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छठ में सूर्य उपासना का इतिहास: माता सीता, कर्ण और द्रौपदी से जुड़ी पौराणिक कथाएं और लोक मान्यताएं

छठ अकेला ऐसा बड़ा पर्व है, जिसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और लोक मान्यताएं जुड़ी हैं। जानिए माता सीता, कर्ण और द्रौपदी से जुड़ी कथाएं।

छठ में सूर्य उपासना से जुड़ी पौराणिक कथाओं का ग्राफिक
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सारांश

  • छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है। भारत में सूर्य पूजा की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है।
  • महाभारत के अनुसार कर्ण सूर्य देव के पुत्र थे। वे रोज घंटों तक कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे।
  • आमतौर पर उगते सूर्य को प्रणाम किया जाता है, पर छठ में पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
  • छठ में चढ़ने वाली चीजें, जैसे गन्ना, केला, नारियल, हल्दी, मूली, सिंघाड़ा और शकरकंद, सब खेत और मौसम से जुड़ी हैं।

छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है। भारत में सूर्य पूजा की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। ऋग्वेद में सूर्य की स्तुति के कई मंत्र मिलते हैं। छठ इस परंपरा का जीवित लोक रूप माना जाता है, जो बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र से निकलकर अब देश-विदेश तक पहुंच गया है। इस पर्व के पीछे कई कथाएं कही जाती हैं। जानिए छठ में सूर्य उपासना से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाएं।

माता सीता की कथा

एक लोक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने पर भगवान राम और माता सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की उपासना की थी। कहा जाता है कि माता सीता ने मुंगेर में गंगा तट पर छठ व्रत किया था। मुंगेर में आज भी एक स्थान को सीता चरण के नाम से जाना जाता है, जिसे इस कथा से जोड़ा जाता है।

मुख्य बातें: छठ में सूर्य उपासना से जुड़ी पौराणिक कथाओं का ग्राफिक
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सूर्यपुत्र कर्ण की कथा

महाभारत के अनुसार कर्ण सूर्य देव के पुत्र थे। वे रोज घंटों तक कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। अंग देश, जिसे आज के भागलपुर और मुंगेर क्षेत्र से जोड़ा जाता है, के राजा के रूप में उनकी यह उपासना प्रसिद्ध थी। छठ में पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने की परंपरा को कई लोग कर्ण की इसी साधना से जोड़ते हैं।

द्रौपदी और पांडवों की कथा

एक दूसरी कथा के अनुसार जब पांडव जुए में अपना राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पांडवों को उनका खोया राज्य वापस मिला। इसी वजह से छठ को परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता है।

यह भी पढ़ें: छठी मैया कौन हैं: छठ पर्व की देवी, सूर्य से संबंध, प्रचलित कथाएं और संतान की रक्षा की मान्यता | संध्या अर्घ्य की विधि: छठ के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य, घाट जाने की तैयारी, सूप सजाना और नियम

राजा प्रियव्रत की कथा

पुराणों में राजा प्रियव्रत की कथा भी आती है। उनकी कोई संतान नहीं थी। कथा के अनुसार देवी षष्ठी की कृपा से उन्हें संतान सुख मिला। इसके बाद से षष्ठी देवी की पूजा का चलन बढ़ा। लोक में यही देवी छठी मैया के रूप में पूजी जाती हैं।

डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों

आमतौर पर उगते सूर्य को प्रणाम किया जाता है, पर छठ में पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसका भाव यह माना जाता है कि जीवन में उगना और ढलना दोनों जरूरी हैं, और जो ढलता है वही फिर उगता है। लोक मान्यता में संध्या अर्घ्य सूर्य की पत्नी प्रत्यूषा और उषा अर्घ्य उषा को समर्पित बताया जाता है।

लोक गीतों में कथाएं

छठ के लोक गीत इन कथाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे ले जाते हैं। कांच ही बांस के बहंगिया जैसे गीतों में व्रती की श्रद्धा, कठिन तप और छठी मैया से की गई प्रार्थना सुनाई देती है। गीतों में सूर्य को दीनानाथ कहकर पुकारा जाता है।

प्रकृति से जुड़ाव

छठ में चढ़ने वाली चीजें, जैसे गन्ना, केला, नारियल, हल्दी, मूली, सिंघाड़ा और शकरकंद, सब खेत और मौसम से जुड़ी हैं। नदी, तालाब और सूर्य की पूजा के जरिए यह पर्व पानी, धूप और फसल के प्रति आभार भी जताता है।

क्या कथाओं का कोई एक स्रोत है

नहीं, ये कथाएं पुराणों, महाभारत और लोक परंपराओं से आती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इनके रूप थोड़े अलग मिलते हैं।

छठ किन देवताओं की पूजा है

छठ में सूर्य देव और छठी मैया, यानी षष्ठी देवी, दोनों की पूजा होती है।

स्रोत: बिहार पर्यटन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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