क्रेडिट कार्ड का बिल आता है तो उसमें दो रकम प्रमुखता से दिखती हैं, कुल बकाया यानी टोटल अमाउंट ड्यू और न्यूनतम देय रकम यानी मिनिमम अमाउंट ड्यू। कई लोग सोचते हैं कि मिनिमम अमाउंट ड्यू चुका देने से काम हो गया। लेकिन यह सोच महंगी पड़ सकती है। आइए समझते हैं कि मिनिमम अमाउंट ड्यू क्या है, इसे चुकाने पर क्या होता है और RBI के नियम क्या कहते हैं।
मिनिमम अमाउंट ड्यू क्या है
मिनिमम अमाउंट ड्यू वह सबसे कम रकम है, जिसे नियत तारीख तक चुकाने पर आपका कार्ड खाता डिफॉल्ट नहीं माना जाता और लेट पेमेंट फीस नहीं लगती। आम तौर पर यह कुल बकाया का छोटा हिस्सा होता है, जिसमें EMI की किस्तें, फीस, टैक्स और कुछ अन्य शुल्क जुड़े हो सकते हैं। सटीक फॉर्मूला कार्ड जारी करने वाला बैंक तय करता है।

सिर्फ मिनिमम चुकाने पर क्या होता है
अगर आप सिर्फ मिनिमम अमाउंट ड्यू चुकाते हैं, तो बची हुई रकम पर ब्याज लगता है। क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर आम तौर पर दूसरे कर्जों की तुलना में काफी ज्यादा होती है। इसके अलावा एक और बड़ा असर होता है, ब्याज मुक्त अवधि खत्म हो जाती है। RBI के मास्टर डायरेक्शन के अनुसार अगर पिछले बिल का कोई बकाया बचा है, तो ब्याज मुक्त अवधि की सुविधा नहीं मिलती। यानी नए खर्च पर भी खरीद की तारीख से ही ब्याज लग सकता है, जब तक पूरा बकाया साफ न हो जाए।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए आपका बिल 50,000 रुपये है और मिनिमम अमाउंट ड्यू 2,500 रुपये। आपने सिर्फ 2,500 रुपये चुकाए। अब बचे 47,500 रुपये पर बैंक की तय दर से ब्याज लगेगा। अगले महीने आपने 10,000 रुपये की नई खरीदारी की, तो उस पर भी खरीद की तारीख से ब्याज लग सकता है, क्योंकि पुराना बकाया बाकी है। हर महीने सिर्फ मिनिमम चुकाने पर कर्ज बहुत धीरे घटता है और कुल ब्याज बहुत ज्यादा हो सकता है। यह उदाहरण समझाने के लिए है, असली गणना कार्ड की शर्तों पर निर्भर करती है।
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RBI के नियम क्या कहते हैं
RBI ने 2022 में क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़े मास्टर डायरेक्शन जारी किए। इनमें कहा गया है कि कार्ड जारी करने वाले बैंक मिनिमम अमाउंट ड्यू की गणना इस तरह करें कि नकारात्मक परिशोधन न हो। आसान भाषा में, मिनिमम रकम इतनी कम न हो कि उससे उस महीने का ब्याज भी पूरा न चुके और कर्ज हर महीने बढ़ता जाए। इसके अलावा बिना भुगतान वाले शुल्क, लेवी और टैक्स को ब्याज के लिए मूल रकम में नहीं जोड़ा जा सकता। ब्याज लगाने का तरीका और उदाहरण कार्ड के मोस्ट इम्पोर्टेंट टर्म्स एंड कंडीशंस यानी MITC में बताना जरूरी है।
क्रेडिट स्कोर पर असर
मिनिमम अमाउंट ड्यू समय पर चुकाने से खाता डिफॉल्ट नहीं माना जाता, इसलिए क्रेडिट स्कोर पर सीधा नकारात्मक असर नहीं पड़ता। लेकिन बकाया लगातार ऊंचा रहने से क्रेडिट उपयोग अनुपात बढ़ता है, जिसका स्कोर पर असर पड़ सकता है। और अगर मिनिमम भी न चुकाया जाए, तो लेट फीस लगती है और देरी की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को जा सकती है।
कर्ज के जाल से कैसे बचें
- हर महीने कोशिश करें कि पूरा बिल चुकाएं।
- पूरा न हो सके तो मिनिमम से जितना ज्यादा हो सके उतना चुकाएं।
- ऑटो डेबिट सेट करें ताकि तारीख न छूटे।
- बड़ी रकम बकाया हो, तो बैंक से EMI में बदलने का विकल्प और उसकी ब्याज दर व शुल्क की तुलना करें।
- जरूरत हो तो कम ब्याज वाले पर्सनल लोन से कार्ड का बकाया चुकाने पर विचार करें, लेकिन शुल्क और शर्तें ध्यान से देखें।
- नए खर्च तब तक सीमित रखें जब तक पुराना बकाया साफ न हो जाए।
बिल ध्यान से पढ़ें
कार्ड के बिल में भुगतान की नियत तारीख, कुल बकाया, मिनिमम अमाउंट ड्यू, ब्याज और शुल्क का ब्योरा दिया होता है। बिल में कोई गलत शुल्क दिखे, तो तुरंत बैंक से शिकायत करें। बैंक से संतोषजनक जवाब न मिलने पर RBI की एकीकृत लोकपाल योजना के तहत शिकायत की जा सकती है।
मिनिमम अमाउंट ड्यू चुकाने से ब्याज लगता है या नहीं
हां, बची हुई रकम पर ब्याज लगता है और ब्याज मुक्त अवधि का लाभ भी नहीं मिलता।
क्या मिनिमम अमाउंट ड्यू चुकाने से लेट फीस बचती है
हां, नियत तारीख तक मिनिमम रकम चुकाने पर लेट पेमेंट फीस नहीं लगती।
सलाह लें: कर्ज से जुड़ा कोई बड़ा फैसला लेने से पहले अपने बैंक से शर्तें समझें और जरूरत हो तो किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।
स्रोत: RBI: Master Direction – Credit Card and Debit Card – Issuance and Conduct Directions, 2022, RBI: Notification on Credit Card and Debit Card Directions, RBI Sachet: Be aware





