दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में करोड़ों मतदाताओं के लिए निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग यानी चुनाव आयोग की है। चुनाव की तारीखों की घोषणा से लेकर नतीजों तक, पूरी प्रक्रिया की निगरानी आयोग करता है। जानिए भारत का चुनाव आयोग कैसे काम करता है।
संवैधानिक स्थिति
चुनाव आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण चुनाव आयोग के पास है। आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी, इसीलिए इस दिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। चुनाव से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324 से 329 में हैं।

आयोग की संरचना
शुरुआत में आयोग में केवल एक मुख्य चुनाव आयुक्त होते थे। बाद में इसे बहु-सदस्यीय बनाया गया और अब इसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। नियुक्ति की प्रक्रिया संसद के कानून से तय होती है, जिसमें एक चयन समिति की भूमिका है। संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है, जिससे पद की स्वतंत्रता बनी रहती है।
चुनाव आयोग के प्रमुख काम
- मतदाता सूची तैयार करना और समय-समय पर उसे अपडेट करना
- चुनाव कार्यक्रम घोषित करना और पूरी चुनाव प्रक्रिया कराना
- राजनीतिक दलों को मान्यता देना और चुनाव चिह्न आवंटित करना
- उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की निगरानी
- आदर्श आचार संहिता लागू कराना
- मतदाता जागरूकता अभियान चलाना
चुनाव के दौरान राज्यों के अधिकारी और कर्मचारी आयोग के निर्देशों के तहत काम करते हैं।
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आदर्श आचार संहिता
चुनाव की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। यह राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए दिशानिर्देशों का समूह है, जो राजनीतिक दलों की सहमति से विकसित हुआ है। इसके तहत सत्ताधारी दल सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल नहीं कर सकता, नई योजनाओं की घोषणा पर रोक रहती है और धर्म या जाति के आधार पर वोट मांगने की मनाही होती है। मतदान से पहले तय समय तक प्रचार बंद करना भी इसका हिस्सा है।
राज्य चुनाव आयोग से फर्क
पंचायत और नगर निकायों के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग नहीं, बल्कि हर राज्य का राज्य चुनाव आयोग कराता है। इसका प्रावधान 73वें और 74वें संविधान संशोधन से जुड़े अनुच्छेद 243K और 243ZA में है।
मतदाता के लिए जानकारी
मतदाता सूची में नाम जांचने, नया नाम जुड़वाने या पता बदलवाने के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी शिकायत के लिए आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर भी संपर्क किया जा सकता है। मतदान के दिन अपना पहचान पत्र साथ ले जाएं और बिना डर या लालच के वोट डालें, क्योंकि गुप्त मतदान हर मतदाता का अधिकार है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चुनाव आयोग किन चुनावों को नहीं कराता?
पंचायत और नगर निकाय चुनाव राज्य चुनाव आयोग कराते हैं।
स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, भारत का संविधान, विधायी विभाग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





