कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल तक, पूरे भारत में घड़ियां एक ही समय दिखाती हैं। इसे भारतीय मानक समय यानी IST कहा जाता है। लेकिन यह समय तय कैसे होता है, इसकी शुरुआत कब हुई और देश में दो टाइम जोन की मांग क्यों उठती रही है, आइए समझते हैं।
भारतीय मानक समय क्या है
भारतीय मानक समय पूरे भारत में माना जाने वाला आधिकारिक समय है। यह समन्वित सार्वभौमिक समय यानी UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। भारत में डेलाइट सेविंग टाइम, यानी मौसम के हिसाब से घड़ी आगे पीछे करने का नियम लागू नहीं है। अंतरराष्ट्रीय टाइम जोन डेटाबेस में इसे Asia/Kolkata के नाम से दर्ज किया जाता है।

कैसे होती है गणना
भारतीय मानक समय की गणना 82 डिग्री 30 मिनट पूर्व देशांतर के आधार पर होती है। यह रेखा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में विंध्याचल के पास से गुजरती है। हर 15 डिग्री देशांतर पर एक घंटे का अंतर माना जाता है, इसलिए 82.5 डिग्री का मतलब है ग्रीनविच से 5 घंटे 30 मिनट आगे। यह देशांतर इसलिए चुना गया क्योंकि यह पश्चिमी भारत और पूर्वोत्तर भारत के बीच लगभग बीच में पड़ता है।
इतिहास
विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारतीय मानक समय ब्रिटिश दौर में 1 जनवरी 1906 को अपनाया गया। इससे पहले रेलवे के लिए मद्रास समय का इस्तेमाल होता था। आजादी के बाद 1947 में केंद्र सरकार ने IST को पूरे देश का आधिकारिक समय बनाया। हालांकि कोलकाता और मुंबई ने कुछ समय तक अपना स्थानीय समय बनाए रखा। कलकत्ता समय 1948 तक और बंबई समय 1955 तक चला।
यह भी पढ़ें: भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार: छह अधिकार, अनुच्छेद 12 से 35 और अनुच्छेद 32 का महत्व | भारत के राज्य और राजधानी: 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की पूरी सूची
युद्ध के दौरान डेलाइट सेविंग
भारत में डेलाइट सेविंग टाइम का इस्तेमाल बहुत कम समय के लिए हुआ। यह 1962 के भारत चीन युद्ध और 1965 तथा 1971 के भारत पाकिस्तान युद्धों के दौरान थोड़े समय के लिए लागू किया गया था।
समय का संकेत कौन देता है
देश का आधिकारिक समय संकेत नई दिल्ली की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला यानी CSIR NPL की समय और आवृत्ति मानक प्रयोगशाला से जारी होता है। यह संकेत परमाणु घड़ियों पर आधारित है और दुनिया भर की घड़ियों की उस व्यवस्था से जुड़ा है, जो UTC तय करती है। मोबाइल नेटवर्क, बैंकिंग, रेलवे और इंटरनेट जैसी सेवाओं के लिए सटीक समय बेहद जरूरी है।
पूर्व और पश्चिम में अंतर
भारत का पूर्व से पश्चिम तक विस्तार 29 डिग्री से ज्यादा देशांतर में फैला है। इसका मतलब है कि अरुणाचल प्रदेश में सूरज कच्छ के रण की तुलना में लगभग दो घंटे पहले उगता और ढलता है। पूर्वोत्तर के राज्यों में सुबह बहुत जल्दी उजाला हो जाता है और शाम जल्दी अंधेरा हो जाता है, जबकि दफ्तर और स्कूल IST के हिसाब से चलते हैं।
चाय बागान समय
असम के चाय बागानों में लंबे समय से एक अलग समय का पालन होता है, जिसे चायबागान समय या बागान समय कहा जाता है। यह IST से एक घंटा आगे होता है। बागान श्रम अधिनियम 1951 जैसे श्रम कानूनों के प्रावधान सरकारों को किसी औद्योगिक क्षेत्र के लिए स्थानीय समय तय करने की छूट देते हैं। फिर भी देश का एकमात्र आधिकारिक समय IST ही है।
दो टाइम जोन की बहस
1980 के दशक के आखिर में शोधकर्ताओं ने ऊर्जा बचाने के लिए देश को दो या तीन टाइम जोन में बांटने का सुझाव दिया था, लेकिन इसे नहीं अपनाया गया। 2001 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक चार सदस्यीय समिति बनी, जिसके निष्कर्ष 2004 में संसद में रखे गए। समिति ने एक ही टाइम जोन की व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश नहीं की। 2014 में असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने पूर्वोत्तर के लिए अलग टाइम जोन की मांग उठाई थी। 2017 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने भी दो टाइम जोन की संभावना पर अध्ययन की बात कही थी। अब तक IST ही पूरे देश का एकमात्र आधिकारिक समय है।
एक टाइम जोन के फायदे
एक ही टाइम जोन होने से रेल और हवाई सेवाओं के समय, बैंकिंग, टीवी प्रसारण और सरकारी कामकाज में तालमेल आसान रहता है। अलग अलग टाइम जोन होने पर देश के भीतर सफर और व्यापार में समय का हिसाब रखना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि अब तक सरकार एक ही समय के पक्ष में रही है।
भारतीय मानक समय UTC से कितना आगे है
5 घंटे 30 मिनट।
IST की गणना किस देशांतर से होती है
82 डिग्री 30 मिनट पूर्व देशांतर से, जो मिर्जापुर के पास से गुजरता है।
IST कब अपनाया गया
1 जनवरी 1906 को, और आजादी के बाद 1947 में पूरे देश का आधिकारिक समय बना।
चायबागान समय क्या है
असम के चाय बागानों में माना जाने वाला समय, जो IST से एक घंटा आगे है।
स्रोत: Wikipedia: Indian Standard Time, CSIR National Physical Laboratory





