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BREAKING: दिवाली से पहले दिल्ली की हवा बेहद खराब, AQI 369 दर्ज

दिवाली से पहले दिल्ली में औसत AQI 369 दर्ज किया गया, जबकि कई इलाकों में यह 400 के पार गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है।

BREAKING: दिवाली से पहले दिल्ली की हवा बेहद खराब, AQI 369 दर्ज
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / MODIS Land Rapid Response Team, NASA GSFC (Public domain))

सारांश

  • दिवाली के त्योहार से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर तेजी से गिरकर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है।
  • राजधानी के अलग अलग क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर अलग रहा, लेकिन सबसे गंभीर आंकड़े भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी दिल्ली के समीप स्थित केंद्र से सामने आए।
  • पड़ोसी राज्यों में खेतों में जलाई जाने वाली पराली दिल्ली की आबोहवा को लगातार प्रभावित कर रही है।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी ने देश में वायु गुणवत्ता को छह अलग अलग पैमानों में विभाजित किया है।

दिवाली के त्योहार से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर तेजी से गिरकर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। शनिवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 369 दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार को यह स्तर 382 पर था। राजधानी के कई इलाकों में वायु प्रदूषण का आंकड़ा 400 के पार पहुंच चुका है और शहर पर धुंध तथा धुएं की मोटी परत छा गई है। प्रतिकूल मौसम, धीमी हवा, वाहनों के उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की वजह से दिवाली के दिन हवा के गंभीर श्रेणी में पहुंचने की पूरी आशंका है।

दिल्ली वायु प्रदूषण मुख्य बिंदु
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim (GFDL 1.2))

राजधानी में प्रदूषण की गंभीर स्थिति और निगरानी आंकड़े

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली की पूर्व संध्या पर वातावरण में प्रदूषण का असर साफ तौर पर देखा गया। आसमान में छाए घने धूम कोहरे के कारण शहर की दृश्यता काफी कम दर्ज की गई। शहर भर में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए कुल 59 केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें से 16 निगरानी केंद्रों पर शनिवार को हवा की स्थिति बेहद चिंताजनक रही और वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर यानी गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। वहीं, 29 केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

राजधानी के अलग अलग क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर अलग रहा, लेकिन सबसे गंभीर आंकड़े भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी दिल्ली के समीप स्थित केंद्र से सामने आए। आईआईटी दिल्ली के पास शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 452 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी के उच्च स्तर को दर्शाता है। हालांकि शुक्रवार के औसत स्तर 382 की तुलना में शनिवार के औसत सूचकांक 369 में मामूली कमी दर्ज हुई, लेकिन राजधानी का समग्र वातावरण अब भी गंभीर श्रेणी की दहलीज के बेहद करीब बना हुआ है।

प्रदूषण के प्रमुख कारण और परिवहन का योगदान

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण के इतने ऊंचे स्तर पर पहुंचने के पीछे कई मौसमी और मानवीय कारण जिम्मेदार हैं। वर्तमान समय में हवा की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है, जिससे वातावरण में मौजूद धूल और धुएं के कण बिखर नहीं पा रहे हैं। इस वजह से प्रदूषक तत्व निचले वायुमंडल में ही एकत्र हो रहे हैं। शनिवार के दिन दिल्ली की हवा में पीएम10 को सबसे प्रमुख और घातक प्रदूषक कण के रूप में दर्ज किया गया।

दिल्ली के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम यानी डीएसएस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को राजधानी के कुल प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 21.4 प्रतिशत आंकी गई। वाहनों से निकलने वाला निरंतर धुआं स्थानीय प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर, शनिवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 1.7 प्रतिशत दर्ज की गई। अनुमान जताया गया है कि रविवार यानी दिवाली के दिन पराली के धुएं की हिस्सेदारी बढ़कर 5.4 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

छह राज्यों में पराली जलाने के मामले और आंकड़े

पड़ोसी राज्यों में खेतों में जलाई जाने वाली पराली दिल्ली की आबोहवा को लगातार प्रभावित कर रही है। उपग्रह से प्राप्त चित्रों और निगरानी आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को छह प्रमुख राज्यों में पराली जलाने की कुल 589 नई घटनाएं सामने आईं। इनमें पंजाब राज्य सबसे आगे रहा, जहां एक ही दिन में पराली जलाने के 357 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 139 घटनाएं, राजस्थान में 58 घटनाएं, उत्तर प्रदेश में 23 घटनाएं, हरियाणा में 9 घटनाएं और उत्तराखंड में 3 घटनाएं रिकॉर्ड की गईं।

आंकड़ों के व्यापक विश्लेषण से पता चलता है कि चालू सीजन में 15 सितंबर से लेकर 6 नवंबर के बीच इन सभी छह राज्यों को मिलाकर पराली जलाने की कुल 6,226 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन घटनाओं से निकलने वाला धुआं जब प्रतिकूल हवाओं के साथ दिल्ली की ओर बढ़ता है, तो यह स्थानीय स्तर पर वाहनों और पटाखों के धुएं के साथ मिलकर वायु गुणवत्ता को अत्यंत खतरनाक स्तर पर पहुंचा देता है।

मौसम पूर्वानुमान और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक

दिल्ली की वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली यानी ईडब्ल्यूएस के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्लीवासियों को प्रदूषण से राहत मिलने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। प्रणाली के अनुसार 8 नवंबर और 9 नवंबर को राजधानी की वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज हो सकती है। इसके बाद भी अगले छह दिनों की अवधि के दौरान वायु गुणवत्ता में किसी बड़े सुधार की संभावना नहीं है। इस पूरी अवधि में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब और गंभीर श्रेणियों के बीच ही बनी रहने का अनुमान है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी ने देश में वायु गुणवत्ता को छह अलग अलग पैमानों में विभाजित किया है। सीपीसीबी के मानकों के अनुसार, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा माना जाता है, जबकि 51 से 100 के बीच यह संतोषजनक कहलाता है। इसके बाद 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 के बीच एक्यूआई को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। दिल्ली का मौजूदा स्तर 369 बहुत खराब श्रेणी के ऊपरी दायरे में है और कई स्थानों पर यह 400 के पार गंभीर स्थिति में है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और आगे की स्थिति

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण के इस गंभीर विषय पर शुक्रवार को देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई हुई। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने इस विषय पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे। अदालत की यह टिप्पणी राजधानी के मौजूदा संकट और धुंध भरी परिस्थितियों की गंभीरता को रेखांकित करती है।

दिवाली से ठीक पहले वायु प्रदूषण स्तर के गंभीर श्रेणी के बिल्कुल करीब पहुंच जाने के कारण क्षेत्र में ग्रैप 3 की पाबंदियां भी लागू हैं। आने वाले त्योहार के दौरान आतिशबाजी, कम तापमान और धीमी हवाओं के कारण स्थिति और विकट होने का खतरा बना हुआ है। निगरानी एजेंसियों की लगातार नजर वायुमंडल की स्थितियों और आगामी पूर्वानुमानों पर टिकी हुई है।

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स्रोत: India TV

लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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