आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए भारत सरकार ने अगले 24 महीनों में देश की पहली स्वदेशी AI चिप (GPU) तैयार करने का लक्ष्य रखा है. Semiconductor Mission 2.0 के तहत ₹1.27 लाख करोड़ के निवेश से देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइनिंग इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा, जिससे Nvidia जैसी विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हार्डवेयर की अनिवार्य भूमिका
वर्तमान युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा निरंतर विस्तृत हो रहा है. मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से चैटबॉट से संवाद स्थापित करने से लेकर जटिल डेटा प्रोसेसिंग और एआई टूल का उपयोग करके चित्र बनाने तक, एआई का प्रभाव हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. इन उन्नत प्रणालियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विशेष प्रकार के हार्डवेयर की आवश्यकता होती है, जिन्हें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट या जीपीयू के नाम से जाना जाता है. जीपीयू की कार्यक्षमता सामान्य प्रोसेसर की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि ये एक साथ कई जटिल गणनाओं को बहुत तेजी से पूरा करने में सक्षम होते हैं. एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और उन्हें प्रभावी ढंग से चलाने के लिए यह तकनीक अनिवार्य है. वर्तमान में वैश्विक बाजार में इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियों का वर्चस्व है, जिसके कारण भारत को अपनी एआई संबंधी आवश्यकताओं के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता है.
स्वदेशी चिप निर्माण की दिशा में भारत का संकल्प
भारत सरकार ने इस तकनीकी निर्भरता को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने जानकारी दी है कि भारत अगले 24 महीनों के भीतर अपनी पहली स्वदेशी एआई चिप विकसित करने की योजना पर कार्य कर रहा है. यह पहल देश के तकनीकी बुनियादी ढांचे को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. हालांकि भारत पहले से ही शक्ति और वेगा जैसे प्रोसेसर पर कार्य कर रहा है, परंतु वे मुख्य रूप से सीपीयू की श्रेणी में आते हैं. एआई के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए जीपीयू की आवश्यकता होती है जो समानांतर प्रसंस्करण में अधिक कुशल होते हैं. सरकार का मुख्य ध्यान ऐसे जीपीयू विकसित करने पर है जो न केवल कम बिजली की खपत करें, बल्कि लागत के मामले में भी प्रभावी हों.
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और निवेश का प्रभाव
सरकार इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रही है. इस विशाल निवेश का उपयोग चिप निर्माण संयंत्रों की स्थापना, डिजाइनिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने और देश में चिप परीक्षण की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इसके साथ ही नई मशीनरी तैयार करने की क्षमता को भी विकसित किया जाएगा. यह निवेश न केवल चिप निर्माण तक सीमित है, बल्कि यह देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने का प्रयास है. इस योजना के सफल होने पर भारतीय कंपनियों को एक नया विकल्प मिलेगा, जिससे विदेशी निर्भरता में कमी आएगी और घरेलू उद्योगों को लाभ प्राप्त होगा.
भविष्य की चुनौतियां और तकनीकी आत्मनिर्भरता
अगले दो वर्षों का समय इस तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए निर्धारित किया गया है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस चिप का निर्माण कौन सी संस्था करेगी या इसका अंतिम स्वरूप क्या होगा. वर्तमान में एनवीडिया जैसी कंपनियों का इस क्षेत्र में वर्षों का अनुभव है, जिसके कारण भारत के लिए एक प्रतिस्पर्धी चिप तैयार करना एक बड़ी चुनौती है. फिर भी, सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि एआई के लिए अपनी चिप विकसित करना देश के डिजिटल भविष्य को मजबूती प्रदान करेगा. यदि यह प्रयास निर्धारित समय सीमा में सफल होता है, तो यह भारत के तकनीकी नवाचार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. यह पहल न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने का एक प्रयास भी है.
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स्रोत: Prabhat Khabar





