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BREAKING: राहुल गांधी ने पेट्रोल में एथेनॉल की अधिक मात्रा पर केंद्र सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की लैब रिपोर्ट का हवाला देते हुए पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलावट का आरोप लगाया है।

BREAKING: राहुल गांधी ने पेट्रोल में एथेनॉल की अधिक मात्रा पर केंद्र सरकार को घेरा
फाइल फोटो (www.amarujala.com)

सारांश

  • राहुल गांधी ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की निर्धारित सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
  • इन नमूनों को जांच के लिए ऐसी प्रयोगशालाओं में भेजा गया था जो आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), नायरा और शेल जैसी कंपनियों के पेट्रोल में भी एथेनॉल की मात्रा तय सीमा से ऊपर पाई गई है।
  • इसके अलावा, अधिक एथेनॉल वाला ईंधन इंजन के पुर्जों को नुकसान पहुंचा सकता है।

राहुल गांधी ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की निर्धारित सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कर्नाटक सरकार द्वारा सात जिलों से लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कई पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से काफी अधिक पाई गई है। उनके अनुसार, यह स्थिति वाहन मालिकों के लिए आर्थिक नुकसान और तकनीकी समस्याओं का कारण बन रही है। इस मामले में उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है और तेल कंपनियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

पेट्रोल जांच के मुख्य बिंदु
फाइल फोटो (www.amarujala.com)

कर्नाटक सरकार की जांच और नमूनों का विश्लेषण

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने ईंधन की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठाया है। उन्होंने “ई20 बना 420” के नारे के साथ केंद्र सरकार की नीतियों पर प्रहार किया है। इस विवाद की जड़ कर्नाटक सरकार द्वारा की गई एक जांच है। राज्य सरकार ने ईंधन की शुद्धता और मानकों की जांच करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत कर्नाटक के सात अलग-अलग जिलों से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों को लेने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि क्या तेल कंपनियां सरकार द्वारा निर्धारित 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की सीमा का पालन कर रही हैं या नहीं।

इन नमूनों को जांच के लिए ऐसी प्रयोगशालाओं में भेजा गया था जो आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं। जांच के जो परिणाम सामने आए हैं, वे काफी चौंकाने वाले बताए गए हैं। राहुल गांधी के अनुसार, कुल 14 नमूनों की जांच की गई थी, जिनमें से 11 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत की सीमा से कहीं अधिक पाई गई। यह इस बात का संकेत है कि पेट्रोल पंपों पर बेचा जा रहा ईंधन मानकों के अनुरूप नहीं है। इस जांच ने तेल विपणन कंपनियों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विभिन्न तेल कंपनियों के नमूनों में मिली अनियमितताएं

प्रयोगशाला की रिपोर्ट में विशिष्ट तेल कंपनियों के नाम और उनमें पाए गए एथेनॉल के प्रतिशत का विवरण दिया गया है। राहुल गांधी ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है। इसी तरह, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के नमूनों में यह मात्रा 30.5 प्रतिशत दर्ज की गई। ये आंकड़े सरकार द्वारा प्रचारित 20 प्रतिशत की सीमा से बहुत अधिक हैं। यह समस्या केवल सरकारी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र की कंपनियों में भी देखी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), नायरा और शेल जैसी कंपनियों के पेट्रोल में भी एथेनॉल की मात्रा तय सीमा से ऊपर पाई गई है। राहुल गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि इन कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं ने अपनी रिपोर्ट में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा का उल्लेख ही नहीं किया। इसे एक बड़ी चूक या जानबूझकर की गई छुपाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। जब कंपनियों की अपनी लैब डेटा साझा नहीं करती हैं, तो उपभोक्ताओं के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं बचता कि वे अपनी गाड़ी में किस गुणवत्ता का ईंधन भरवा रहे हैं।

वाहन चालकों और इंजनों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव

पेट्रोल में एथेनॉल की अधिक मात्रा केवल एक नीतिगत उल्लंघन नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता की जेब और उनके वाहनों पर पड़ता है। राहुल गांधी ने विस्तार से बताया कि कैसे यह स्थिति उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रही है। अधिकांश वाहन इंजन एक निश्चित सीमा तक ही एथेनॉल मिश्रण को सहन करने के लिए बने होते हैं। जब यह मात्रा 30 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है, तो इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। इससे वाहन का माइलेज कम हो जाता है, जिसका अर्थ है कि वाहन एक लीटर ईंधन में कम दूरी तय करता है।

इसके अलावा, अधिक एथेनॉल वाला ईंधन इंजन के पुर्जों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके कारण वाहन मालिकों को बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ता है और मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। राहुल गांधी ने कहा कि लोग अपनी मेहनत की कमाई से शौक और जरूरत के लिए गाड़ियां खरीदते हैं, लेकिन घटिया ईंधन की वजह से उनकी गाड़ियां बर्बाद हो रही हैं। पेट्रोल पंपों पर इस बात की कोई जानकारी नहीं दी जाती कि पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिलाया गया है, जिससे उपभोक्ताओं के पास कोई विकल्प नहीं बचता है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठाए गए गंभीर सवाल

इस पूरे मामले को लेकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि देश की गाड़ियों की टंकियों में वास्तव में क्या भरा जा रहा है और पेट्रोल में एथेनॉल की असली मात्रा कितनी है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि 20 प्रतिशत से अधिक मिलावट करने वाली कंपनियों पर सरकार कब और क्या कार्रवाई करेगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उपभोक्ता महंगे पेट्रोल की कीमत चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें बदले में सस्ता एथेनॉल दिया जा रहा है, जिससे केवल कंपनियों को फायदा हो रहा है।

अंत में, राहुल गांधी ने अपनी बहस की चुनौती को दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे को भी चर्चा में शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार की इन नीतियों से असल में किसे फायदा हो रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए। ईंधन की गुणवत्ता में पारदर्शिता की कमी और मानकों का उल्लंघन एक गंभीर विषय है जो सीधे तौर पर करोड़ों वाहन चालकों से जुड़ा है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और संबंधित तेल कंपनियां इन आरोपों और प्रयोगशाला की रिपोर्टों पर क्या स्पष्टीकरण देती हैं।

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स्रोत: Amar Ujala

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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