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Nanda Devi Mahotsav 2026: नैनीताल नंदा देवी महोत्सव आज समाप्त, हल्द्वानी से 19 बसें

Nanda Devi Mahotsav 2026
Nanda Devi Mahotsav 2026

सारांश

  • नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव का आज 23 सितंबर 2026 को समापन होगा।
  • मां नंदा-सुनंदा की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
  • शोभायात्रा के बाद मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का डोला विसर्जन किया जाएगा।
  • महोत्सव का आयोजन 16 सितंबर से चल रहा था।
  • श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए हल्द्वानी-काठगोदाम डिपो से 19 बसों का संचालन किया गया है।
  • इन बसों से नैनीताल रूट पर दो-दो फेरे लगाए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को आवागमन में परेशानी न हो।

Nanda Devi Mahotsav 2026: उत्तराखंड के नैनीताल में सात दिन चला नंदा देवी महोत्सव बुधवार 23 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। आयोजन 16 सितंबर से शुरू हुआ था। अंतिम दिन मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमाएं डोले में नगर भ्रमण करेंगी। इसके बाद शिप्रा नदी में विसर्जन होगा।

श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की आशंका पर हल्द्वानी काठगोदाम डिपो से 19 बसें नैनीताल रूट पर लगाई गई हैं। हर बस दो फेरे करेगी। डिपो एआरएम संजय पांडे ने यह व्यवस्था बताई। मंगलवार को भी हल्द्वानी बस स्टेशन पर नैनीताल जाने वाले यात्री दिखे थे।

Nanda Devi Mahotsav 2026: समापन दिन का कार्यक्रम क्या है?

सुबह पूजा अर्चना और आरती के बाद कन्या पूजन तथा भोग होगा। दोपहर में प्रतिमाओं को डोले में रखकर श्रद्धालु नगर घुमाएंगे। परंपरा के अनुसार भ्रमण के बाद शिप्रा नदी में विसर्जन है। आयोजकों ने ज्यादा से ज्यादा लोगों के शामिल होने की अपील की है।

कुमाऊं की इस धार्मिक सांस्कृतिक परंपरा में स्थानीय लोगों के साथ आसपास के इलाकों से भी श्रद्धालु आते हैं। नैनीताल में आवाजाही बढ़ी इसलिए परिवहन पर खास ध्यान दिया गया। सात दिन के अंत में शोभायात्रा सबसे प्रमुख कार्यक्रम है।

डोला कंधों पर निकलेगा और नगर के हिस्सों से गुजरेगा। धार्मिक माहौल के साथ लोक परंपरा की झलक भी मिलने की बात स्रोत में है। विसर्जन के साथ महोत्सव औपचारिक रूप से बंद होगा।

हल्द्वानी से बसें कैसे बढ़ाई गईं?

संजय पांडे के अनुसार इस रूट पर कुल 19 गाड़ियां चलाई गई हैं और दो दो फेरे कराए जा रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन से पहुंचना आसान बनाने और भीड़ संभालने के लिए यह कदम है। पहाड़ी रास्ते पर निजी वाहन बढ़ने से दबाव भी बढ़ सकता है इसलिए रोडवेज का विकल्प रखा गया।

19 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों डिपो से नौ नौ नियमित बसें चल रही थीं और भीड़ बढ़ने पर अतिरिक्त फेरे बढ़ाने की तैयारी थी। 16 सितंबर की रिपोर्ट में 23 सितंबर तक अतिरिक्त बसें चलाने की योजना पहले से बताई गई थी। महोत्सव शुरू होने से पहले ही निगम ने तैयारी कर ली थी।

22 सितंबर की रिपोर्ट में हल्द्वानी और काठगोदाम की 20 बसें नैनीताल मार्ग पर लगातार फेरे लगा रही थीं। तीन दिनों में करीब 6.60 लाख रुपये राजस्व मिला। प्रतिदिन औसतन 2.20 लाख रुपये से अधिक आय बताई गई। यात्री सामान्य दिनों से ज्यादा रहे इसीलिए विशेष सेवा जारी रखी गई।

कदली वृक्ष और प्रतिमाएं कैसे बनीं?

नंदा देवी महोत्सव में कदली वृक्ष का विशेष महत्व बताया जाता है। इस वर्ष मंगोली से कदली वृक्ष नैनीताल लाए गए। पूजा के बाद इन्हीं से मां नंदा सुनंदा की प्रतिमाएं बनाई गईं। वृक्षों के स्वागत में श्रद्धालु उत्साह से जुड़े। महिलाओं ने अक्षत और फूल चढ़ाए। जयकारे लगे।

दूसरे दिन कदली वृक्षों को नगर में लाकर पूजा हुई फिर शोभायात्रा निकली। स्थानीय लोग महिलाएं स्कूली बच्चे और छोलिया कलाकार शामिल हुए। आयोजन केवल पूजा तक नहीं रहा लोक प्रस्तुतियां भी हुईं। कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत इससे जुड़ी दिखी।

प्रतिमाएं इन्हीं वृक्षों से तैयार होकर अंतिम दिन डोले में विराजेंगी। नगर भ्रमण के बाद शिप्रा में विसर्जन तय है। मां की विदाई से पहले भ्रमण में बड़ी संख्या आने की उम्मीद आयोजकों के अनुसार है।

Nanda Devi Mahotsav 2026: यात्रियों को आवागमन में क्या सहूलियत है?

अंतिम दिन भीड़ बढ़ सकती है इसलिए 19 बसों के दो फेरे महत्वपूर्ण हैं। हल्द्वानी और आसपास से आने वाले श्रद्धालु रोडवेज से जा सकते हैं। निगम ने यात्री संख्या के हिसाब से फेरे बढ़ाने की व्यवस्था रखी। मुख्य दिनों में भी बसें पहले से बढ़ाई जा चुकी थीं।

तीन दिन में 6.60 लाख रुपये की कमाई से साफ है कि आवाजाही तेज रही। औसत रोजाना 2.20 लाख से ऊपर आय दर्ज हुई। 20 बसें 22 सितंबर तक रूट पर बताई गईं। समापन वाले दिन 19 बसों की दो फेरे वाली तैनाती भीड़ संभालने का हिस्सा है।

निजी वाहनों का दबाव घटाने और समय पर पहुंचने में सार्वजनिक बस मददगार मानी जा रही है। डिपो स्तर पर एआरएम ने संख्या और फेरे स्पष्ट किए। मंगलवार की आवाजाही देखकर बुधवार की तैयारी और मजबूत की गई।

सात दिवसीय आयोजन धार्मिक आस्था और कुमाऊं संस्कृति दोनों का मेल है। कदली यात्रा शोभायात्रा छोलिया और कन्या पूजन इसी श्रृंखला के अंग हैं। आज सुबह अनुष्ठान दोपहर डोला शाम विसर्जन का क्रम रहेगा। हल्द्वानी काठगोदाम से नैनीताल के बीच अतिरिक्त बसें इसी भीड़ के लिए चलाई जा रही हैं।

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About The Author

Adarsh Pandey Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Adarsh Pandey

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