छठ महापर्व में पहनावा भी परंपरा का हिस्सा है। व्रती आमतौर पर साफ, नए या धुले हुए पारंपरिक कपड़े पहनते हैं। इस बार छठ 13 से 16 नवंबर 2026 तक है, जब उत्तर भारत में सुबह-शाम ठंड बढ़ने लगती है। संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य दोनों में व्रती पानी में खड़े होते हैं। इसलिए कपड़े ऐसे होने चाहिए जो परंपरा के अनुकूल हों और आराम भी दें। जानिए छठ पूजा में क्या पहनें।
व्रती महिलाओं के लिए साड़ी
ज्यादातर व्रती महिलाएं साड़ी पहनती हैं। पीली, लाल, नारंगी या केसरिया रंग की साड़ी छठ में खास पसंद की जाती है। कई परिवारों में बिना सिलाई वाले कपड़े पहनने की परंपरा है।
- सूती या हल्की सिल्क साड़ी पानी में ज्यादा भारी नहीं होती
- बहुत लंबा पल्लू या भारी कढ़ाई वाली साड़ी पानी में संभालना मुश्किल करती है
- अर्घ्य के बाद बदलने के लिए एक सूखी साड़ी साथ रखें
- पेटीकोट और ब्लाउज भी सूती रखें, ताकि गीले होने पर परेशानी कम हो

सिंदूर और श्रृंगार
छठ में व्रती महिलाएं नाक से मांग तक लंबा सिंदूर लगाती हैं। इसे सुहाग और परिवार की लंबी उम्र से जोड़ा जाता है। पानी में उतरने से पहले ज्यादा मेकअप से बचें, क्योंकि गीला होने पर वह आंखों में जा सकता है।
पुरुषों के लिए
व्रती पुरुष आमतौर पर धोती पहनते हैं। जो पुरुष दउरा लेकर घाट जाते हैं, वे कुर्ता-पायजामा या धोती-कुर्ता पहनते हैं। दउरा सिर पर उठाने के लिए सिर पर गमछा रखें, ताकि बोझ संतुलित रहे।
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बच्चों के कपड़े
बच्चों को पारंपरिक कुर्ता या फ्रॉक पहनाया जा सकता है, पर ऊपर से स्वेटर या जैकेट जरूर रखें। सुबह के अर्घ्य के लिए बच्चों को टोपी और मोजे पहनाएं।
ठंड से बचाव
उषा अर्घ्य के लिए लोग भोर से पहले घाट पहुंचते हैं। उस समय ठंड और नमी सबसे ज्यादा होती है।
- व्रती पानी से निकलते ही गर्म शॉल या कंबल ओढ़ें
- परिवार का कोई सदस्य सूखे कपड़े और तौलिया लेकर पास खड़ा रहे
- बुजुर्ग व्रती के लिए गर्म पानी का थर्मस साथ रखें, पारण के बाद काम आएगा
- अपने इलाके का मौसम पूर्वानुमान एक दिन पहले देख लें
पैरों का ध्यान
घाट की सीढ़ियां और किनारे गीले होने से फिसलन भरे होते हैं। फिसलन रहित चप्पल पहनें। पानी में उतरते समय नंगे पैर हों तो धीरे चलें, क्योंकि नीचे पत्थर या कांच हो सकता है।
साथ ले जाने का सामान
- सूखे कपड़ों का एक पूरा सेट
- तौलिया और शॉल
- प्लास्टिक का थैला, गीले कपड़े रखने के लिए
- छोटी टॉर्च, सुबह के अंधेरे के लिए
क्या व्रती नए कपड़े ही पहनें
कई परिवारों में नए कपड़े पहनने की परंपरा है, पर साफ धुले कपड़े भी पहने जाते हैं। अपने परिवार की परंपरा मानें।
काले कपड़े क्यों नहीं पहनते
छठ जैसे शुभ अवसर पर कई परिवार काले कपड़ों से बचते हैं। चटक और हल्के रंग ज्यादा पसंद किए जाते हैं।
स्रोत: बिहार पर्यटन, भारत मौसम विज्ञान विभाग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





