कोविड-19 महामारी के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO का नाम लगभग रोज खबरों में आता था। टीकाकरण, नई बीमारियों की चेतावनी, दवाओं की गुणवत्ता और स्वास्थ्य से जुड़े दिशानिर्देश, इन सब में WHO की अहम भूमिका होती है। आइए समझते हैं कि WHO क्या है, यह कैसे काम करता है और भारत से इसका क्या रिश्ता है।
WHO की स्थापना
WHO की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसका संविधान 7 अप्रैल 1948 को लागू हुआ, जब संयुक्त राष्ट्र के 26वें सदस्य देश ने इसे स्वीकार किया। इसी तारीख को हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। WHO का संविधान 22 जुलाई 1946 को न्यूयॉर्क में हस्ताक्षर के लिए खुला था। WHO संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है और इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में है।

WHO क्या करता है
- दुनिया में बीमारियों और स्वास्थ्य खतरों पर नजर रखना और चेतावनी जारी करना।
- महामारी और स्वास्थ्य आपात स्थितियों में देशों की मदद और समन्वय।
- टीकों, दवाओं और जांच के लिए मानक और दिशानिर्देश तय करना।
- पोषण, मातृ और शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर नीतिगत सलाह।
- स्वास्थ्य आंकड़े और शोध रिपोर्ट जारी करना।
- देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने में तकनीकी सहायता।
WHO कैसे चलता है
WHO का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय वर्ल्ड हेल्थ असेंबली है, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि होते हैं। इसकी बैठक आमतौर पर हर साल जिनेवा में होती है। इसमें संगठन की नीतियां, बजट और महानिदेशक की नियुक्ति जैसे फैसले होते हैं। एक कार्यकारी बोर्ड असेंबली के फैसलों को लागू करने में मदद करता है। संगठन का प्रमुख महानिदेशक होता है।
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क्षेत्रीय कार्यालय
WHO के छह क्षेत्रीय कार्यालय हैं। भारत दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का हिस्सा है, जिसका क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली में है। इसके अलावा WHO का भारत में देश कार्यालय भी है।
भारत और WHO
WHO इंडिया की वेबसाइट के अनुसार भारत 12 जनवरी 1948 को WHO के संविधान का पक्षकार बना। भारत ने WHO के साथ मिलकर चेचक उन्मूलन और पोलियो उन्मूलन जैसे बड़े अभियानों में काम किया। 2014 में भारत को WHO की ओर से पोलियो मुक्त प्रमाणित दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का हिस्सा माना गया। टीकाकरण, टीबी, मलेरिया और दूसरे रोगों के नियंत्रण में भी WHO और भारत सरकार साथ काम करते हैं। पारंपरिक चिकित्सा पर WHO का वैश्विक केंद्र गुजरात के जामनगर में स्थापित किया गया है।
अमेरिका का WHO से हटना
संयुक्त राष्ट्र के संधि रिकॉर्ड और WHO के दस्तावेजों के अनुसार अमेरिका ने 22 जनवरी 2025 को WHO से हटने की सूचना दी, जो एक साल के नोटिस की शर्त के अनुसार 22 जनवरी 2026 से प्रभावी हुई। अमेरिका लंबे समय तक WHO के सबसे बड़े वित्तीय योगदानकर्ताओं में रहा था, इसलिए इसका असर संगठन के बजट और कार्यक्रमों पर पड़ने की चर्चा होती रही है।
पैसा कहां से आता है
WHO का खर्च सदस्य देशों के अनिवार्य योगदान और स्वैच्छिक योगदान से चलता है। स्वैच्छिक योगदान देश, परोपकारी संस्थाएं और दूसरे संगठन देते हैं। लंबे समय से यह बहस रही है कि स्वैच्छिक योगदान पर ज्यादा निर्भरता से संगठन की प्राथमिकताओं पर असर पड़ता है, इसलिए अनिवार्य योगदान बढ़ाने की कोशिशें भी हुई हैं।
WHO की अहम उपलब्धियां
WHO के नेतृत्व में चले वैश्विक अभियानों की सबसे बड़ी सफलता चेचक का उन्मूलन मानी जाती है। 1980 में चेचक को दुनिया से खत्म घोषित किया गया। इसके अलावा पोलियो के मामलों में भारी कमी, टीकाकरण कार्यक्रमों का विस्तार, तंबाकू नियंत्रण पर अंतरराष्ट्रीय संधि और जरूरी दवाओं की मॉडल सूची जैसे कदम भी WHO के अहम कामों में गिने जाते हैं। जरूरी दवाओं की सूची कई देशों को अपनी दवा नीति बनाने में मदद करती है।
आम लोगों के लिए WHO की जानकारी
WHO की वेबसाइट पर कई बीमारियों के बारे में तथ्य पत्र यानी फैक्ट शीट उपलब्ध हैं, जिनमें लक्षण, बचाव और इलाज की सामान्य जानकारी होती है। स्वास्थ्य से जुड़ी अफवाहों के दौर में ऐसे आधिकारिक स्रोत भरोसेमंद जानकारी पाने का अच्छा जरिया हैं। हालांकि किसी भी बीमारी में इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह ही जरूरी है।
आलोचना और सुधार
कोविड-19 के दौरान WHO की प्रतिक्रिया की गति और कुछ फैसलों पर सवाल उठे। इसके बाद महामारी की तैयारी और प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सुधार और अंतरराष्ट्रीय समझौते पर बातचीत हुई। समर्थकों का कहना है कि सीमित संसाधनों और सदस्य देशों पर निर्भरता के बावजूद WHO वैश्विक स्वास्थ्य में समन्वय की सबसे अहम संस्था है।
WHO का मुख्यालय कहां है
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में।
विश्व स्वास्थ्य दिवस कब मनाया जाता है
हर साल 7 अप्रैल को, जिस दिन 1948 में WHO का संविधान लागू हुआ।
स्रोत: WHO: History, WHO India: About us, UN Treaty Collection: Constitution of WHO





