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नहाय खाय: छठ के पहले दिन कद्दू-भात और चने की दाल क्यों बनती है, शुद्धता के नियम और तैयारी

छठ के पहले दिन नहाय खाय पर व्रती स्नान के बाद लौकी या कद्दू की सब्जी, अरवा चावल और चने की दाल का सात्विक भोजन करते हैं। जानिए इस दिन के नियम, भोजन बनाने का तरीका और घर की तैयारी।

छठ के पहले दिन नहाय खाय के नियम का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • छठ महापर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है। नाम से ही साफ है, इस दिन व्रती स्नान करके शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं और चार दिन के व्रत का संकल्प लेते हैं।
  • लौकी को शुद्ध, हल्का और आसानी से पचने वाला माना जाता है, और इस मौसम में यह आसानी से मिलती है।
  • नहाय खाय से व्रती जमीन पर सोते हैं और सादगी से रहते हैं। चार दिन के कठिन व्रत से पहले यह शरीर और मन को तैयार करने का दिन है।
  • नहीं। परंपरा में इस दिन घर का बना शुद्ध और सात्विक भोजन ही लिया जाता है।

छठ महापर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है। नाम से ही साफ है, इस दिन व्रती स्नान करके शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं और चार दिन के व्रत का संकल्प लेते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार नहाय खाय 13 नवंबर 2026 को है। जानिए नहाय खाय के नियम और इस दिन का भोजन।

दिन की शुरुआत

  • सुबह जल्दी उठकर घर की पूरी सफाई
  • व्रती नदी, तालाब या घर पर स्नान करते हैं, कई लोग पानी में गंगाजल मिलाते हैं
  • नए या साफ धुले कपड़े पहने जाते हैं
  • पूजा स्थान पर सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है
मुख्य बातें: छठ के पहले दिन नहाय खाय के नियम का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

कद्दू-भात क्यों

नहाय खाय के भोजन को कई जगह कद्दू-भात कहा जाता है। इसमें आमतौर पर ये चीजें होती हैं:

  • लौकी या कद्दू की सब्जी, जो बिहार में कद्दू कहलाती है
  • अरवा चावल का भात
  • चने की दाल, जिसमें लौकी भी डाली जाती है
  • कई परिवारों में आंवले की चटनी या साग

लौकी को शुद्ध, हल्का और आसानी से पचने वाला माना जाता है, और इस मौसम में यह आसानी से मिलती है। इसलिए व्रत से पहले शरीर को तैयार करने के लिए यह भोजन चुना गया माना जाता है।

भोजन बनाने के नियम

  • भोजन व्रती खुद या परिवार की कोई महिला शुद्धता के साथ बनाती है
  • प्याज, लहसुन और मांसाहार घर में नहीं बनता
  • कई परिवार सादे नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करते हैं
  • कई घरों में भोजन मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से पकता है
  • शुद्ध घी का इस्तेमाल होता है

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भोजन का क्रम

पहले व्रती भोजन करते हैं, उसके बाद परिवार के दूसरे सदस्य। व्रती इस दिन आमतौर पर एक ही बार भोजन करते हैं। प्रसाद के रूप में यह भोजन पड़ोसियों और रिश्तेदारों को भी दिया जाता है।

घर की तैयारी

  • पूजा के सामान के लिए अलग, साफ जगह तय करें
  • गेहूं और चावल धोकर सुखाने का काम कई परिवार इसी दिन से शुरू करते हैं
  • प्रसाद के बर्तन अलग रखे जाते हैं
  • घर में शांत और सात्विक माहौल रखा जाता है

व्रती के लिए

नहाय खाय से व्रती जमीन पर सोते हैं और सादगी से रहते हैं। चार दिन के कठिन व्रत से पहले यह शरीर और मन को तैयार करने का दिन है। व्रती इस दिन पर्याप्त पानी पिएं और आराम करें, क्योंकि अगले दिन खरना के बाद लंबा निर्जला व्रत शुरू होता है।

सेहत का ध्यान

जिन व्रतियों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या कोई दूसरी बीमारी है, वे व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

क्या नहाय खाय पर बाहर का खाना खा सकते हैं?

नहीं। परंपरा में इस दिन घर का बना शुद्ध और सात्विक भोजन ही लिया जाता है।

परिवार की भागीदारी

नहाय खाय से ही घर के सभी सदस्य सात्विक भोजन करते हैं और व्रती की मदद में जुट जाते हैं।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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