Varanasi Flood Ground Report: वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार चढ़ा है और किनारे के 84 के 84 घाट पानी में समा गए हैं। निचले इलाकों की गलियां और कई मकान बाढ़ की चपेट में हैं। सबसे कठिन तस्वीर महाश्मशान मणिकर्णिका घाट की है। अंतिम संस्कार वाली जमीन डूब चुकी है, इसलिए बगल की इमारत की छत पर चिताएं जल रही हैं।
एक साथ कई पार्थिव शरीर पहुंचने से छत पर भी जगह कम पड़ रही है। परिवार शोक और इंतजाम दोनों से जूझ रहे हैं। एनडीआरएफ टीमें मौके पर हैं और तेज धारा वाले इलाकों से दूर रहने की अपील कर रही हैं। शहर की उम्मीद यही है कि जलस्तर जल्द उतरे।
Varanasi Flood Ground Report: 84 घाट कैसे एक साथ डूबे
गंगा किनारे बसे घाट सामान्य दिनों में पूजा स्नान और पर्यटन के केंद्र रहते हैं। इस बार बढ़े पानी ने वॉकवे और सजावट वाले हिस्से भी निगल लिए। घाटों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। समस्या अब केवल धार्मिक स्थलों तक नहीं, आसपास की बस्तियों तक फैल चुकी है।
मणिकर्णिका की छत क्यों बन गई चिता स्थल
न्यूज18 की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार घाट के पास एक इमारत की छत से पूरा घाट पानी में दिखता है। पारंपरिक चिता स्थल इस्तेमाल लायक नहीं बचा। इसीलिए अंतिम संस्कार छत पर शिफ्ट हुआ। शोक संतप्त परिवारों के लिए सामान्य इंतजाम भी उपलब्ध नहीं रह गए।
छत पर जगह का संकट
बड़ी संख्या में पार्थिव शरीर पहुंचने से छत भी भर गई है। चिता के लिए खाली पट्टी निकालना कठिन हो रहा है। यह दृश्य बाढ़ की मार और पारंपरिक व्यवस्था के टूटने दोनों को दिखाता है। प्रशासनिक राहत के साथ स्थानीय सहयोग पर निर्भरता बढ़ी है।
Varanasi Flood Ground Report: निचले इलाकों में घर और सड़कें
नदी के पास बसे मोहल्लों में पानी घरों तक घुस आया है। सड़कों पर जमाव है। कई परिवार सामान समेटकर ऊंचे या सुरक्षित ठिकाने की ओर निकले हैं। अगर जलस्तर और चढ़ा तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं, यही स्थानीय चिंता है।
पलायन कितना मजबूर कर रहा है
घर खाली करना आसान फैसला नहीं। फिर भी पानी अंदर आने के बाद परिवार निकलने को विवश हैं। बुजुर्ग और छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। अस्थायी ठहरने की जगह और राशन की जरूरत बढ़ती दिख रही है। स्रोत में विस्तृत राहत शिविर सूची नहीं दी गई।
एनडीआरएफ क्या कर रही है
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें सक्रिय हैं। लोगों से बढ़े जलस्तर और तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहने कहा जा रहा है। नदी किनारे गैर जरूरी आना बंद रखने और प्रशासनिक निर्देश मानने की अपील है। बचाव के साथ सतर्कता पर जोर है।
Varanasi Flood Ground Report: शहर की रोजमर्रा कैसे थमी
घाट बंद होने से स्नान पूजा और पर्यटन दोनों प्रभावित हैं। श्मशान की जगह बदलने से अंतिम संस्कार की कतारें लंबी हुई हैं। निचली सड़कों पर आवाजाही घटी है। सामान्य जीवन तब तक नहीं लौटेगा जब तक पानी घाटों से नीचे न उतरे।
वाराणसी की बाढ़ ने 84 घाट डुबो दिए हैं और मणिकर्णिका जैसे पवित्र श्मशान को छत पर ढकेल दिया है। निचले इलाकों के घर खाली हो रहे हैं, सड़कें पानी में हैं। एनडीआरएफ सतर्क है और धारा से दूर रहने की सलाह दे रही है। परिवार शोक और विस्थापन दोनों झेल रहे हैं। जलस्तर उतरे बिना न घाट खुलेंगे, न अंतिम संस्कार की पुरानी व्यवस्था लौटेगी। फिलहाल शहर की सबसे बड़ी प्रार्थना गंगा के शांत होने की है।
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