दीपावली के पावन अवसर पर अयोध्या में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दस साल के शासनकाल का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। इस चर्चा के दौरान उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था, आर्थिक सुधारों, और बुनियादी ढांचे के विकास को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने सत्ता विरोधी लहर से जुड़े सवालों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य की जनता सरकार के कार्यों से पूरी तरह संतुष्ट है और सरकार के प्रति कोई नकारात्मक भाव नहीं रखती है।

विकास और सांस्कृतिक विरासत का समन्वय
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उनकी सरकार विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को एक बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकालकर देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने का दावा किया। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, राज्य का अब मुख्य लक्ष्य देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क, और हवाई अड्डों के विस्तार ने राज्य की आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि जब उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब राज्य में केवल डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि वर्तमान में देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में मौजूद है। इसके अतिरिक्त, मेट्रो कनेक्टिविटी का विस्तार सात शहरों तक किया गया है, और क्रियाशील हवाई अड्डों की संख्या दो से बढ़कर 17 हो गई है।
कानून व्यवस्था और निवेश का नया माहौल
योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय राज्य में अराजकता, दंगे, कर्फ्यू, और माफिया का बोलबाला था। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में प्रदेश में कानून का शासन मजबूती से स्थापित हुआ है, जिसने निवेश के लिए एक सुरक्षित और बेहतर माहौल तैयार किया है। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई का बचाव करते हुए माफिया पर सख्ती को राज्य की शांति के लिए आवश्यक बताया। प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 5 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए उन्होंने जापान और सिंगापुर की यात्राओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 36 सेक्टोरल नीतियों और सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के माध्यम से उद्योग जगत को हर संभव सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और रोजगार
युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने अब तक 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र प्रदान किए हैं। उन्होंने पिछली सरकारों पर भाई भतीजावाद, परिवारवाद, और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने पूरी तरह पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाई है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है। वर्तमान में पुलिस कांस्टेबल के 32 हजार पदों और होमगार्ड के 42 हजार पदों सहित अन्य अधीनस्थ सेवाओं पर भर्ती प्रक्रिया तेजी से जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर उपलब्ध कराना है।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विरासत का सम्मान
मुख्यमंत्री ने धार्मिक स्थलों के विकास को भी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा, वृंदावन, और विंध्यवासिनी धाम के विकास कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 4,500 से अधिक धार्मिक स्थलों का पुनरोद्धार किया गया है। प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ को उन्होंने आधुनिकता और परंपरा का एक अनूठा संगम बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में विकास का अर्थ केवल सड़क, बिजली, और उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आस्था के केंद्रों को उचित सम्मान देना भी है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता सरकार के विकास और विरासत के इस दोहरे दृष्टिकोण को भलीभांति समझती है और समर्थन करती है।
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स्रोत: Aaj Tak





