रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि सभी अग्निवीर अब सेना में नियमित सैनिक के रूप में शामिल होने के पात्र होंगे। यह अवसर उन्हें उनके शुरुआती चार साल के कार्यकाल के बाद मिलने वाले दो साल के सेवा विस्तार को पूरा करने पर दिया जाएगा। यह निर्णय उन जवानों के लिए एक बड़ा अवसर है जो देश की सेवा को स्थायी रूप से जारी रखना चाहते हैं।

बागडोगरा वायु सेना स्टेशन पर रक्षा मंत्री का संबोधन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार, 7 नवंबर, 2026 को पश्चिम बंगाल के बागडोगरा वायु सेना स्टेशन पहुंचे थे। वहां उन्होंने वायु सेना के जवानों के साथ बातचीत की और उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं दीं। इसी दौरान उन्होंने अग्निवीरों के भविष्य को लेकर सरकार की नई योजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सरकार ने अग्निवीरों के लिए कार्यकाल को बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे उनके लिए स्थायी भर्ती के रास्ते खुल जाएंगे। रक्षा मंत्री ने इस कदम को अग्निवीरों के लिए दिवाली का एक विशेष उपहार बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार रक्षा बलों के कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह निर्णय अग्निवीरों को राष्ट्र की सेवा करने का एक और मौका प्रदान करेगा।
कार्यकाल विस्तार और नियमित भर्ती की प्रक्रिया
सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि जो अग्निवीर अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले हैं, उन्हें दो साल का अतिरिक्त विस्तार दिया जाएगा। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इस छह साल की कुल सेवा अवधि के बाद, सभी अग्निवीर नियमित सैनिक के रूप में नामांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, यह प्रक्रिया उनकी स्वयं की इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करने पर निर्भर करेगी। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, जो अग्निवीर शारीरिक रूप से फिट होंगे, अनुशासित रहेंगे और सेवा में बने रहने के इच्छुक होंगे, उन्हें छह साल की सेवा के बाद नियमित सैनिक के रूप में शामिल कर लिया जाएगा। यह बदलाव उन हजारों युवाओं के लिए एक स्पष्ट करियर मार्ग सुनिश्चित करेगा जो वर्तमान में इस योजना के तहत कार्यरत हैं।
कैबिनेट का निर्णय और सैन्य नेतृत्व की प्रतिक्रिया
अग्निवीरों के कार्यकाल में विस्तार और उनके स्थायीकरण का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था। इस निर्णय की जानकारी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन एस राजा सुब्रमण्यम ने बुधवार को दी थी। जनरल सुब्रमण्यम ने बताया कि यह बदलाव लगभग 18,300 अग्निवीरों के सेवा से बाहर होने से ठीक तीन हफ्ते पहले घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला सभी अग्निवीरों के लिए एक नया रास्ता खोलेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि लगभग उन सभी को रक्षा बलों में शामिल कर लिया जाए। वर्तमान में भारतीय सेना के विभिन्न अंगों में 3,00,000 से अधिक अग्निवीर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनके लिए यह खबर एक बड़ी राहत लेकर आई है।
अग्निपथ योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
अग्निपथ भर्ती योजना की शुरुआत जून 2022 में की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की तीनों सेवाओं की औसत आयु सीमा को कम करना था। इसके तहत 17.5 साल से 21 साल की उम्र के युवाओं को चार साल के कार्यकाल के लिए भर्ती किया जाता था। मूल योजना में प्रावधान था कि केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही 15 साल की नियमित सेवा के लिए बरकरार रखा जाएगा, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को कार्यकाल पूरा होने पर सेवा मुक्त कर दिया जाएगा। इसी प्रावधान को लेकर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की थी और उन 75 प्रतिशत जवानों के भविष्य पर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि अग्निपथ योजना को वापस नहीं लिया गया है, बल्कि इसमें सुधार कर अग्निवीरों के लिए स्थायी होने के अवसर बढ़ाए गए हैं।
भविष्य की राह और चयन के कड़े मानदंड
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी साफ किया कि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से योग्यता पर आधारित होगी। अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने के लिए अपनी शारीरिक दक्षता और अनुशासन का प्रमाण देना होगा। यह विस्तार केवल उन लोगों के लिए है जो स्वेच्छा से सेना में बने रहना चाहते हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल सेना को अनुभवी जवान मिलेंगे, बल्कि युवाओं में सेना के प्रति उत्साह भी बना रहेगा। आने वाले समय में, यह देखा जाएगा कि कैसे यह नया ढांचा सेना की परिचालन क्षमता और युवाओं के रोजगार की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाता है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने दोहराया है कि यह सुधार सेना को आधुनिक और युवा बनाए रखने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।
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स्रोत: The Hindu





