ताज़ा खबर
Amrapali Dubey TV Serial: टीवी धारावाहिक में अनाथ लड़की के किरदार और अलका याज्ञनिक के गाने से आम्रपाली दुबे को मिली खास पहचान कसार के लड्डू: छठ प्रसाद के लिए चावल के आटे और गुड़ से लड्डू बनाने का पारंपरिक तरीका BREAKING: लद्दाख के टेंगला में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन भारत रचेगा इतिहास कल का मौसम 7 नवंबर 2026: दिल्ली में 28°C, लखनऊ, पटना, मुंबई समेत 18 शहरों का पूर्वानुमान Digital Arrest Scam: How Fraudsters Pose as Police on Video Calls and How to Protect Yourself Nothing दिसंबर में लॉन्च करेगा अपना पहला AI-native प्रोडक्ट, कार्ल पेई बोले: डिवाइस में नहीं होगी स्क्रीन MPLADS क्या है: हर सांसद को सालाना 5 करोड़ रुपये, आपके इलाके में कौन से काम हो सकते हैं और कैसे देखें हिसाब BREAKING: हिमाचल-पंजाब और हरियाणा के बीच बिजली विवाद का सुप्रीम कोर्ट ने किया समाधान
ट्रेंडिंग
सरकारी योजना

MPLADS क्या है: हर सांसद को सालाना 5 करोड़ रुपये, आपके इलाके में कौन से काम हो सकते हैं और कैसे देखें हिसाब

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLADS से सांसद अपने इलाके में सड़क, स्कूल भवन और पानी जैसी सुविधाओं के काम सुझा सकते हैं। जानिए पूरी व्यवस्था।

गांव में बनती सड़क और सामुदायिक भवन का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • अक्सर खबरें आती हैं कि किसी सांसद ने अपनी सांसद निधि से गांव में सड़क, स्कूल का कमरा या सामुदायिक भवन बनवाया।
  • अप्रैल 2023 के MPLADS दिशानिर्देशों के अनुसार हर सांसद का सालाना हक 5 करोड़ रुपये है।
  • किन कामों की अनुमति है और किनकी नहीं, इसकी पूरी सूची दिशानिर्देशों में दी गई है।
  • अगर आपके इलाके में किसी सामुदायिक सुविधा की जरूरत है, जैसे स्कूल में कमरा या गांव में रास्ता, तो ग्राम पंचायत या स्थानीय निकाय के जरिये प्रस्ताव तैयार कर अपने सांसद के कार्यालय को दे सकते…

अक्सर खबरें आती हैं कि किसी सांसद ने अपनी सांसद निधि से गांव में सड़क, स्कूल का कमरा या सामुदायिक भवन बनवाया। यह सांसद निधि असल में संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLADS है। यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत सांसद अपने क्षेत्र में स्थायी सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण के लिए काम सुझा सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह योजना कैसे काम करती है और आम नागरिक इसका हिसाब कैसे देख सकते हैं।

MPLADS क्या है

MPLADS केंद्र सरकार की योजना है, जिसका संचालन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय करता है। इसके तहत सांसद अपने क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास कार्यों की सिफारिश करते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि सांसद को यह पैसा सीधे नहीं मिलता। सांसद सिर्फ काम की सिफारिश करते हैं, जबकि मंजूरी और काम कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है।

मुख्य बातें: गांव में बनती सड़क और सामुदायिक भवन का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

योजना का सफर

MPLADS की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह योजना 23 दिसंबर 1993 को शुरू हुई थी। तब हर सांसद का सालाना हक 5 लाख रुपये था। 1994-95 में इसे बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये, 1998-99 में 2 करोड़ रुपये और 2011-12 से 5 करोड़ रुपये किया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान 6 अप्रैल 2020 से 9 नवंबर 2021 तक योजना स्थगित रही और 2020-21 में कोई राशि आवंटित नहीं हुई। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 नवंबर 2021 से इसे फिर बहाल किया।

कितना पैसा मिलता है

अप्रैल 2023 के MPLADS दिशानिर्देशों के अनुसार हर सांसद का सालाना हक 5 करोड़ रुपये है। लोकसभा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में काम सुझाते हैं। राज्यसभा सांसद उस राज्य में कहीं भी काम सुझा सकते हैं जहां से वे चुने गए हैं, जबकि मनोनीत सांसद देश में कहीं भी काम की सिफारिश कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: सितंबर की किस्त पर बड़ा अपडेट, क्या दिवाली से पहले खाते में आएंगे 3,000 रुपये? | प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना में आवेदन कैसे करें: 60 साल के बाद 3000 रुपये महीना पेंशन, अंशदान और पात्रता

