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दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन: स्वयं सहायता समूह को रिवॉल्विंग फंड, सस्ता लोन और 10 करोड़ महिलाओं का नेटवर्क

गांवों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका बढ़ाने वाली केंद्र सरकार की योजना के बारे में जानिए।

गांव की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह की बैठक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • गांवों में गरीबी कम करने के लिए सबसे असरदार तरीकों में से एक है महिलाओं को संगठित करके उन्हें बचत, कर्ज और रोजगार के मौके देना।
  • स्वयं सहायता समूह आम तौर पर 10 से 20 महिलाओं का एक छोटा समूह होता है, जो एक ही गांव या मोहल्ले की होती हैं।
  • RBI के मास्टर सर्कुलर के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 3 लाख रुपये तक के SHG लोन पर ब्याज दर 7 प्रतिशत रखी गई और बैंकों को 4.5 प्रतिशत तक की ब्याज छूट दी गई।
  • अगर आपके गांव में पहले से समूह है, तो आप उसकी बैठक में जाकर सदस्यता के बारे में पूछ सकती हैं।

गांवों में गरीबी कम करने के लिए सबसे असरदार तरीकों में से एक है महिलाओं को संगठित करके उन्हें बचत, कर्ज और रोजगार के मौके देना। इसी सोच पर केंद्र सरकार का दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे DAY-NRLM कहा जाता है, काम करता है। इसके तहत गांव की गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूह यानी SHG में जोड़ा जाता है। इस लेख में जानिए इस मिशन के तहत समूहों को क्या लाभ मिलते हैं।

मिशन कितना बड़ा है

पत्र सूचना कार्यालय यानी PIB के अनुसार अगस्त 2026 तक इस मिशन के तहत करीब 10.08 करोड़ महिलाओं को 92.30 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया जा चुका है। यह दुनिया के सबसे बड़े सामुदायिक संगठन नेटवर्क में गिना जाता है। मिशन ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत चलता है और राज्यों में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन इसे लागू करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इनके अलग अलग नाम हैं, जैसे बिहार में जीविका।

मुख्य बातें: गांव की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह की बैठक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

स्वयं सहायता समूह क्या है

स्वयं सहायता समूह आम तौर पर 10 से 20 महिलाओं का एक छोटा समूह होता है, जो एक ही गांव या मोहल्ले की होती हैं। सदस्य हर हफ्ते या महीने तय रकम बचत के रूप में जमा करती हैं। समूह इस जमा रकम से जरूरतमंद सदस्यों को छोटा कर्ज देता है। नियमित बैठक, बचत, आपसी कर्ज, समय पर वापसी और हिसाब किताब, इन पांच बातों को समूह की मजबूती का आधार माना जाता है।

रिवॉल्विंग फंड

RBI के DAY-NRLM से जुड़े मास्टर सर्कुलर के अनुसार पात्र स्वयं सहायता समूहों को 20,000 से 30,000 रुपये तक का रिवॉल्विंग फंड दिया जाता है। यह पैसा समूह की अपनी पूंजी बढ़ाता है, जिससे वह सदस्यों को ज्यादा कर्ज दे सकता है और बैंक से लोन लेने की उसकी साख भी मजबूत होती है।

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सामुदायिक निवेश कोष

मिशन के तहत सामुदायिक निवेश कोष यानी CIF भी दिया जाता है। मास्टर सर्कुलर के अनुसार यह कोष गांव स्तर के संगठन या क्लस्टर स्तर के संघ के जरिए समूहों तक पहुंचता है। समूह इसका इस्तेमाल सदस्यों को आजीविका से जुड़े कामों के लिए कर्ज देने या सामूहिक गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।

बैंक लोन पर ब्याज छूट

RBI के मास्टर सर्कुलर के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 3 लाख रुपये तक के SHG लोन पर ब्याज दर 7 प्रतिशत रखी गई और बैंकों को 4.5 प्रतिशत तक की ब्याज छूट दी गई। 3 लाख से 5 लाख रुपये तक के लोन पर 5 प्रतिशत की ब्याज छूट का प्रावधान है। अलग अलग महिला उद्यमियों के लिए भी 1.5 लाख रुपये तक के लोन पर तीन साल तक 2 प्रतिशत ब्याज छूट की व्यवस्था बताई गई है। ये नियम हर साल अपडेट हो सकते हैं, इसलिए ताजा दरें अपने बैंक या ब्लॉक मिशन कार्यालय से पूछें।

किन कामों में मदद

SHG से जुड़ी महिलाएं कई तरह के काम शुरू करती हैं, जैसे पशुपालन, सब्जी उगाना, सिलाई, दुकान, खाद्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प। मिशन के तहत प्रशिक्षण, बाजार से जोड़ने और उत्पादों की बिक्री के लिए मेले जैसे कार्यक्रम भी होते हैं। कई राज्यों में SHG महिलाएं सरकारी कैंटीन, स्कूल ड्रेस सिलाई और बैंक सखी जैसी भूमिकाएं भी निभा रही हैं।

समूह से कैसे जुड़ें

अगर आपके गांव में पहले से समूह है, तो आप उसकी बैठक में जाकर सदस्यता के बारे में पूछ सकती हैं। अगर समूह नहीं है, तो ब्लॉक कार्यालय में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कर्मचारियों या गांव की सामुदायिक संसाधन व्यक्ति से संपर्क करें। समूह बनने के बाद बैंक में खाता खोला जाता है और कुछ महीनों की नियमित बचत और बैठकों के बाद समूह को रिवॉल्विंग फंड और लोन की पात्रता मिलती है।

ध्यान रखने वाली बातें

  • समूह का हिसाब किताब साफ रखें और हर सदस्य को जानकारी दें।
  • लोन की किस्तें समय पर चुकाएं, इससे अगली बार बड़ा लोन मिलना आसान होता है।
  • किसी व्यक्ति को लोन दिलाने के नाम पर पैसे न दें।

समूह की बैठक कैसे चलती है

एक अच्छे स्वयं सहायता समूह की बैठक तय दिन और समय पर होती है। बैठक में हर सदस्य अपनी बचत जमा करती है, पिछले कर्ज की किस्त लौटाती है और नए कर्ज की मांग पर चर्चा होती है। सारे फैसले सदस्यों की सहमति से होते हैं और रजिस्टर में दर्ज किए जाते हैं। समूह की अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां बारी बारी से दी जा सकती हैं, ताकि हर सदस्य नेतृत्व सीख सके। यही अनुशासन आगे चलकर बैंक से बड़े लोन का रास्ता खोलता है।

गांव और क्लस्टर स्तर के संगठन

कई स्वयं सहायता समूह मिलकर गांव स्तर का संगठन बनाते हैं और कई गांव संगठन मिलकर क्लस्टर स्तर का संघ बनाते हैं। ये संगठन बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ाव और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में मदद करते हैं।

DAY-NRLM से कितनी महिलाएं जुड़ी हैं

अगस्त 2026 तक करीब 10.08 करोड़।

SHG को रिवॉल्विंग फंड कितना मिलता है

20,000 से 30,000 रुपये तक।

यह मिशन किस मंत्रालय के तहत है

ग्रामीण विकास मंत्रालय।

समूह से जुड़ने के लिए कहां संपर्क करें

ब्लॉक कार्यालय में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से।

स्रोत: PIB: DAY-NRLM progress, TaxGuru: RBI Master Circular 2025 on DAY-NRLM, Ministry of Rural Development: NRLM dashboard

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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