भारत की संसद के दो सदन हैं: लोकसभा और राज्यसभा। लोकसभा के सदस्य सीधे जनता चुनती है, जबकि राज्यसभा के सदस्य राज्यों की विधानसभाओं के विधायक चुनते हैं। राज्यसभा को राज्यों की परिषद कहा जाता है, क्योंकि यह संघीय ढांचे में राज्यों की आवाज है। लेकिन हर राज्य को राज्यसभा में बराबर सीटें नहीं मिलतीं, जैसा अमेरिका की सीनेट में होता है। यह लेख एक व्याख्या है, जिसमें बताया गया है कि राज्यसभा में सीटों का बंटवारा कैसे होता है, किस राज्य के पास कितनी सीटें हैं और यह सदन कैसे काम करता है।
संविधान में प्रावधान
राज्यसभा की बनावट संविधान के अनुच्छेद 80 में बताई गई है। इसके अनुसार राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं और बाकी अधिकतम 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं। किस राज्य से कितने सदस्य होंगे, यह संविधान की चौथी अनुसूची में लिखा है। इसमें बदलाव संसद कानून बनाकर कर सकती है, जैसे नए राज्य बनने पर होता है।

आबादी के आधार पर बंटवारा
चौथी अनुसूची में सीटें मोटे तौर पर राज्यों की आबादी के आधार पर तय की गई हैं। ज्यादा आबादी वाले राज्यों को ज्यादा सीटें और छोटे राज्यों को कम सीटें मिली हैं। हालांकि यह पूरी तरह आबादी के अनुपात में नहीं है, ताकि छोटे राज्यों को भी कम से कम एक सीट मिल सके। इसी कारण सिक्किम, मिजोरम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और गोवा जैसे राज्यों के पास एक एक सीट है।
किस राज्य के पास कितनी सीटें
अभी राज्यसभा में 245 सदस्य हैं, जिनमें 233 निर्वाचित और 12 मनोनीत हैं। कुछ बड़े राज्यों की सीटें इस तरह हैं:
- उत्तर प्रदेश: 31
- महाराष्ट्र: 19
- तमिलनाडु: 18
- बिहार और पश्चिम बंगाल: 16, हर एक
- कर्नाटक: 12
- आंध्र प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश: 11, हर एक
- ओडिशा और राजस्थान: 10, हर एक
- केरल: 9
- असम, पंजाब और तेलंगाना: 7, हर एक
- झारखंड: 6, छत्तीसगढ़ और हरियाणा: 5, हर एक
केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली की तीन, जम्मू कश्मीर की चार और पुडुचेरी की एक सीट है।
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मनोनीत सदस्य
अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति 12 ऐसे लोगों को राज्यसभा के लिए मनोनीत करते हैं, जिन्हें साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में खास ज्ञान या अनुभव हो। इसकी प्रेरणा आयरलैंड के संविधान से ली गई मानी जाती है। लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर, पीटी उषा और कई जाने माने वैज्ञानिक और लेखक इस श्रेणी में राज्यसभा पहुंच चुके हैं। मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में वोट नहीं देते, लेकिन उपराष्ट्रपति के चुनाव में वोट देते हैं।
चुनाव कैसे होता है
राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य करते हैं। इसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली अपनाई जाती है। केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों का चुनाव संसद के बनाए कानून के अनुसार होता है। दिल्ली और पुडुचेरी में वहां की विधानसभा के सदस्य वोट देते हैं।
स्थायी सदन
राज्यसभा एक स्थायी सदन है, यानी इसे कभी भंग नहीं किया जाता। इसके हर सदस्य का कार्यकाल छह साल का होता है। हर दो साल में करीब एक तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं और उनकी जगह नए चुनाव होते हैं। इसी वजह से लगभग हर साल किसी न किसी राज्य में राज्यसभा चुनाव होते रहते हैं।
सीटों से राजनीतिक गणित
राज्यसभा में किसी दल की ताकत उसके विधायकों की संख्या पर निर्भर करती है। अगर किसी राज्य में किसी पार्टी के पास ज्यादा विधायक हैं, तो वह वहां से ज्यादा राज्यसभा सांसद भेज सकती है। इसी कारण किसी बड़े राज्य के विधानसभा चुनाव का असर कुछ साल बाद राज्यसभा की संख्या पर भी दिखता है। कई बार सरकार के पास लोकसभा में बहुमत होने पर भी राज्यसभा में बहुमत नहीं होता, जिससे विधेयक पास कराने में मुश्किल आती है।
सभापति और उपसभापति
भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। उपसभापति राज्यसभा के सदस्यों में से चुने जाते हैं और सभापति की गैरमौजूदगी में सदन चलाते हैं। धन विधेयक के मामले में राज्यसभा सिर्फ 14 दिन में सुझाव दे सकती है, जिन्हें मानना लोकसभा के लिए जरूरी नहीं है।
लोकसभा से तुलना
लोकसभा में सीटें हर राज्य की आबादी के हिसाब से परिसीमन के जरिए तय होती हैं और इनकी संख्या भी राज्यसभा से कहीं ज्यादा है। अभी लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। राज्यसभा में छोटे राज्यों को भी कम से कम एक सीट मिलती है, ताकि उनकी आवाज संसद में बनी रहे। संविधान सभा में इस बात पर बहस हुई थी कि क्या हर राज्य को बराबर सीटें दी जाएं। लेकिन भारत की विविधता और राज्यों की आबादी में बड़े अंतर को देखते हुए आबादी आधारित व्यवस्था चुनी गई। नए राज्य बनने पर, जैसे 2000 में उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ और 2014 में तेलंगाना, चौथी अनुसूची में संशोधन कर सीटें बांटी गईं।
राज्यसभा में अधिकतम कितने सदस्य हो सकते हैं
250।
सबसे ज्यादा राज्यसभा सीटें किस राज्य के पास हैं
उत्तर प्रदेश, 31 सीटें।
राज्यसभा सीटों का बंटवारा कहां लिखा है
संविधान की चौथी अनुसूची में।
राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल कितना है
छह साल।
स्रोत: Rajya Sabha: Composition, Legislative Department: Constitution of India, Election Commission of India