SC और ST क्षेत्रों के लिए हिस्सा

दिशानिर्देशों के अनुसार सांसद को हर साल कम से कम 15 प्रतिशत यानी 75 लाख रुपये अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के लिए और कम से कम 7.5 प्रतिशत यानी 37.5 लाख रुपये अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए सुझाने होते हैं। अगर किसी क्षेत्र में इनमें से किसी वर्ग की पर्याप्त आबादी नहीं है, तो यह राशि दूसरे वर्ग के क्षेत्रों में इस्तेमाल की जा सकती है।

किस तरह के काम हो सकते हैं

MPLADS के तहत ऐसे काम सुझाए जाते हैं जिनसे स्थायी सामुदायिक संपत्ति बने और जो आम लोगों के इस्तेमाल में आए। आमतौर पर इनमें ये काम शामिल होते हैं:

  • गांव और शहर की सड़कें, पुलिया और रास्ते।
  • सरकारी स्कूलों में कक्षा, शौचालय और दूसरी सुविधाएं।
  • पेयजल और स्वच्छता से जुड़े काम।
  • स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं।
  • सामुदायिक भवन, पुस्तकालय और खेल सुविधाएं।

किन कामों की अनुमति है और किनकी नहीं, इसकी पूरी सूची दिशानिर्देशों में दी गई है। निजी लाभ वाले या व्यक्तिगत संपत्ति से जुड़े काम आम तौर पर अनुमति के दायरे में नहीं आते।

eSAKSHI पोर्टल

1 अप्रैल 2023 से MPLADS का पूरा काम MPLADS-eSAKSHI पोर्टल के जरिये होता है। सांसद की सिफारिश, जिला प्रशासन की मंजूरी, काम का क्रियान्वयन, भुगतान और काम पूरा होने तक की जानकारी इसी पोर्टल पर दर्ज होती है। इसमें काम की तस्वीरें और दस्तावेज भी अपलोड किए जाते हैं, जिससे निगरानी आसान होती है।

नागरिक कैसे देखें हिसाब

MPLADS की आधिकारिक वेबसाइट पर डैशबोर्ड उपलब्ध है, जहां योजना से जुड़े आंकड़े देखे जा सकते हैं। अगर आप अपने सांसद की सिफारिश पर हुए कामों के बारे में जानना चाहते हैं, तो जिला प्रशासन के योजना या विकास विभाग से भी जानकारी ली जा सकती है। सूचना का अधिकार कानून के तहत भी जानकारी मांगी जा सकती है।

अपने इलाके के काम के लिए क्या करें

अगर आपके इलाके में किसी सामुदायिक सुविधा की जरूरत है, जैसे स्कूल में कमरा या गांव में रास्ता, तो ग्राम पंचायत या स्थानीय निकाय के जरिये प्रस्ताव तैयार कर अपने सांसद के कार्यालय को दे सकते हैं। प्रस्ताव में काम की जगह, जरूरत और लाभार्थियों की संख्या साफ लिखें। अंतिम फैसला सांसद की सिफारिश और जिला प्रशासन की मंजूरी पर निर्भर करता है।

विधायक निधि से अंतर

कई राज्यों में विधायकों के लिए भी इसी तरह की स्थानीय क्षेत्र विकास योजनाएं चलती हैं, जिन्हें आमतौर पर विधायक निधि कहा जाता है। ये राज्य सरकार की योजनाएं होती हैं और इनकी राशि और नियम हर राज्य में अलग होते हैं, जबकि MPLADS केंद्र सरकार की योजना है और पूरे देश में एक जैसे दिशानिर्देशों से चलती है।

MPLADS में हर सांसद को कितनी राशि मिलती है

दिशानिर्देशों के अनुसार सालाना 5 करोड़ रुपये का हक।

क्या सांसद को पैसा सीधे मिलता है

नहीं। सांसद सिर्फ काम की सिफारिश करते हैं, मंजूरी और क्रियान्वयन जिला प्रशासन करता है।

स्रोत: MPLADS Guidelines April 2023, MPLADS (MoSPI), PM India: Cabinet approves restoration of MPLADS, MPLADS Dashboard

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X