दिल्ली में वायु गुणवत्ता का संकट और गंभीर स्थिति
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शहर के कई हिस्सों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई है। पंजाबी बाग जैसे इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 के स्तर तक पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। प्रशासन द्वारा ग्रैप (GRAP) के तीसरे चरण को लागू करने के बावजूद, प्रदूषण के स्तर में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं देखा गया है। शहर की फिजाओं में धुंध की परत छाई हुई है, जिससे दृश्यता भी प्रभावित हो रही है।

विभिन्न क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर
पंजाबी बाग के अलावा, आरके पुरम में 449 और आईआईटी दिल्ली में 446 AQI दर्ज किया गया है। पश्चिमी दिल्ली के द्वारका में स्थिति बेहद खराब रही और वहां AQI 444 दर्ज हुआ। इसके अलावा मथुरा रोड में 425, सिरीफोर्ट में 423 और नॉर्थ कैंपस में भी AQI 423 रहा। पूसा में 415, चांदनी चौक में 417, बुराड़ी क्रॉसिंग पर 411 और एनएसयूटी जाफरपुर में AQI 409 दर्ज किया गया है। ये सभी इलाके 400 से ऊपर AQI के साथ गंभीर श्रेणी में बने हुए हैं। हालांकि नरेला, आईटीओ और मंदिर मार्ग जैसे कुछ क्षेत्रों में प्रदूषण में मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन वहां भी हवा की गुणवत्ता बहुत खराब बनी हुई है। लोधी रोड जैसे कुछ निगरानी केंद्रों पर भी हवा की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है।
मौसम का पूर्वानुमान और पर्यावरणीय चुनौतियां
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में रहने की आशंका है। सुबह के समय हल्के से मध्यम कोहरे की संभावना बनी हुई है। वेंटिलेशन इंडेक्स और हवा की धीमी गति प्रदूषकों के फैलाव में बाधा डाल रही है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। विभाग के अनुसार, 6,000 से कम वेंटिलेशन इंडेक्स और 10 किलोमीटर प्रति घंटा से कम औसत हवा की रफ्तार प्रदूषकों के छंटने के लिए प्रतिकूल होती है। 10 नवंबर के बाद हवा की गुणवत्ता में बहुत खराब श्रेणी में लौटने की संभावना है, लेकिन अगले छह दिनों तक यह इसी श्रेणी में रहने का अनुमान है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस जहरीली हवा को लेकर चेतावनी जारी की है, क्योंकि यह फेफड़ों और श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए जोखिम पैदा करती है।
वाहनों पर नए प्रतिबंध और सरकारी कार्रवाई
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब से हर साल 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच दूसरे राज्यों से आने वाले बीएस-6 मानकों से नीचे के वाहनों पर दिल्ली में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस अवधि में वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों और बसों का प्रवेश वर्जित होगा। परिवहन विभाग ने प्रमुख टोल प्लाजा, डीएनडी, रजोकरी, गाजीपुर, सिंघू और टीकरी जैसे प्रवेश द्वारों पर 250 से अधिक प्रवर्तन कर्मियों की तैनाती की है ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासनिक प्रयास
प्रशासन ने पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश को भी पत्र लिखकर डीजल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का आग्रह किया है। दिल्ली के प्रमुख प्रदूषण केंद्रों पर निगरानी बढ़ाई गई है। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करना है ताकि सर्दियों के दौरान दिल्लीवासियों को राहत मिल सके। हालांकि, वर्तमान में निगरानी केंद्रों पर हवा की स्थिति में बहुत अधिक सुधार नहीं देखा जा रहा है, और अधिकांश केंद्र बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में ही बने हुए हैं। प्रशासन की ओर से लगातार इन क्षेत्रों की मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सके।
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स्रोत: Aaj Tak, Amar Ujala






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