भोजपुरी संगीत और सिनेमा का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। समय-समय पर कई ऐसे दिग्गज कलाकारों ने इस भाषा में अपनी कला का जादू बिखेरा है, जिन्हें आज भी याद किया जाता है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और खास पल तब जुड़ा जब बॉलीवुड की मशहूर और सुरीली गायिका अलका याग्निक ने अपने करियर में पहली बार किसी भोजपुरी गाने को अपनी आवाज दी। यह गाना आज से ठीक 42 साल पहले भैया दूज जैसे पवित्र त्योहार के मौके पर विशेष रूप सेखास बन गया था। इस गाने के माध्यम से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मिसाल को संगीत के जरिए बहुत ही सुंदर ढंग से पेश किया गया था।

अलका याग्निक की सुरीली आवाज का भोजपुरी में जादू
संगीत प्रेमियों के लिए अलका याग्निक की आवाज किसी जादू से कम नहीं है। उन्होंने अपने लंबे और शानदार गायन सफर में हिंदी के अलावा कई अन्य भाषाओं में भी गीत गाए हैं। जब उन्होंने भोजपुरी संगीत की दुनिया में कदम रखा और अपना पहला गाना गाया, तो श्रोताओं ने उसे खुले दिल से अपनाया। उनकी मधुर और सधी हुई आवाज ने इस गाने में चार चांद लगा दिए। भैया दूज के पावन पर्व पर आधारित इस गीत के बोल और इसकी धुन इतनी कर्णप्रिय थी कि सुनने वाले मंत्रमुग्ध हो गए। यह गाना आज भी पुराने संगीत प्रेमियों के जेहन में ताजा है।
42 साल पहले भैया दूज के पावन पर्व पर रिलीज
आज से 42 साल पहले रिलीज हुआ यह भोजपुरी गाना भैया दूज के त्योहार के लिए एक अनमोल तोहफा साबित हुआ था। भाई और बहन के अटूट प्रेम को समर्पित इस गीत ने उस समय के त्योहार के माहौल को पूरी तरह से बदल दिया था। घर-घर में इस गाने की गूंज सुनाई दी और इसने पर्व की मिठास को और बढ़ा दिया। इतने साल बीत जाने के बाद भी इस गीत की प्रासंगिकता और इसका महत्व कम नहीं हुआ है। यह गाना इस बात का प्रमाण है कि बेहतरीन कला समय की सीमाओं से परे होती है।
पद्मा खन्ना की शानदार एक्टिंग ने जीता सबका दिल
किसी भी गाने की सफलता में केवल उसकी गायकी और संगीत का ही योगदान नहीं होता, बल्कि उसमें काम करने वाले कलाकारों के अभिनय की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। इस ऐतिहासिक भोजपुरी गाने में मशहूर अभिनेत्री पद्मा खन्ना ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग से जान फूंक दी थी। स्क्रीन पर उनके भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ। भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं को पद्मा खन्ना ने जिस सहजता और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा, उसने हर देखने वाले की आंखें नम और दिल खुश कर दिया। उनकी यह अदाकारी आज भी याद की जाती है।
गाने के बोल, धुन और विजुअल्स का अनूठा संगम
इस गाने की रचना में इसके बोल, संगीत की धुन और विजुअल्स का बहुत ही सुंदर तालमेल देखने को मिलता है। गीत के बोल सीधे दिल पर असर करते हैं और भाई-बहन के प्रेम की पवित्रता को बयां करते हैं। वहीं, इसकी धुन इतनी मनमोहक है कि एक बार सुनने के बाद बार-बार सुनने का मन करता है। इसके विजुअल्स में पारंपरिक भारतीय संस्कृति और भैया दूज की रौनक को बहुत ही सादगी और खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। पद्मा खन्ना के अभिनय ने इन विजुअल्स को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
भोजपुरी संगीत इतिहास में इस गीत का विशेष स्थान
भोजपुरी संगीत के इतिहास में इस गाने को एक मील का पत्थर माना जाता है। अलका याग्निक जैसी दिग्गज गायिका का जुड़ाव और पद्मा खन्ना जैसी मंझी हुई अभिनेत्री का अभिनय इस प्रोजेक्ट को खास बनाता है। भैया दूज जैसे त्योहार पर आधारित यह गीत पीढ़ियों से लोगों को जोड़ता आ रहा है। आज के दौर में जब संगीत का स्वरूप काफी बदल चुका है, ऐसे क्लासिक गाने हमें अपनी जड़ों और संस्कृति की याद दिलाते हैं। इस गाने की मिठास और इसका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 42 साल पहले था।
स्रोत: Google News Bhojpuri Song





