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चना MSP 2027-28: रबी सीजन के लिए 5958 रुपये प्रति क्विंटल, कितनी बढ़ोतरी हुई और किसान बिक्री की तैयारी कैसे करें

रबी की प्रमुख दलहन फसल चने का MSP 2027-28 के लिए 5958 रुपये प्रति क्विंटल है। जानिए किसानों के लिए इसका क्या मतलब है।

मंडी में बोरियों में भरे चने के दानों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • चना भारत की सबसे अहम दलहन फसलों में से एक है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है।
  • इस बार सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम में और उसके बाद सरसों और मसूर में हुई है।
  • अच्छा दाम पाने के लिए अच्छी उपज और गुणवत्ता जरूरी है। प्रमाणित और क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म का बीज लें, बीज उपचार करें और राइजोबियम कल्चर का इस्तेमाल करें।
  • दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती हैं और फसल चक्र में इनकी अहम भूमिका है।

चना भारत की सबसे अहम दलहन फसलों में से एक है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है। चने की बुआई अक्टूबर-नवंबर में होती है और फसल फरवरी से अप्रैल के बीच मंडियों में आती है। इस समय खेतों में चने की फसल बोई जा रही है, ऐसे में किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि अगले सीजन में सरकार ने चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य कितना तय किया है।

चना MSP 2027-28

PIB की जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 30 सितंबर 2026 को रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए MSP को मंजूरी दी। इसके तहत चने का MSP 5958 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। रबी विपणन सीजन 2026-27 में यह 5875 रुपये था, यानी इस बार 83 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

मुख्य बातें: मंडी में बोरियों में भरे चने के दानों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

लागत और मार्जिन

PIB के अनुसार चने की अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत 3751 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है। 5958 रुपये का MSP इस लागत पर लगभग 59 प्रतिशत मार्जिन देता है। सरकार का कहना है कि रबी फसलों का MSP उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना के स्तर पर तय करने के बजट 2018-19 के ऐलान के अनुरूप रखा गया है।

दूसरी रबी फसलों से तुलना

  • गेहूं: 2610 रुपये (25 रुपये की बढ़ोतरी)
  • जौ: 2286 रुपये (136 रुपये की बढ़ोतरी)
  • चना: 5958 रुपये (83 रुपये की बढ़ोतरी)
  • मसूर: 7390 रुपये (390 रुपये की बढ़ोतरी)
  • सरसों: 6613 रुपये (413 रुपये की बढ़ोतरी)
  • कुसुम: 7215 रुपये (675 रुपये की बढ़ोतरी)

इस बार सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम में और उसके बाद सरसों और मसूर में हुई है। चने में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रही है।

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MSP कब लागू होगा

यह MSP उस फसल पर लागू होगा जिसकी बुआई अभी हो रही है और जो 2027 में कटकर मंडियों में आएगी। सरकारी खरीद की तारीखें, केंद्र और पंजीकरण की प्रक्रिया हर राज्य अपने स्तर पर घोषित करता है। दलहन की सरकारी खरीद आम तौर पर केंद्र की मूल्य समर्थन योजना के तहत नैफेड और NCCF जैसी एजेंसियों के जरिए होती है।

मंडी भाव और MSP

MSP एक न्यूनतम मूल्य है, जिस पर सरकारी एजेंसियां खरीद करती हैं। खुले बाजार में चने का भाव मांग, आपूर्ति, आयात और स्टॉक की स्थिति के हिसाब से MSP से ऊपर या नीचे हो सकता है। जब बाजार भाव MSP से ऊपर हो, तो किसान अक्सर खुले बाजार में बेचना पसंद करते हैं। जब भाव MSP से नीचे जाए, तो सरकारी खरीद अहम हो जाती है। अपनी मंडी का ताजा भाव e-NAM या Agmarknet पोर्टल पर देखा जा सकता है।

बिक्री की तैयारी कैसे करें

  • सरकारी खरीद के लिए राज्य के पोर्टल पर समय पर पंजीकरण कराएं।
  • जमीन के कागज, आधार और बैंक खाते की जानकारी सही रखें, ताकि भुगतान सीधे खाते में आए।
  • कटाई के बाद चने को अच्छी तरह सुखाएं, ज्यादा नमी होने पर खरीद में दिक्कत हो सकती है।
  • दानों से मिट्टी, कंकड़ और टूटे दाने अलग करें।
  • खरीद केंद्र पर गुणवत्ता के तय मानकों की जानकारी पहले से ले लें।

बुआई के समय ध्यान दें

अच्छा दाम पाने के लिए अच्छी उपज और गुणवत्ता जरूरी है। प्रमाणित और क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म का बीज लें, बीज उपचार करें और राइजोबियम कल्चर का इस्तेमाल करें। उकठा रोग और फली छेदक कीट चने की बड़ी समस्याएं हैं, इनके लिए कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह पर समय से उपाय करें।

चने की प्रमुख किस्में

अलग-अलग क्षेत्रों के लिए देसी और काबुली चने की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं। देसी चना छोटे और गहरे रंग के दाने वाला होता है, जबकि काबुली चना बड़े और हल्के रंग के दाने वाला होता है, जिसका बाजार भाव अक्सर अलग रहता है। अपने इलाके के लिए अनुशंसित किस्म की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से लें।

भंडारण

अगर तुरंत बेचना नहीं है, तो चने को साफ, सूखी और हवादार जगह पर रखें। भंडारण में घुन यानी दाल भृंग चने को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए दानों को अच्छी तरह सुखाकर और साफ बोरियों या धातु की कोठियों में रखें। सरकारी गोदामों में भंडारण और उस पर मिलने वाले कर्ज की सुविधा की जानकारी भी ली जा सकती है।

दलहन क्यों जरूरी

दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती हैं और फसल चक्र में इनकी अहम भूमिका है। भारत दालों का बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों है, इसलिए सरकार दलहन की खेती को बढ़ावा देने पर जोर देती रही है।

चना MSP 2027-28 कितना है

5958 रुपये प्रति क्विंटल।

पिछले साल चने का MSP कितना था

रबी विपणन सीजन 2026-27 में 5875 रुपये प्रति क्विंटल।

सलाह लें: बिक्री, भंडारण या खरीद पंजीकरण से जुड़ा फैसला लेने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या मंडी समिति से ताजा जानकारी जरूर लें।

स्रोत: PIB: Cabinet approves MSP for Rabi Crops for Marketing Season 2027-28, e-NAM: National Agriculture Market, Agmarknet: Commodity prices

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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