप-दीप अर्पित करें।
  • घर में बने सात्विक भोजन या खीर का भोग लगाएं।
  • अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें या मां के नाम का जाप करें।
  • पूजा के बाद परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

अन्नदान का महत्व

अन्नपूर्णा जयंती का सबसे बड़ा संदेश अन्न का सम्मान और उसे बांटना है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराने, अनाज दान करने और भंडारे आयोजित करने की परंपरा है। कई मंदिरों और संस्थाओं में इस दिन सामूहिक भोज होता है। मान्यता है कि भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य है।

इस दिन क्या न करें

  • भोजन की बर्बादी न करें, थाली में उतना ही लें जितना खा सकें।
  • रसोई को गंदा न छोड़ें।
  • अन्न का अपमान न करें, जैसे उसे पैर से छूना या फेंकना।
  • घर आए किसी व्यक्ति को भूखा न लौटाएं।

अलग-अलग परंपराएं

देश के अलग-अलग हिस्सों में मां अन्नपूर्णा की पूजा अलग-अलग समय पर भी होती है। पूर्वी भारत में, खासकर बंगाल में, चैत्र मास में अन्नपूर्णा पूजा का चलन है। दक्षिण भारत के कई मंदिरों में नवरात्रि के दौरान भी मां अन्नपूर्णा की विशेष पूजा होती है। कर्नाटक के होरानाडु में स्थित अन्नपूर्णेश्वरी मंदिर भी प्रसिद्ध है।

अन्नपूर्णा स्तोत्र

आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाने वाला अन्नपूर्णा स्तोत्र मां अन्नपूर्णा की स्तुति का प्रसिद्ध पाठ है। इसकी एक प्रसिद्ध पंक्ति में भक्त मां से ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए भिक्षा मांगता है। कई परिवार अन्नपूर्णा जयंती पर इस स्तोत्र का पाठ करते हैं। जो लोग संस्कृत पाठ न कर सकें, वे सरल मन से मां का स्मरण कर सकते हैं।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व

मार्गशीर्ष मास को धार्मिक परंपरा में बहुत पवित्र माना गया है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। इस मास की पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और सत्यनारायण कथा की परंपरा भी है।

आज के संदर्भ में संदेश

अन्नपूर्णा जयंती हमें याद दिलाती है कि अन्न किसान की मेहनत, प्रकृति की देन और समाज की साझा पूंजी है। भोजन की बर्बादी कम करना, बचे भोजन को सही तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचाना और घर में संतुलित भोजन बनाना इस पर्व की भावना के अनुरूप है।

अन्नपूर्णा जयंती 2026 कब है

बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को।

अन्नपूर्णा जयंती किस तिथि को मनाई जाती है

मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: Prokerala: Annapurna Jayanti 2026, Drik Panchang: 2026 Purnima dates, Wikipedia: Annapurna (goddess)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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