जौ भारत की पुरानी अनाज फसलों में से एक है। यह कम पानी और कम लागत में होने वाली रबी फसल है, इसलिए राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों के कई इलाकों में किसान इसे पसंद करते हैं। जौ का इस्तेमाल पशु आहार, खाने और माल्ट उद्योग में होता है। माल्ट उद्योग की मांग के कारण अच्छी गुणवत्ता वाले जौ के दाम कई बार बेहतर मिलते हैं। आइए जानते हैं जौ का MSP, बुआई का समय और बिक्री से जुड़ी जरूरी बातें।
जौ MSP 2027-28
PIB की जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए जौ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2286 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले सीजन में यह 2150 रुपये था, यानी इस बार 136 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। PIB के अनुसार जौ की उत्पादन लागत 1447 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है और MSP लागत पर लगभग 58 प्रतिशत मार्जिन देता है। यह MSP उस फसल पर लागू होगा जो अभी बोई जा रही है और 2027 में कटेगी।

बुआई का सही समय
ICAR के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान यानी IIWBR की पॉकेट गाइड के अनुसार राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिंचित क्षेत्रों में जौ की समय पर बुआई 10 से 25 नवंबर के बीच करने की सलाह दी जाती है। दूसरे इलाकों और बारानी यानी असिंचित खेती के लिए समय अलग हो सकता है, इसलिए अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।
माल्ट जौ क्या है
माल्ट जौ वह जौ है जिसका इस्तेमाल माल्ट बनाने में होता है। माल्ट से कई तरह के खाद्य और पेय उत्पाद बनते हैं, जैसे माल्ट आधारित पेय पाउडर और बेकरी उत्पाद। माल्ट उद्योग को एक जैसे आकार के, साफ और अच्छी अंकुरण क्षमता वाले दाने चाहिए। IIWBR की गाइड के अनुसार माल्ट जौ के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 100 किलो बीज और कतारों के बीच 18 से 20 सेंटीमीटर की दूरी की सलाह दी गई है।
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माल्ट जौ की किस्में
IIWBR के अनुसार उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए DWRB 160, DWRB 182, DWRB 123 और DWRB 101 जैसी दो-पंक्ति वाली माल्ट जौ की किस्मों की सिफारिश की गई है। DWRB 219 एक नई ज्यादा उपज वाली माल्ट किस्म के रूप में बताई गई है। किस्म चुनते समय अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म और प्रमाणित बीज का ही इस्तेमाल करें।
खाद और सिंचाई
IIWBR की गाइड में माल्ट जौ के लिए प्रति हेक्टेयर 80 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फॉस्फोरस और 20 किलो पोटाश की सामान्य सिफारिश दी गई है। फिर भी मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद की मात्रा तय करना सबसे अच्छा है। जौ को गेहूं की तुलना में कम पानी चाहिए, लेकिन जरूरी अवस्थाओं में सिंचाई से उपज बेहतर होती है।
कॉन्ट्रैक्ट खेती
राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में माल्ट उद्योग किसानों के साथ अनुबंध खेती भी करता है, जिसमें कंपनियां गुणवत्ता वाले दो-पंक्ति जौ की खरीद पहले से तय करती हैं। ऐसे अनुबंध करने से पहले शर्तें, कीमत तय करने का तरीका, गुणवत्ता के मानक और भुगतान की समय सीमा ध्यान से पढ़ें और लिखित में लें।
मंडी में बेचने की तैयारी
- कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाएं, नमी कम होने पर बेहतर दाम मिलते हैं।
- मिट्टी, कंकड़ और टूटे दाने अलग करें।
- माल्ट जौ और सामान्य जौ को अलग रखें, क्योंकि दोनों के खरीदार और दाम अलग हो सकते हैं।
- आसपास की मंडियों का भाव e-NAM पोर्टल या राज्य कृषि विपणन बोर्ड की वेबसाइट पर देखें।
- सरकारी खरीद की व्यवस्था और पंजीकरण की जानकारी अपने राज्य के कृषि विभाग से लें।
जौ के फायदे किसानों के लिए
जौ कम पानी, कम खाद और कम लागत में तैयार होने वाली फसल है। यह कुछ हद तक खारी और कमजोर मिट्टी को भी सहन कर लेती है। पानी की कमी वाले इलाकों में यह गेहूं का अच्छा विकल्प बन सकती है। इसके भूसे का इस्तेमाल पशु चारे के रूप में होता है।
भंडारण में सावधानी
अगर तुरंत बेचने का इरादा नहीं है, तो जौ को सूखी और हवादार जगह पर साफ बोरियों में रखें। बोरियों को सीधे जमीन या दीवार से सटाकर न रखें, नीचे लकड़ी का तख्ता या प्लास्टिक शीट बिछाएं। समय-समय पर दानों में कीड़े या नमी की जांच करते रहें। भंडारण में नमी आने से दाने खराब हो सकते हैं और माल्ट उद्योग ऐसे दाने लेने से मना कर सकता है।
जौ MSP 2027-28 कितना है
2286 रुपये प्रति क्विंटल।
जौ की बुआई कब करें
राजस्थान और पश्चिमी यूपी में सिंचित क्षेत्रों में 10 से 25 नवंबर के बीच, अपने क्षेत्र के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से पुष्टि करें।
सलाह लें: बुआई, अनुबंध या बिक्री का फैसला लेने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें।
स्रोत: PIB: Cabinet approves MSP for Rabi Crops for Marketing Season 2027-28, ICAR-IIWBR: Barley Cultivation in India, Pocket Guide, ICAR-IIWBR: Technologies developed





