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Navratri 2026: कलश के पास जौ क्यों बोए जाते हैं, अंकुर का मतलब और नौ दिन बाद क्या करें?

Navratri 2026: कलश के पास जौ क्यों बोए जाते हैं, अंकुर का मतलब और नौ दिन बाद क्या करें?
Navratri 2026

सारांश

  • नवरात्रि में कलश के पास जौ बोने की पुरानी धार्मिक परंपरा है।
  • जौ को उगती समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
  • नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुर बढ़ने को धार्मिक रूप से शुभ संकेत माना जाता है।
  • अंकुरों के रंग और वृद्धि को लेकर अलग-अलग लोक मान्यताएं प्रचलित हैं।
  • नौ दिन बाद जौ को कलश के साथ विधि-विधान से हटाया जाता है।
  • पूजा की परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार जौ को विसर्जित या पवित्र स्थान पर रखने की परंपरा हो सकती है।

Navratri 2026: पटना। शारदीय नवरात्र शुरू होते ही घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ एक और रस्म निभाई जाती है—मिट्टी के बर्तन में जौ बोना। नौ दिन बाद जब हरे अंकुर निकलते हैं, तो पूजा स्थल पर खुशी दिखती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता जौ को सृष्टि की पहली फसल मानती है। अंकुरों को आने वाले समय का संकेत भी कहा जाता है, हालांकि उनकी बढ़त मौसम और पानी पर भी निर्भर करती है।

नवरात्र में मां दुर्गा की शक्ति के साथ अन्नपूर्णा स्वरूप की पूजा भी होती है। जौ बोना अन्न के प्रति आभार और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। हवन और पूजा में जौ का इस्तेमाल इसी वजह से होता है। कलश के पास रखा बर्तन पूरे नौ दिनों तक पूजा का हिस्सा बना रहता है।

Navratri 2026: जौ को सृष्टि की पहली फसल क्यों कहा जाता है?

धार्मिक कथा के अनुसार सृष्टि की शुरुआत में सबसे पहले जौ ही उगा। इसी कारण इसे पूर्ण फसल कहा जाता है। यज्ञ, तर्पण और व्रत में जौ इसलिए शामिल होते हैं। नवरात्र में देवी की स्थापना के साथ जौ बोना सृष्टि के आरंभ और नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक है।

यह केवल सजावट नहीं है। संदेश यह है कि घर में अन्न की कमी न पड़े। अन्नपूर्णा रूप की पूजा इसी भाव से जुड़ी है। जो परिवार कलश रखते हैं, वे जौ का बर्तन उसी जगह रखते हैं, ताकि दोनों रस्में एक साथ पूरी हों।

अंकुर घर के भविष्य का संकेत कैसे माने जाते हैं?

पुरानी मान्यता कहती है कि जौ तेजी से उगें और हरे-भरे रहें, तो घर में सुख-समृद्धि आएगी और माता की कृपा बनी रहेगी। कम उगना या पीला पड़ना आने वाली परेशानी का संकेत बताया जाता है। यह आस्था से जुड़ी बात है। घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि कई बार मौसम, मिट्टी या पानी की कमी-ज्यादती से भी अंकुर कमजोर रह जाते हैं।

वैज्ञानिक नजर से देखें तो जौ ठंडे मौसम की फसल है। हल्की नमी और साफ मिट्टी में दाने जल्दी फूटते हैं। पानी ज्यादा हो तो बीज सड़ सकते हैं। पीला रंग अक्सर जलभराव या धूप की कमी से आता है, किसी शकुन से नहीं। आस्था रखें, पर पौधों की हालत को केवल शगुन न मानें।

Navratri 2026: जौ बोने का सही तरीका क्या है?

मिट्टी का साफ बर्तन लें। उसमें साफ मिट्टी भरें। जौ के दाने बिखेरकर ऊपर हल्की मिट्टी डाल दें। कलश स्थापना के दिन इसे पूजा स्थान पर रख दें। रोज हल्का पानी छिड़कें। इतना ही कि मिट्टी नम रहे, कीचड़ न बने। बर्तन को ऐसी जगह रखें जहां हल्की रोशनी पहुंचे, वरना अंकुर पतले और पीले रह जाते हैं।

दाने साफ और टूटे हुए न हों। पुराना या नमी खाया अनाज ठीक से नहीं फूटता। बर्तन हर साल धोकर सुखा लें, ताकि फफूंद न लगे। नौ दिनों तक रोज एक ही समय पानी देना काफी है।

नौ दिन बाद अंकुरों का क्या किया जाता है?

नवरात्र के अंत में इन अंकुरों को प्रसाद की तरह बांटा जाता है। कई परिवार इन्हें तिजोरी या पूजा घर में रखते हैं। कुछ लोग बहते जल में प्रवाहित कर देते हैं। जौ को कूड़े में फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि इन्हें पवित्र माना जाता है।

विसर्जन के दिन कलश और जौ एक साथ विदा किए जा सकते हैं। जो लोग अंकुर घर में रखते हैं, वे उन्हें सूखने दें और पूजा की थाली में रखें। बहते पानी में छोड़ते समय प्लास्टिक या गमले की मिट्टी नदी में न बहाएं। सिर्फ हरे अंकुर ही जल में छोड़ें।

Navratri 2026: यह परंपरा केवल शकुन है या खेती से भी जुड़ी है?

दोनों बातें साथ चलती हैं। धार्मिक पक्ष सृष्टि, अन्नपूर्णा और समृद्धि का प्रतीक देखता है। खेती का पक्ष यह है कि जौ रबी की पुरानी फसल है और शरद ऋतु में आसानी से अंकुरित हो जाती है। नवरात्र इसी मौसम में पड़ता है, इसलिए नौ दिनों में हरी पत्तियां निकल आती हैं।

घर में छोटा सा बर्तन पूरे खेत का प्रतीक बन जाता है। बच्चे अंकुर गिनते हैं, बड़े प्रसाद बांटते हैं। मान्यता चाहे जो हो, तरीका सरल है—साफ मिट्टी, हल्का पानी और नौ दिन का इंतजार। पीले अंकुर देखकर घबराना जरूरी नहीं। आस्था बनी रहे, देखभाल भी सही हो, तभी यह रस्म पूरी मानी जाती है।

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लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

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