लोकसभा में जब सैकड़ों सदस्य अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं, तो सदन को व्यवस्थित ढंग से चलाने की जिम्मेदारी लोकसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर की होती है। टीवी पर संसद की कार्यवाही में ऊंची कुर्सी पर बैठे जो व्यक्ति “ऑर्डर, ऑर्डर” कहते दिखते हैं, वही स्पीकर हैं। जानिए लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका और अधिकार क्या हैं।
स्पीकर का चुनाव
संविधान के अनुच्छेद 93 के अनुसार लोकसभा अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष चुनती है। नई लोकसभा के गठन के बाद पहले कुछ दिनों में स्पीकर का चुनाव होता है। तब तक राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रोटेम स्पीकर नए सदस्यों को शपथ दिलाते हैं। स्पीकर आम तौर पर लोकसभा के पूरे कार्यकाल तक पद पर रहते हैं। लोकसभा भंग होने पर भी स्पीकर नई लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक पद पर बने रहते हैं, यह अनुच्छेद 94 में है। स्पीकर को लोकसभा के सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव के जरिए हटाया जा सकता है, जिसके लिए पहले से नोटिस देना जरूरी है।

सदन चलाने के अधिकार
- सदन की कार्यवाही का संचालन करना और व्यवस्था बनाए रखना
- सदस्यों को बोलने की अनुमति देना और समय तय करना
- सदन के नियमों और प्रक्रिया की व्याख्या करना, उनका फैसला अंतिम माना जाता है
- अव्यवस्था करने वाले सदस्य को चेतावनी देना या नियमों के अनुसार सदन से बाहर भेजना
- गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में सदन की बैठक स्थगित करना
- कोरम यानी जरूरी संख्या न होने पर बैठक रोकना
निर्णायक मत
अनुच्छेद 100 के अनुसार स्पीकर सामान्य स्थिति में किसी प्रस्ताव पर पहले वोट नहीं देते। लेकिन अगर किसी प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष में बराबर वोट पड़ें, तो स्पीकर अपना निर्णायक मत यानी कास्टिंग वोट देते हैं। यह व्यवस्था स्पीकर की निष्पक्ष भूमिका को बनाए रखने के लिए है।
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धन विधेयक और संयुक्त बैठक
अनुच्छेद 110 के अनुसार कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस पर अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष का होता है और वे इसे प्रमाणित करते हैं। धन विधेयक पर राज्यसभा के अधिकार सीमित होते हैं, इसलिए यह अधिकार बहुत अहम है। किसी सामान्य विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध होने पर बुलाई गई संयुक्त बैठक की अध्यक्षता भी लोकसभा अध्यक्ष करते हैं, यह अनुच्छेद 118 में है।
दलबदल मामलों में भूमिका
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत किसी सदस्य की दलबदल के आधार पर अयोग्यता के मामलों में फैसला लोकसभा अध्यक्ष करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसे फैसले न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकते हैं।
समितियां और प्रशासन
स्पीकर संसदीय समितियों के गठन में अहम भूमिका निभाते हैं और कुछ समितियों के अध्यक्ष भी होते हैं। लोकसभा सचिवालय भी उनके नियंत्रण में काम करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्पीकर की अनुपस्थिति में सदन कौन चलाता है?
स्पीकर की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष, और दोनों न हों तो सभापति तालिका का कोई सदस्य सदन चलाता है।
स्रोत: संसद, लोकसभा, भारत का संविधान, विधायी विभाग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





