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BREAKING: सोने के गहनों की खरीद पर जीएसटी और मेकिंग चार्ज के नियमों की पूरी जानकारी

सोने के गहने खरीदते समय ग्राहकों को कुल कीमत पर 3 प्रतिशत जीएसटी देना होता है, जिसमें मेकिंग चार्ज भी शामिल है।

BREAKING: सोने के गहनों की खरीद पर जीएसटी और मेकिंग चार्ज के नियमों की पूरी जानकारी
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / National Museum of American History)

सारांश

  • सोने के आभूषण खरीदते समय ग्राहकों के मन में अक्सर टैक्स की गणना को लेकर कई तरह के सवाल होते हैं।
  • जब आप किसी शोरूम या दुकान से सोने, चांदी या हीरे के गहने खरीदते हैं, तो सरकार के नियमों के मुताबिक पूरी ट्रांजैक्शन वैल्यू पर जीएसटी लगाया जाता है।
  • जीएसटी नियमों में 5 प्रतिशत की दर का उल्लेख मिलता है, लेकिन यह सीधे तौर पर ग्राहकों के लिए नहीं है।
  • भारत में रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए जीएसटी की दरें शुरुआत से ही स्पष्ट रही हैं।

सोने के आभूषण खरीदते समय ग्राहकों के मन में अक्सर टैक्स की गणना को लेकर कई तरह के सवाल होते हैं। सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, तैयार जूलरी की कुल कीमत पर एक निश्चित दर से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी लगाया जाता है। कई बार खरीदार इस भ्रम में रहते हैं कि सोने की धातु और उसे बनाने के शुल्क पर अलग-अलग दरों से टैक्स देना होगा, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। ग्राहकों को बिल का भुगतान करने से पहले यह समझना जरूरी है कि टैक्स का असली आधार क्या है और जूलर को कितना भुगतान करना उचित है।

मुख्य जीएसटी नियम
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / National Museum of American History)

जूलरी की कुल कीमत पर टैक्स का गणित

जब आप किसी शोरूम या दुकान से सोने, चांदी या हीरे के गहने खरीदते हैं, तो सरकार के नियमों के मुताबिक पूरी ट्रांजैक्शन वैल्यू पर जीएसटी लगाया जाता है। ट्रांजैक्शन वैल्यू का अर्थ है वह कुल राशि जिसमें सोने की मौजूदा कीमत और उसे गहने का रूप देने के लिए लिया गया मेकिंग चार्ज दोनों शामिल होते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आप दस ग्राम सोने की एक चेन खरीदते हैं और उसकी धातु की कीमत 1,28,000 रुपये है, जबकि उस पर मेकिंग चार्ज 12,000 रुपये तय किया गया है, तो उस चेन की कुल कीमत 1,40,000 रुपये हो जाएगी। नियम के अनुसार, आपको इस पूरी 1,40,000 रुपये की राशि पर 3 प्रतिशत की दर से जीएसटी देना होगा। इस गणना के हिसाब से कुल टैक्स 4,200 रुपये बनता है। यहां यह ध्यान देना आवश्यक है कि मेकिंग चार्ज को बिल में अलग से दिखाने के बावजूद टैक्स की दर में कोई बदलाव नहीं आता है।

भ्रम और अधिक वसूली से बचाव

बाजार में अक्सर यह धारणा देखी जाती है कि सोने की कीमत पर 3 प्रतिशत और मेकिंग चार्ज पर 5 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ता है। यदि कोई जूलर इस गलत तरीके से टैक्स की गणना करता है, तो ग्राहक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऊपर दिए गए उदाहरण के अनुसार, यदि 1,28,000 रुपये पर 3 प्रतिशत टैक्स लगाया जाए तो वह 3,840 रुपये होगा और 12,000 रुपये के मेकिंग चार्ज पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाने से वह 600 रुपये बनेगा। इन दोनों को जोड़ने पर कुल टैक्स 4,440 रुपये हो जाता है, जो कि सही टैक्स 4,200 रुपये से 240 रुपये अधिक है। इसलिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा कुल कीमत पर 3 प्रतिशत जीएसटी की ही मांग करें। जीएसटी नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि जूलरी की कुल बिक्री मूल्य पर ही टैक्स लागू होगा, चाहे मेकिंग चार्ज को अलग से लिखा गया हो या कुल कीमत में जोड़कर दिखाया गया हो।

