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उत्तराखंड होमस्टे योजना: दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास योजना में पंजीकरण, पात्रता, सब्सिडी और आवेदन की प्रक्रिया

उत्तराखंड सरकार की दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास होमस्टे विकास योजना पहाड़ के गांवों में पर्यटन से रोजगार बढ़ाने के लिए है। जानिए होमस्टे का पंजीकरण कैसे होता है और सरकार क्या मदद देती है।

उत्तराखंड होमस्टे योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • उत्तराखंड में हर साल लाखों पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। पहाड़ के गांवों से पलायन रोकने और स्थानीय लोगों को घर बैठे रोजगार देने के लिए राज्य सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास होमस्टे…
  • सब्सिडी की दर और सीमा मैदानी और पहाड़ी इलाकों के लिए अलग तय है।
  • 5. मानक पूरे होने पर होमस्टे का पंजीकरण प्रमाण पत्र मिलता है
  • पंजीकृत होमस्टे पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दिखते हैं। मालिक चाहें तो दूसरे बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी अपना होमस्टे डाल सकते हैं।

उत्तराखंड में हर साल लाखों पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। पहाड़ के गांवों से पलायन रोकने और स्थानीय लोगों को घर बैठे रोजगार देने के लिए राज्य सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास होमस्टे विकास योजना शुरू की। इसमें गांव और कस्बों के लोग अपने घर के कुछ कमरों को होमस्टे के रूप में पंजीकृत करके पर्यटकों को ठहरा सकते हैं। सरकार पंजीकरण, प्रचार और कुछ मामलों में निर्माण या सुधार के लिए आर्थिक मदद देती है। जानिए उत्तराखंड होमस्टे योजना की पूरी जानकारी।

होमस्टे क्या है

होमस्टे में पर्यटक होटल की जगह किसी स्थानीय परिवार के घर में ठहरते हैं। उन्हें घर का खाना, स्थानीय संस्कृति और गांव का माहौल मिलता है। मालिक परिवार उसी घर में रहता है और मेहमानों की देखभाल करता है। यही होमस्टे की सबसे बड़ी शर्त है।

मुख्य बातें: उत्तराखंड होमस्टे योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

योजना के लाभ

  • घर बैठे आय का जरिया
  • पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर पंजीकृत होमस्टे का प्रचार
  • नए निर्माण, कमरों के सुधार या साज-सज्जा के लिए बैंक कर्ज पर सब्सिडी का प्रावधान
  • कुछ मामलों में ब्याज पर सहायता
  • प्रशिक्षण और मार्गदर्शन

सब्सिडी की दर और सीमा मैदानी और पहाड़ी इलाकों के लिए अलग तय है। ताजा जानकारी पर्यटन विभाग की अधिसूचना में देखें।

पात्रता

  • आवेदक उत्तराखंड का स्थायी निवासी हो
  • घर आवेदक के नाम हो या उसके कानूनी कब्जे में हो
  • मालिक परिवार उसी भवन में रहता हो
  • होमस्टे में तय संख्या तक ही कमरे पर्यटकों के लिए हों
  • घर तक पहुंच का रास्ता और साफ-सफाई की बुनियादी सुविधा हो

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 में आवेदन कैसे करें: लोन, सब्सिडी, पात्रता और msy.uk.gov.in पर प्रक्रिया | उत्तराखंड स्थायी निवास प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं: अपणि सरकार पर आवेदन, दस्तावेज, सत्यापन और डाउनलोड

जरूरी दस्तावेज

  • स्थायी निवास प्रमाण पत्र
  • आधार कार्ड
  • संपत्ति के स्वामित्व या कब्जे के कागज
  • घर और कमरों की फोटो
  • बैंक खाते का विवरण
  • सब्सिडी के लिए बैंक से कर्ज स्वीकृति के कागज

आवेदन कैसे करें

1. उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की वेबसाइट पर होमस्टे पंजीकरण का विकल्प खोलें

2. आवेदक, घर और कमरों की जानकारी भरें

3. दस्तावेज और फोटो अपलोड करें

4. जिला पर्यटन विकास अधिकारी के कार्यालय से निरीक्षण होता है

5. मानक पूरे होने पर होमस्टे का पंजीकरण प्रमाण पत्र मिलता है

सब्सिडी के लिए अलग आवेदन जिला पर्यटन कार्यालय के जरिए होता है, जिसमें बैंक कर्ज जरूरी है।

होमस्टे चलाने के नियम

  • मेहमानों का रजिस्टर रखें और पहचान पत्र दर्ज करें
  • विदेशी पर्यटकों के ठहरने की सूचना तय नियम से दें
  • साफ-सफाई और सुरक्षा का ध्यान रखें
  • किराया पारदर्शी रखें

ऑनलाइन बुकिंग

पंजीकृत होमस्टे पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दिखते हैं। मालिक चाहें तो दूसरे बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी अपना होमस्टे डाल सकते हैं।

क्या शहर में होमस्टे बन सकता है

योजना का जोर ग्रामीण और पर्यटन क्षेत्रों पर है, पर शहरी इलाकों में भी पंजीकरण के नियम हैं। जिला पर्यटन कार्यालय से जानकारी लें।

पंजीकरण का नवीनीकरण

होमस्टे पंजीकरण तय अवधि के लिए होता है। समय पर नवीनीकरण कराएं, वरना विभाग की वेबसाइट से होमस्टे का नाम हट सकता है और सब्सिडी से जुड़े लाभ पर भी असर पड़ सकता है।

स्रोत: उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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