Vishwakarma Shram Samman Yojana: उत्तर प्रदेश में सदियों से अपनी पारंपरिक कला और हुनर के जरिए अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने दस्तकारों और कारीगरों के जीवन में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार की ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ई, दर्जी, लोहार, कुम्हार और नाई जैसे पारंपरिक पेशों से जुड़े लाखों कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और आर्थिक संबल देने के लिए यह महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है। इसके तहत न केवल कारीगरों को निशुल्क आधुनिक कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि काम को विस्तार देने के लिए अत्याधुनिक टूलकिट और आसान शर्तों पर सस्ता ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों को पुनर्जीवित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
Vishwakarma Shram Samman Yojana: 25 पारंपरिक ट्रेडों से जुड़े कारीगरों को मिल रहा कौशल संवर्धन का मौका
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के दायरे में समाज के लगभग 25 पारंपरिक शिल्पों और व्यवसायों को शामिल किया गया है। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, सुनार, नाई, मोची, टोकरी बुनकर, राजमिस्त्री और हलवाई जैसे दैनिक जीवन से जुड़े आवश्यक कारीगर प्रमुख रूप से शामिल हैं। योजना के अंतर्गत चयनित पात्र अभ्यर्थियों को उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा 10 दिनों का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। आधुनिक मशीनों और बदलते बाजार की मांग के अनुरूप काम सिखाने के साथ-साथ इस प्रशिक्षण काल के दौरान कारीगरों की दिहाड़ी के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार द्वारा प्रतिदिन 500 रुपये का मानदेय यानी कुल 5,000 रुपये का वित्तीय भत्ता सीधे उनके बैंक खातों में दिया जाता है।
15 हजार रुपये तक की एडवांस टूलकिट पूरी तरह मुफ्त
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी कारीगरों को उनके संबंधित ट्रेड से जुड़ी आधुनिक टूलकिट बिना किसी शुल्क के वितरित की जाती है। इस एडवांस्ड टूलकिट की अधिकतम लागत 15,000 रुपये तक होती है। अक्सर पारंपरिक कारीगर पूंजी की कमी के चलते पुराने और घिसे हुए औजारों से काम करने को मजबूर रहते हैं, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और फिनिशिंग प्रभावित होती है। सरकार द्वारा दी जाने वाली बिजली या बैटरी चालित आधुनिक किट से काम की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है, जिससे कारीगर कम समय में बेहतर उत्पाद तैयार कर अपनी दैनिक आय में उल्लेखनीय इजाफा कर पा रहे हैं।
व्यवसाय विस्तार के लिए 10 लाख तक का रियायती लोन और 15% सब्सिडी
अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और खुद की दुकान या वर्कशॉप स्थापित करने के इच्छुक कारीगरों के लिए योजना में वित्तीय मदद का मजबूत ढांचा तैयार किया गया है। लाभार्थी बैंकों के माध्यम से 10 लाख रुपये तक का रियायती ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इस ऋण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राज्य सरकार द्वारा परियोजना लागत पर 15 प्रतिशत की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसका सीधा मतलब यह है कि कारीगरों को ऋण की कुल राशि का एक बड़ा हिस्सा बतौर अनुदान मिल जाता है, जिससे मासिक किस्तों का वित्तीय बोझ बेहद कम हो जाता है और वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपने उद्यम को आगे बढ़ा सकते हैं।
पात्रता के मानक और आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य है। इसके साथ ही आवेदन की तिथि पर प्रार्थी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए। शैक्षणिक योग्यता की कोई अनिवार्य बाध्यता नहीं रखी गई है, जिससे अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे हुनरमंद भी इसका पूरा फायदा उठा सकें। हालांकि, आवेदक के परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए और उसने पिछले दो वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य समान टूलकिट योजना का लाभ न लिया हो। आवेदन के समय पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और अपने पारंपरिक ट्रेड से जुड़ा अनुभव या जातिगत प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक होता है।
Vishwakarma Shram Samman Yojana: पोर्टल पर ऐसे करें आसान ऑनलाइन आवेदन
कारीगरों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और बिचौलियों से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरी आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। इच्छुक शिल्पकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के आधिकारिक पोर्टल diupmsme.upsdc.gov.in पर जाकर ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ के लिंक पर क्लिक कर अपना ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पोर्टल पर बुनियादी व्यक्तिगत विवरण, ट्रेड का चयन और जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी अपलोड करने के बाद जिला उद्योग केंद्र (DIC) द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी की जाती है। पात्रता की पुष्टि होते ही अभ्यर्थियों को नजदीकी प्रशिक्षण केंद्र पर बैच के अनुसार आमंत्रित कर लिया जाता है। यह पहल जमीनी स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देकर कारीगरों को वास्तविक मायनों में आत्मनिर्भर बना रही है।
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स्रोत: उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (MSME), उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय तथा जिला उद्योग केंद्र (DIC)।
आधिकारिक पोर्टल: https://diupmsme.upsdc.gov.in





