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टैक्सी नंबर 1729 और रामानुजन: इरोड के इस गणितज्ञ के सम्मान में हर 22 दिसंबर मनता है राष्ट्रीय गणित दिवस

महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाई जाती है। जानिए उनकी कहानी।

ब्लैकबोर्ड पर गणितीय सूत्रों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • गणित को अक्सर कठिन विषय माना जाता है, लेकिन भारत ने दुनिया को कई महान गणितज्ञ दिए हैं।
  • मद्रास में क्लर्क की नौकरी करते हुए रामानुजन ने अपने काम के बारे में इंग्लैंड के गणितज्ञों को पत्र लिखे।
  • रामानुजन ने संख्या सिद्धांत, अनंत श्रेणियों, सतत भिन्नों और विभाजन फलन जैसे क्षेत्रों में अहम योगदान दिया।
  • इस दिन स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में गणित से जुड़ी प्रतियोगिताएं, क्विज, व्याख्यान, प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं होती हैं।

गणित को अक्सर कठिन विषय माना जाता है, लेकिन भारत ने दुनिया को कई महान गणितज्ञ दिए हैं। इनमें श्रीनिवास रामानुजन का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। बिना औपचारिक उच्च शिक्षा के उन्होंने गणित में ऐसे काम किए जिन पर आज भी शोध होता है। उनके सम्मान में हर साल 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास और रामानुजन की प्रेरक कहानी।

राष्ट्रीय गणित दिवस कब से

PIB और The Hindu की जानकारी के अनुसार तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 26 दिसंबर 2011 को चेन्नई में रामानुजन की 125वीं जयंती के मौके पर घोषणा की कि 22 दिसंबर को हर साल राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया गया। 2012 से यह दिन पूरे देश में मनाया जा रहा है।

मुख्य बातें: ब्लैकबोर्ड पर गणितीय सूत्रों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

रामानुजन का शुरुआती जीवन

MacTutor के अनुसार श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के इरोड में हुआ था। उनका बचपन कुंभकोणम में बीता। बचपन से ही उनकी गणित में असाधारण रुचि थी। कहा जाता है कि एक पुरानी गणित की किताब ने उनके भीतर इस विषय के लिए जुनून जगा दिया। गणित पर ज्यादा ध्यान देने के कारण वे दूसरे विषयों में पीछे रह गए और कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। इसके बावजूद वे अकेले अपने दम पर गणित पर काम करते रहे और अपनी नोटबुक में हजारों परिणाम लिखते रहे।

हार्डी से पत्र व्यवहार

मद्रास में क्लर्क की नौकरी करते हुए रामानुजन ने अपने काम के बारे में इंग्लैंड के गणितज्ञों को पत्र लिखे। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध गणितज्ञ जी एच हार्डी ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें कैम्ब्रिज बुलाया। 1914 में रामानुजन इंग्लैंड पहुंचे। वहां हार्डी के साथ मिलकर उन्होंने कई अहम शोध किए।

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सम्मान

MacTutor के अनुसार 1918 में रामानुजन को लंदन की रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया। वे यह सम्मान पाने वाले शुरुआती भारतीयों में थे। उसी साल वे कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज के फेलो भी बने।

1729 की कहानी

रामानुजन से जुड़ी सबसे मशहूर कहानी 1729 नंबर की है। कहा जाता है कि एक बार हार्डी बीमार रामानुजन से मिलने टैक्सी से गए, जिसका नंबर 1729 था। हार्डी ने कहा कि यह नंबर काफी नीरस लगता है। रामानुजन ने तुरंत जवाब दिया कि नहीं, यह बहुत दिलचस्प संख्या है। यह सबसे छोटी संख्या है जिसे दो अलग-अलग तरीकों से दो घनों के योग के रूप में लिखा जा सकता है:

  • 1729 = 1³ + 12³ (1 + 1728)
  • 1729 = 9³ + 10³ (729 + 1000)

तब से 1729 को हार्डी-रामानुजन संख्या कहा जाता है।

गणित में योगदान

रामानुजन ने संख्या सिद्धांत, अनंत श्रेणियों, सतत भिन्नों और विभाजन फलन जैसे क्षेत्रों में अहम योगदान दिया। हार्डी के साथ विभाजन फलन पर उनका काम और मॉक थीटा फलन जैसे विचार आज भी गणितज्ञों के लिए शोध का विषय हैं। उनकी नोटबुक में दर्ज कई परिणामों को बाद में दूसरे गणितज्ञों ने सिद्ध किया।

कम उम्र में निधन

इंग्लैंड में रहते हुए रामानुजन की सेहत बिगड़ने लगी। 1919 में वे भारत लौटे और 26 अप्रैल 1920 को सिर्फ 32 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। इतने छोटे जीवन में उन्होंने जो काम किया, उसने उन्हें दुनिया के महानतम गणितज्ञों में शामिल कर दिया।

फिल्म और किताबों में रामानुजन

रामानुजन के जीवन पर कई किताबें लिखी गई हैं। रॉबर्ट कैनिगेल की किताब द मैन हू न्यू इन्फिनिटी काफी चर्चित रही, जिस पर इसी नाम से एक अंग्रेजी फिल्म भी बनी। इन किताबों और फिल्मों ने दुनिया भर में नई पीढ़ी को रामानुजन की कहानी से परिचित कराया। तमिलनाडु के कुंभकोणम में उनका घर आज एक स्मारक के रूप में संरक्षित है।

गणित दिवस कैसे मनाया जाता है

इस दिन स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में गणित से जुड़ी प्रतियोगिताएं, क्विज, व्याख्यान, प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं होती हैं। मकसद है कि बच्चों में गणित का डर कम हो और वे इसे रोचक तरीके से समझें। कई संस्थान रामानुजन के जीवन पर फिल्में और प्रस्तुतियां भी दिखाते हैं।

भारत की गणित परंपरा

रामानुजन से पहले भी भारत में गणित की समृद्ध परंपरा रही है। शून्य की अवधारणा और दशमलव स्थानीय मान पद्धति के विकास में भारतीय गणितज्ञों का बड़ा योगदान माना जाता है। आर्यभट, ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे गणितज्ञों ने बीजगणित, त्रिकोणमिति और खगोल गणना में अहम काम किया। राष्ट्रीय गणित दिवस इस पूरी परंपरा को याद करने का भी मौका है।

छात्रों के लिए संदेश

रामानुजन की कहानी बताती है कि जिज्ञासा, मेहनत और लगन से कठिन परिस्थितियों में भी बड़ा काम किया जा सकता है। गणित सिर्फ अंकों और सूत्रों का विषय नहीं, बल्कि सोचने और समस्याएं सुलझाने का तरीका है।

राष्ट्रीय गणित दिवस कब मनाया जाता है

हर साल 22 दिसंबर को।

1729 को क्या कहा जाता है

हार्डी-रामानुजन संख्या।

स्रोत: PIB: National Mathematics Day and Year declared, The Hindu: Year-long celebration, MacTutor: Srinivasa Ramanujan biography

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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