जॉब वर्क और 5 प्रतिशत जीएसटी का वास्तविक संदर्भ

जीएसटी नियमों में 5 प्रतिशत की दर का उल्लेख मिलता है, लेकिन यह सीधे तौर पर ग्राहकों के लिए नहीं है। यह दर जॉब वर्क यानी जूलरी बनाने के कार्य से जुड़ी है। जब एक बड़ा जूलरी कारोबारी अपने पास मौजूद सोना किसी कारीगर को देता है और वह कारीगर उस सोने से गहने बनाकर वापस देता है, तो कारीगर द्वारा ली जाने वाली मजदूरी या जॉब चार्ज पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। यह लेनदेन पूरी तरह से कारोबारी और कारीगर के बीच का विषय है। यदि कारीगर जीएसटी के तहत पंजीकृत है, तो वह अपने बिल पर यह टैक्स लगाता है, जिसका इनपुट टैक्स क्रेडिट जूलरी कारोबारी को मिल जाता है। यदि कारीगर पंजीकृत नहीं है, तो कारोबारी को रिवर्स चार्ज के माध्यम से खुद टैक्स चुकाना होता है। किसी भी स्थिति में, दुकान से तैयार गहने खरीदने वाले ग्राहक से इस 5 प्रतिशत टैक्स की वसूली करना नियमों के विरुद्ध है।

जीएसटी काउंसिल के फैसले और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए जीएसटी की दरें शुरुआत से ही स्पष्ट रही हैं। 1 जुलाई 2017 को जब जीएसटी लागू हुआ था, तभी से सोने और चांदी पर 3 प्रतिशत की दर निर्धारित की गई थी। वैट व्यवस्था से जीएसटी में बदलाव के दौरान बैंकों और नामित एजेंसियों के पास मौजूद स्टॉक के लिए भी यही नियम तय किए गए थे। सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के तहत टैक्स स्लैब में कुछ बदलाव किए गए, लेकिन जेम्स एंड जूलरी सेक्टर के लिए 3 प्रतिशत की दर को बरकरार रखा गया। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक जो 3 सितंबर 2025 को आयोजित हुई थी, उसमें भी इस स्पष्टीकरण को जारी रखा गया कि जूलरी की कुल कीमत पर ही टैक्स लगेगा। इन्वेस्ट इंडिया के मौजूदा एफएक्यू में भी इन्हीं नियमों की पुष्टि की गई है।

आयात और अन्य धातुओं पर टैक्स के नियम

सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के आयात पर भी टैक्स के कड़े नियम लागू हैं। बेसिक कस्टम ड्यूटी के अतिरिक्त, इन धातुओं के आयात पर 3 प्रतिशत आईजीएसटी भी लगाया जाता है। बैंक इस आईजीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करने के पात्र होते हैं। ग्राहकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि चाहे वे सोने के गहने खरीदें, चांदी के या हीरे के, तैयार जूलरी पर जीएसटी की दर 3 प्रतिशत ही रहती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी जूलरी का कुल बिल 2 लाख रुपये है, तो उस पर लगने वाला जीएसटी 6,000 रुपये होगा। हालांकि, यदि कोई ग्राहक अपना पुराना सोना देकर केवल उसकी मरम्मत करवाता है या उसे नया रूप दिलवाता है, तो टैक्स की गणना के आधार अलग हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में ग्राहकों को जूलर से बिल में लगाए गए टैक्स के आधार के बारे में विस्तार से पूछताछ करनी चाहिए ताकि वे किसी भी गलत वसूली से बच सकें।

यह भी पढ़ें: GST Council Meeting: जीएसटी काउंसिल बैठक की तारीख बदली, 8 अक्टूबर को होंगे बड़े फैसले

स्रोत: Aaj Tak

लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

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