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World Alzheimer’s Day: अल्जाइमर के 5 शुरुआती संकेत डॉक्टर ने बताए, बार बार भूलना न करें नजरअंदाज

World Alzheimer’s Day: अल्जाइमर के 5 शुरुआती संकेत डॉक्टर ने बताए, बार बार भूलना न करें नजरअंदाज
World Alzheimer's Day

सारांश

  • World Alzheimer's Day हर साल 21 सितंबर को अल्जाइमर और डिमेंशिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
  • बार-बार हाल की बातें भूलना या एक ही सवाल दोहराना अल्जाइमर के संभावित शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकता है।
  • परिचित जगह पर रास्ता भूलना या समय और स्थान को लेकर भ्रम होना भी चेतावनी संकेत हो सकता है।
  • रोजमर्रा के परिचित काम करने में परेशानी या योजना बनाने और समस्या सुलझाने में नई दिक्कत पर ध्यान देना चाहिए।
  • बातचीत के दौरान सही शब्द खोजने में लगातार परेशानी या बातचीत को समझने में कठिनाई भी शुरुआती लक्षणों में दिखाई दे सकती है।
  • हर बार भूलना अल्जाइमर नहीं होता, लेकिन याददाश्त में लगातार बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है।

World Alzheimer’s Day: उम्र बढ़ने पर कभी कभार कोई नाम या बात याद न आना सामान्य हो सकता है। सामान रखकर भूल जाना भी कई बुजुर्गों में देखा जाता है। लेकिन जब भूलने की समस्या बार बार होने लगे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे तो इसे सिर्फ उम्र का असर मानकर छोड़ देना ठीक नहीं।

भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल्स रांची के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ दीपक चंद्र प्रकाश कहते हैं कि याददाश्त और व्यवहार में आए बदलावों को शुरुआती स्तर पर पहचानना जरूरी है। इससे समय पर जांच और देखभाल संभव हो सकती है। अल्जाइमर रोग धीरे धीरे याददाश्त सोचने समझने और रोज के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

विश्व अल्जाइमर दिवस के मौके पर डॉक्टर ने ऐसे पांच बदलाव बताए जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक बार कुछ भूल जाना अपने आप में बीमारी का संकेत नहीं है। बार बार और बढ़ते लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

World Alzheimer’s Day: कौन से याददाश्त संबंधी बदलाव सामान्य नहीं माने जाते?

हाल में कही गई या सीखी गई बातें बार बार भूलना सामान्य भूलने से अलग हो सकता है। जरूरी अपॉइंटमेंट या हाल की बातचीत याद न रहना ध्यान देने लायक है। एक ही सवाल बार बार पूछना भी संकेत हो सकता है।

डॉ प्रकाश के अनुसार ऐसे बदलावों को उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर छोड़ना ठीक नहीं। परिवार वाले अक्सर इन्हें हल्के में ले लेते हैं क्योंकि लक्षण धीरे धीरे आते हैं। कितनी बार भूल रहे हैं और क्या समस्या बढ़ रही है यह देखना महत्वपूर्ण है।

रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ने लगे तो चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना चाहिए। सामान्य उम्र संबंधी भूलने से व्यक्ति अपने कामकाज संभाल लेता है। अल्जाइमर में यह क्षमता धीरे धीरे प्रभावित हो सकती है।

परिचित कामों और रास्तों में परेशानी क्यों मायने रखती है?

वर्षों से किए जा रहे सामान्य काम अचानक मुश्किल लगने लगें तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। जानी पहचानी रेसिपी से खाना बनाना या घर के नियमित काम पूरे करने में दिक्कत होना बदलाव का संकेत हो सकता है।

परिचित जगह पर होने के बावजूद यह न समझ पाना कि व्यक्ति कहां है चिंता का विषय हो सकता है। जाने पहचाने रास्ते भूल जाना या तारीख समय और आसपास के माहौल को लेकर बार बार भ्रमित होना जांच की जरूरत बता सकता है।

ये लक्षण सोचने समझने की क्षमता में आए बदलाव से जुड़े हो सकते हैं। परिवार को एक घटना नहीं बल्कि पैटर्न देखना चाहिए। समस्या समय के साथ स्पष्ट होती जाए तो डॉक्टर से संपर्क करना सही कदम है।

World Alzheimer’s Day: शब्द याद न आना और सामान गलत जगह रखना कब संकेत बनता है?

कभी कभार कोई शब्द न सूझना आम बात है। लेकिन बार बार सही शब्द खोजने में संघर्ष करना बातचीत का क्रम भूल जाना या सामने वाले की बात समझने में दिक्कत होना सोचने की क्षमता में बदलाव दर्शा सकता है।

चाबी या चश्मा कभी गलत जगह रखना सामान्य हो सकता है। बार बार सामान ऐसी जगह रखना जहां आमतौर पर नहीं रखा जाता और बाद में याद न रहना कि कहां रखा जांच कराने लायक हो सकता है।

डॉक्टर के अनुसार ये पांचों संकेत अलग अलग दिख सकते हैं। किसी एक के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। बार बार होने और रोजमर्रा पर असर पड़ने पर इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

अल्जाइमर की जांच कैसे की जाती है?

अल्जाइमर की पुष्टि के लिए हर मरीज में एक ही जांच काफी नहीं होती। डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री याददाश्त और व्यवहार में आए बदलाव तथा रोजमर्रा की गतिविधियों पर उनके असर को समझते हैं।

याददाश्त सोचने समझने भाषा और अन्य संज्ञानात्मक क्षमताओं का आकलन किया जा सकता है। लक्षणों के आधार पर अन्य कारणों की पहचान के लिए अतिरिक्त जांच या ब्रेन इमेजिंग की सलाह दी जा सकती है।

याददाश्त की समस्या सिर्फ अल्जाइमर से नहीं होती। पोषण संबंधी कमी दवाओं का असर नींद की दिक्कत या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी प्रभावित कर सकती हैं। समय पर जांच से सही कारण पता चल सकता है।

World Alzheimer’s Day: डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

याददाश्त में लगातार दिक्कत बढ़ता भ्रम या परिचित काम करने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। समय पर मूल्यांकन से समस्या के संभावित कारण को समझने में मदद मिलती है।

व्यक्ति और परिवार के लिए देखभाल की योजना बनाने में भी यह उपयोगी होता है। उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होना हमेशा सामान्य नहीं होता। बार बार होने वाले बदलावों पर ध्यान देकर शुरुआती पहचान संभव है।

डॉ दीपक चंद्र प्रकाश के अनुसार शुरुआती स्तर पर बदलाव पहचानने से उचित मार्गदर्शन मिल सकता है। परिवार वालों को लक्षणों को उम्र का असर मानकर नजरअंदाज करने की बजाय पैटर्न पर गौर करना चाहिए। विश्व अल्जाइमर दिवस के संदर्भ में यह जानकारी जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।

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लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

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