छठ महापर्व में सूर्य देव के साथ जिस देवी की पूजा होती है, उन्हें छठी मैया कहा जाता है। छठ के गीतों, कथाओं और प्रार्थनाओं में छठी मैया से संतान, परिवार और सुख की कामना की जाती है। इस बार छठ 13 से 16 नवंबर 2026 तक है। जानिए छठी मैया कौन हैं और उनसे जुड़ी प्रचलित कथाएं। ये मान्यताएं लोक परंपरा और पुराण कथाओं पर आधारित हैं, और अलग-अलग इलाकों में इनके रूप अलग मिलते हैं।
षष्ठी देवी
छठी मैया को षष्ठी देवी का लोक रूप माना जाता है। षष्ठी यानी छठी। पुराण परंपरा में षष्ठी देवी को बच्चों की रक्षा करने वाली देवी बताया गया है। उत्तर भारत में बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी पूजन की परंपरा भी इन्हीं से जुड़ी मानी जाती है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी को होने के कारण भी इस पर्व का नाम छठ पड़ा।

सूर्य से संबंध
लोक मान्यता में छठी मैया को सूर्य देव की बहन बताया जाता है। इसलिए छठ में सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया की पूजा की जाती है। कुछ परंपराओं में उन्हें प्रकृति का छठा अंश भी कहा गया है।
राजा प्रियव्रत की कथा
एक प्रचलित कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत को संतान नहीं थी। यज्ञ के बाद उन्हें पुत्र हुआ, पर वह मृत पैदा हुआ। दुखी राजा के सामने षष्ठी देवी प्रकट हुईं और बालक को जीवित कर दिया। देवी ने कहा कि जो उनकी पूजा करेगा, उसकी संतान की रक्षा होगी। तभी से षष्ठी देवी की पूजा शुरू मानी जाती है।
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द्रौपदी की कथा
एक लोक कथा के अनुसार जब पांडव अपना राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा। इसके बाद पांडवों को उनका राज्य वापस मिला।
कर्ण की कथा
महाभारत के कर्ण को सूर्य पुत्र माना जाता है। लोक मान्यता है कि कर्ण रोज घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। छठ में पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने की परंपरा को इससे जोड़ा जाता है। बिहार के अंग प्रदेश, यानी भागलपुर-मुंगेर इलाके को कर्ण से जोड़ा जाता है।
सीता की कथा
एक और मान्यता के अनुसार लंका से लौटने के बाद भगवान राम और सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य की उपासना की थी। बिहार के मुंगेर में सीता चरण से जुड़ी कथा भी इसी परंपरा से जोड़ी जाती है।
छठी मैया की पूजा का भाव
छठी मैया की पूजा में कोई मूर्ति जरूरी नहीं होती। व्रती नदी, सूर्य और प्रकृति के बीच खड़े होकर पूजा करते हैं। यह पर्व प्रकृति, स्वच्छता, संयम और परिवार के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
गीतों में छठी मैया
छठ के गीतों में छठी मैया को ममता भरी मां के रूप में याद किया जाता है, जो व्रतियों की पुकार सुनती हैं। कई गीतों में व्रती उनसे बेटे-बेटी की खुशहाली और परिवार की रक्षा मांगते हैं।
क्या छठी मैया का कोई मंदिर है?
बिहार के देव, औरंगाबाद में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर है, जहां छठ पर भारी भीड़ होती है। कई जगह छठी मैया के स्थानीय स्थल भी हैं।
स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





