केंद्र सरकार आयकर, कॉरपोरेट टैक्स और केंद्रीय GST जैसे कई टैक्स वसूलती है, लेकिन स्कूल, अस्पताल, पुलिस और सड़क जैसी बहुत सी जिम्मेदारियां राज्यों के पास हैं। इसलिए केंद्र के टैक्स का एक हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। यह हिस्सा कितना होगा और किस राज्य को कितना मिलेगा, यह वित्त आयोग की सिफारिशों से तय होता है। आइए समझते हैं कि वित्त आयोग क्या है और 16वें वित्त आयोग ने क्या फॉर्मूला दिया।
वित्त आयोग क्या है
वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति हर पांच साल में या जरूरत पड़ने पर उससे पहले करते हैं। इसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं। आयोग का मुख्य काम केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स से होने वाली कमाई के बंटवारे की सिफारिश करना है।

आयोग क्या-क्या सिफारिश करता है
- केंद्र के विभाज्य टैक्स पूल में राज्यों का कुल हिस्सा कितना हो। इसे वर्टिकल बंटवारा कहते हैं।
- यह हिस्सा अलग-अलग राज्यों में किस फॉर्मूले से बंटे। इसे हॉरिजॉन्टल बंटवारा कहते हैं।
- राज्यों को अनुच्छेद 275 के तहत दिए जाने वाले अनुदान के सिद्धांत।
- पंचायतों और नगर निकायों के संसाधन बढ़ाने के उपाय।
- राष्ट्रपति की ओर से भेजा गया कोई दूसरा वित्तीय विषय।
विभाज्य पूल क्या है
केंद्र के सभी टैक्स राज्यों के साथ नहीं बांटे जाते। सेस और सरचार्ज जैसी कुछ वसूली विभाज्य पूल से बाहर रहती है। बाकी टैक्स से बना पूल ही बंटवारे का आधार बनता है। इसलिए राज्य अक्सर कहते हैं कि सेस और सरचार्ज बढ़ने से उनका असल हिस्सा कम हो जाता है।
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16वां वित्त आयोग
PIB के अनुसार 16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर 2023 की अधिसूचना से हुआ और इसके अध्यक्ष नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया हैं। आयोग ने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी। यह रिपोर्ट 2026-27 से 2030-31 की पांच साल की अवधि के लिए है। अनुच्छेद 281 के तहत रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई का ब्योरा 1 फरवरी 2026 को संसद में रखा गया।
राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत
16वें वित्त आयोग ने विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत बनाए रखने की सिफारिश की, जो 15वें वित्त आयोग के बराबर है। केंद्र सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार किया। PIB के अनुसार 2026-27 के लिए वित्त आयोग अनुदान के रूप में लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
राज्यों के बीच बंटवारे का फॉर्मूला
आयोग ने तय किया कि 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों में किन आधारों पर बंटेगा। इन आधारों को वेटेज यानी भार दिया गया है:
- प्रति व्यक्ति GSDP का अंतर: 42.5 प्रतिशत। जिन राज्यों की प्रति व्यक्ति आय कम है, उन्हें ज्यादा हिस्सा।
- जनसंख्या: 17.5 प्रतिशत।
- जनसांख्यिकीय प्रदर्शन: 10 प्रतिशत। जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन।
- क्षेत्रफल: 10 प्रतिशत।
- वन क्षेत्र: 10 प्रतिशत।
- देश की GDP में योगदान: 10 प्रतिशत। यह नया मानदंड है, जिसे आर्थिक योगदान को मान्यता देने के लिए जोड़ा गया।
फॉर्मूला पर बहस क्यों होती है
हर वित्त आयोग के फॉर्मूले पर राज्यों के बीच बहस होती है। ज्यादा आय वाले और तेजी से विकसित राज्य कहते हैं कि वे देश के टैक्स में ज्यादा योगदान देते हैं लेकिन उन्हें कम हिस्सा मिलता है। वहीं कम आय वाले राज्य कहते हैं कि बराबरी लाने के लिए उन्हें ज्यादा मदद चाहिए। दक्षिण भारत के कई राज्य यह भी कहते रहे हैं कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल होने की वजह से उनका हिस्सा कम नहीं होना चाहिए। GDP में योगदान और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन जैसे मानदंड इसी बहस का जवाब देने की कोशिश माने जाते हैं।
राज्यों के लिए क्यों अहम
कई राज्यों के कुल राजस्व में केंद्रीय टैक्स के हिस्से की बड़ी भूमिका होती है। इससे वे वेतन, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे का खर्च चलाते हैं। इसलिए वित्त आयोग की सिफारिशें अगले पांच साल तक राज्यों के बजट की दिशा तय करती हैं।
वित्त आयोग और GST परिषद में अंतर
GST परिषद यह तय करती है कि किस वस्तु या सेवा पर कितना GST लगे। वहीं वित्त आयोग यह बताता है कि केंद्र के हिस्से में आए टैक्स को राज्यों में कैसे बांटा जाए। दोनों संवैधानिक संस्थाएं हैं, लेकिन इनका काम अलग है। पहला वित्त आयोग 1951 में के.सी. नियोगी की अध्यक्षता में बना था।
परीक्षा के लिए याद रखें
- अनुच्छेद 280: वित्त आयोग का गठन।
- अनुच्छेद 281: सिफारिशें संसद के सामने रखना।
- 16वें आयोग के अध्यक्ष: अरविंद पनगढ़िया।
- राज्यों का हिस्सा: 41 प्रतिशत।
वित्त आयोग का गठन कौन करता है
राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशें कब तक लागू हैं
2026-27 से 2030-31 तक।
स्रोत: PIB: 16th Finance Commission report tabled, PIB: 16th Finance Commission submits report, India Budget: Report of the Sixteenth Finance Commission





