राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक है। पहले आम नागरिकों को सिर्फ कुछ खास दिनों पर ही तिरंगा फहराने की अनुमति थी, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति साल के किसी भी दिन अपने घर, दफ्तर या संस्थान पर सम्मान के साथ तिरंगा फहरा सकता है। इसके लिए भारतीय ध्वज संहिता 2002 में कुछ नियम तय किए गए हैं। इन नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। इस लेख में जानिए तिरंगे से जुड़े जरूरी नियम, हाल के बदलाव और गलती से बचने के तरीके।
तिरंगे का इतिहास
भारत के राष्ट्रीय ध्वज का मौजूदा रूप संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को अपनाया। इसका डिजाइन आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकय्या के बनाए झंडे पर आधारित है। ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरे रंग की पट्टियां बराबर चौड़ाई की होती हैं। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का अशोक चक्र होता है, जिसमें 24 तीलियां होती हैं।

आकार और अनुपात
तिरंगा आयताकार होना चाहिए और उसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए। झंडा किसी भी आकार का हो सकता है, लेकिन यह अनुपात हर हाल में रहना चाहिए। अशोक चक्र दोनों ओर से साफ दिखना चाहिए।
कपड़े से जुड़ा बदलाव
पहले ध्वज संहिता के अनुसार तिरंगा सिर्फ हाथ से कते और बुने खादी, सूती, ऊनी या रेशमी कपड़े से बन सकता था। दिसंबर 2021 में संहिता में बदलाव कर मशीन से बने और पॉलिएस्टर के झंडों को भी अनुमति दी गई। इससे झंडे सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने लगे।
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दिन रात फहराने की छूट
पहले नियम था कि तिरंगा सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जा सकता है। जुलाई 2022 में संहिता में बदलाव किया गया। अब अगर झंडा खुले में या किसी नागरिक के घर पर फहराया गया है, तो वह दिन और रात दोनों समय फहराया रह सकता है। यह बदलाव हर घर तिरंगा अभियान से पहले किया गया था।
फहराते समय ध्यान रखें
- केसरिया पट्टी हमेशा ऊपर रहे। उल्टा तिरंगा फहराना अपमान माना जाता है।
- फटा, मैला या बदरंग झंडा न फहराएं।
- झंडा जमीन या पानी को न छुए।
- तिरंगे से ऊंचा या उसके बराबर कोई दूसरा झंडा उसी डंडे पर न लगाएं।
- झंडे पर कुछ भी लिखा या छपा न हो।
- झंडे को सजावट, तोरण या पर्दे की तरह इस्तेमाल न करें।
- झंडा फहराते समय उसे तेजी से ऊपर ले जाएं और उतारते समय धीरे धीरे उतारें।
क्या न करें
तिरंगे को किसी पोशाक, वर्दी या पहनावे के हिस्से के रूप में कमर से नीचे नहीं पहनना चाहिए। इसे रूमाल, तकिए के गिलाफ, नैपकिन या अंदर के कपड़ों पर नहीं छापा जा सकता। तिरंगे को किसी वाहन, ट्रेन या नाव की छत, बगल या पीछे की ओर ढकने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसका इस्तेमाल किसी चीज को लपेटने या सामान रखने के लिए भी नहीं होना चाहिए। राजकीय या सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार को छोड़कर किसी शव पर तिरंगा नहीं लपेटा जा सकता।
आधा झुकाना
तिरंगे को आधा झुकाने का फैसला सिर्फ सरकार करती है, जैसे किसी बड़े नेता के निधन पर राष्ट्रीय शोक के समय। आम नागरिक अपनी मर्जी से झंडा आधा नहीं झुका सकते। आधा झुकाने के लिए पहले झंडे को पूरी ऊंचाई तक ले जाया जाता है और फिर आधी ऊंचाई पर लाया जाता है। उतारते समय भी पहले उसे पूरी ऊंचाई तक ले जाकर फिर उतारा जाता है।
पुराने झंडे का निपटान
फटे या खराब हो चुके तिरंगे को सम्मान के साथ नष्ट करना चाहिए। ध्वज संहिता के अनुसार ऐसा झंडा एकांत में जलाकर या किसी और सम्मानजनक तरीके से नष्ट किया जाए। कागज के झंडों को कार्यक्रम के बाद जमीन पर या कूड़े में न फेंकें, बल्कि इकट्ठा करके सम्मान के साथ निपटाएं। प्लास्टिक के झंडे इस्तेमाल न करना बेहतर है।
कानून और अदालत
राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को रोकने के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 है। इसके तहत तिरंगे को जलाने, फाड़ने, कुचलने या किसी और तरीके से अपमान करने पर तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने नवीन जिंदल मामले में कहा कि सम्मान के साथ तिरंगा फहराना नागरिकों के अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। इसी फैसले के बाद आम नागरिकों के लिए तिरंगा फहराना आसान हुआ।
तिरंगे का अनुपात क्या है
लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2।
क्या घर पर रात में तिरंगा फहरा सकते हैं
हां, जुलाई 2022 के बदलाव के बाद घर पर दिन रात फहरा सकते हैं।
फटे तिरंगे का क्या करें
एकांत में सम्मान के साथ जलाकर या दूसरे सम्मानजनक तरीके से नष्ट करें।
तिरंगा आधा कौन झुका सकता है
सिर्फ सरकार के आदेश पर झुकाया जाता है।
स्रोत: MHA: Flag Code of India 2002, Know India: National Flag, Legislative Department: Prevention of Insults to National Honour Act





