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शंख बजाने का महत्व: पूजा में शंख क्यों बजाते हैं, दक्षिणावर्ती और वामावर्ती शंख का फर्क, रखने और साफ करने के नियम

मंदिर की आरती हो या घर की पूजा, शंख की ध्वनि को शुभ माना जाता है। जानिए शंख से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं।

पूजा की थाली के पास रखे शंख का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • मंदिर में सुबह और शाम की आरती हो, घर में पूजा हो या कोई शुभ अवसर, शंख की गूंज भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है।
  • भगवद्गीता के पहले अध्याय में कुरुक्षेत्र के युद्ध की शुरुआत में योद्धाओं के शंख बजाने का वर्णन है।
  • शंख के भीतर नमी और धूल जमने से बदबू आ सकती है। इसे हफ्ते में एक बार साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखा लें।
  • बाजार में असली दक्षिणावर्ती शंख के नाम पर नकली या जोड़े गए शंख भी बेचे जाते हैं।

मंदिर में सुबह और शाम की आरती हो, घर में पूजा हो या कोई शुभ अवसर, शंख की गूंज भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है। कई घरों में पूजा की शुरुआत शंख बजाकर की जाती है। मान्यता है कि शंख की ध्वनि से वातावरण पवित्र होता है। धार्मिक ग्रंथों में भी शंख का कई जगह जिक्र मिलता है। इस लेख में जानिए शंख से जुड़ी मान्यताएं, इसके प्रकार और इसे रखने के नियम।

शंख की उत्पत्ति की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार शंख समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक है। इसी कारण इसे देवी लक्ष्मी का भाई भी कहा जाता है, क्योंकि लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। भगवान विष्णु के चार हाथों में से एक में शंख दिखाया जाता है। विष्णु के शंख का नाम पांचजन्य बताया गया है।

मुख्य बातें: पूजा की थाली के पास रखे शंख का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

महाभारत में शंख

भगवद्गीता के पहले अध्याय में कुरुक्षेत्र के युद्ध की शुरुआत में योद्धाओं के शंख बजाने का वर्णन है। इसमें श्रीकृष्ण के पांचजन्य, अर्जुन के देवदत्त, भीम के पौण्ड्र और युधिष्ठिर के अनंतविजय शंख का उल्लेख मिलता है। नकुल के सुघोष और सहदेव के मणिपुष्पक शंख का नाम भी आता है। उस समय शंख युद्ध के आरंभ की घोषणा का माध्यम था।

पूजा में शंख क्यों बजाते हैं

  • मान्यता है कि शंख की ध्वनि से नकारात्मकता दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है।
  • आरती और पूजा की शुरुआत और समापन पर शंख बजाना शुभ माना जाता है।
  • पुराने समय में शंख की आवाज से गांव के लोगों को पूजा या किसी आयोजन की सूचना मिलती थी।
  • विवाह, गृह प्रवेश और त्योहारों पर भी कई क्षेत्रों में शंख बजाया जाता है। बंगाल और ओडिशा में यह परंपरा खास तौर पर देखी जाती है।

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दक्षिणावर्ती और वामावर्ती शंख

शंख को मुंह की ओर से देखने पर उसका खुला भाग जिस दिशा में होता है, उसी से इसकी पहचान होती है। ज्यादातर शंख वामावर्ती होते हैं, यानी उनका खुला भाग बाईं ओर होता है। इन्हें ही आमतौर पर बजाया जाता है। दक्षिणावर्ती शंख का खुला भाग दाईं ओर होता है। यह काफी कम मिलता है। मान्यता है कि दक्षिणावर्ती शंख को बजाया नहीं जाता, बल्कि पूजा स्थान पर रखकर इसकी पूजा की जाती है और इसमें जल भरकर भगवान का अभिषेक किया जाता है।

शंख असल में क्या है

विज्ञान की नजर से शंख एक समुद्री जीव का कठोर कवच होता है। यह जीव घोंघे की तरह मोलस्क वर्ग का होता है। जीव के न रहने के बाद यह कवच बचता है, जिसे साफ करके इस्तेमाल किया जाता है। शंख के भीतर घुमावदार खोखली बनावट होती है, इसलिए इसमें फूंक मारने पर गहरी और देर तक गूंजने वाली ध्वनि निकलती है।

शंख रखने के नियम

  • मान्यता के अनुसार पूजा के शंख को पूजा स्थान पर साफ कपड़े या आसन पर रखना चाहिए।
  • बजाने वाले शंख और जल भरने वाले शंख को अलग अलग रखने की परंपरा है।
  • शंख का खुला भाग ऊपर की ओर रखकर रखा जाता है।
  • कई परंपराओं में शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता। इसके पीछे शंखचूड़ नाम के असुर से जुड़ी कथा बताई जाती है।

शंख को साफ कैसे रखें

शंख के भीतर नमी और धूल जमने से बदबू आ सकती है। इसे हफ्ते में एक बार साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखा लें। भीतर के हिस्से को धोने के बाद उल्टा रखकर पानी निकाल दें। बहुत तेज रसायन या साबुन के इस्तेमाल से शंख की चमक खराब हो सकती है। बजाने वाले शंख को इस्तेमाल के बाद पोंछकर रखना अच्छा रहता है।

शंख बजाने का सही तरीका

शंख बजाने के लिए होंठों को हल्का बंद करके उसके नुकीले सिरे पर रखें और पेट से गहरी सांस लेकर एक समान दबाव से फूंक मारें। शुरू में आवाज टूटती है, लेकिन अभ्यास से लंबी और साफ ध्वनि निकलने लगती है। सांस से जुड़ी कोई गंभीर परेशानी हो तो जोर लगाकर देर तक शंख न बजाएं और डॉक्टर की सलाह लें।

खरीदते समय सावधानी

बाजार में असली दक्षिणावर्ती शंख के नाम पर नकली या जोड़े गए शंख भी बेचे जाते हैं। बहुत ज्यादा कीमत मांगने वाले विक्रेताओं से सावधान रहें। भरोसेमंद दुकान से ही शंख लें और चमत्कारी फायदे के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

शंख किसकी उत्पत्ति माना जाता है

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन से निकला रत्न।

भगवान विष्णु के शंख का नाम क्या है

पांचजन्य।

कौन सा शंख बजाया जाता है

आमतौर पर वामावर्ती शंख।

अर्जुन के शंख का नाम क्या था

देवदत्त।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 15 से 18, Encyclopaedia Britannica: Conch

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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