UP Solar Rooftop Subsidy 2026: उत्तर प्रदेश में पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घटाने और हरित ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आवासीय उपभोक्ताओं को ऐतिहासिक वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही हैं। केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के साथ उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य स्तरीय सौर ऊर्जा नीति का समन्वय होने से घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाना अब बेहद किफायती हो चुका है। इस संयुक्त व्यवस्था के अंतर्गत पात्र उपभोक्ताओं को केंद्र और राज्य दोनों से दोहरा आर्थिक अनुदान प्राप्त हो रहा है, जिससे संयंत्र की प्रारंभिक स्थापना लागत आधी से भी कम रह जाती है। नियमित बिजली बिलों में भारी बचत के साथ-साथ यह योजना उपभोक्ताओं को अपनी स्वयं की आवश्यकता के अनुरूप विद्युत उत्पादन करने और आत्मनिर्भर बनने का सीधा अवसर प्रदान कर रही है।
UP Solar Rooftop Subsidy 2026: केंद्र सरकार की सब्सिडी संरचना
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा सिस्टम की क्षमता के अनुसार पारदर्शी स्लैब निर्धारित किए गए हैं। एक किलोवाट क्षमता वाले ग्रिड-कनेक्टेड आवासीय सोलर सिस्टम पर केंद्र सरकार की ओर से तीस हजार रुपये का एकमुश्त अनुदान प्रदान किया जाता है। दो किलोवाट क्षमता का संयंत्र स्थापित करने वाले उपभोक्ताओं को साठ हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है, जबकि तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के घरेलू सिस्टम पर अधिकतम अठहत्तर हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी सीधे लाभार्थी के प्रमाणित बैंक खाते में भेजी जाती है।
सब्सिडी की यह राशि प्राप्त करने के लिए कुछ तकनीकी मानकों का अनुपालन अनिवार्य रखा गया है। इसके तहत केवल उन्हीं सोलर पैनलों और इनवर्टरों का उपयोग किया जा सकता है जो मंत्रालय द्वारा अनुमोदित घरेलू मॉड्यूल निर्माताओं की सूची (ALMM) में शामिल हों। इसके साथ ही संयंत्र की स्थापना केवल एमएनआरई अथवा राज्य नोडल एजेंसी यूपीनेडा (UPNEDA) के साथ पंजीकृत एवं पैनलबद्ध वेंडरों के माध्यम से ही कराई जानी आवश्यक है, ताकि उपकरणों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक कार्यकुशलता सुनिश्चित रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार की अतिरिक्त सहायता: राज्य से मिलेंगे 30 हजार रुपये तक
केंद्र सरकार के 78 हजार रुपये के अधिकतम अनुदान के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अपनी राज्य सौर ऊर्जा नीति के तहत अतिरिक्त टॉप-अप सब्सिडी प्रदान कर रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रति किलोवाट पंद्रह हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा तीस हजार रुपये (दो किलोवाट या उससे अधिक के सिस्टम पर) निर्धारित की गई है।
इस दोहरी सहायता व्यवस्था के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं को मिलने वाला कुल अनुदान देश में सर्वाधिक आकर्षक स्तर पर पहुंच गया है। एक किलोवाट के सोलर रूफटॉप सिस्टम पर केंद्र और राज्य का मिलाकर कुल पैंतालीस हजार रुपये का अनुदान प्राप्त होता है। दो किलोवाट के सिस्टम पर कुल नब्बे हजार रुपये की छूट मिलती है, जबकि तीन किलोवाट अथवा उससे बड़े घरेलू सोलर सिस्टम पर केंद्र के अठहत्तर हजार और राज्य के तीस हजार रुपये को मिलाकर कुल सब्सिडी एक लाख आठ हजार रुपये तक पहुंच जाती है। यह अतिरिक्त राज्य अनुदान उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के माध्यम से सीधे डीबीटी प्रणाली द्वारा उपभोक्ता के बैंक खाते में अंतरित किया जाता है।
वित्तीय बचत और नेट मीटरिंग से शून्य बिजली बिल का समीकरण
घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने से न केवल पर्यावरण को कार्बन उत्सर्जन से मुक्ति मिलती है, बल्कि घरेलू बजट में भी क्रांतिकारी बदलाव आता है। एक सामान्य तीन किलोवाट का सोलर सिस्टम प्रतिदिन औसतन बारह से पंद्रह यूनिट तक बिजली का उत्पादन करता है, जो महीने भर में करीब साढ़े तीन सौ से चार सौ यूनिट तक पहुंच जाता है। तीन किलोवाट क्षमता के सिस्टम पर एक लाख आठ हजार रुपये की संयुक्त सब्सिडी मिलने से उपभोक्ता को अपनी जेब से केवल नाममात्र का अंशदान देना पड़ता है, जो विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे रियायती सोलर ऋण से भी सुलभ हो जाता है।
इसके साथ ही डिस्काम द्वारा लगाए जाने वाले द्वि-मार्गी ‘नेट मीटर’ (Net Meter) के जरिए दिन के समय उत्पादित अतिरिक्त बिजली स्वतः मुख्य ग्रिड में निर्यात हो जाती है। रात के समय या बादलों वाले दिनों में उपभोक्ता ग्रिड से बिजली ले सकते हैं, और महीने के अंत में आयातित व निर्यातित यूनिटों का समायोजन करके अंतिम बिल तैयार किया जाता है। अधिकांश मामलों में नियमित घरेलू खपत के मुकाबले सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होने से बिजली बिल लगभग शून्य हो जाता है। संयंत्र पर किया गया प्रारंभिक निवेश तीन से चार वर्षों की अवधि में पूरी तरह वसूल हो जाता है, जिसके बाद उपभोक्ता अगले बीस से पच्चीस वर्षों तक निशुल्क बिजली का निरंतर लाभ उठा सकते हैं।
UP Solar Rooftop Subsidy 2026: राष्ट्रीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया और पात्रता शर्तें
इस संयुक्त सब्सिडी योजना का लाभ प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। इसके लिए इच्छुक उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय सोलर रूफटॉप पोर्टल (pmsuryagarh.gov.in) पर जाकर अपना पंजीकरण करना होता है। पंजीकरण के समय उपभोक्ता को अपना राज्य, संबंधित विद्युत वितरण कंपनी (डिस्काम जैसे डीवीवीएनएल, एमवीवीएनएल, पीवीवीएनएल अथवा पीयूवीवीएनएल) का चयन कर अपना उपभोक्ता खाता संख्या (सीए नंबर) दर्ज करना होता है। इसके बाद पहचान दस्तावेज के रूप में आधार कार्ड, नवीनतम बिजली बिल और बैंक पासबुक की प्रति अपलोड करनी होती है।
पंजीकरण उपरांत तकनीकी व्यवहार्यता (टीएफआर) की स्वीकृति मिलने पर उपभोक्ता पोर्टल पर सूचीबद्ध अधिकृत वेंडर का चयन करके संयंत्र स्थापित करवा सकते हैं। कार्य पूर्ण होने के पश्चात डिस्काम के तकनीकी अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर संयंत्र का भौतिक निरीक्षण किया जाता है और नेट मीटर स्थापित कर कमीशनिंग प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। कमीशनिंग रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होने के कुछ ही दिनों के भीतर केंद्र और राज्य दोनों की सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा हो जाती है। यह योजना 31 मार्च 2027 तक प्रभावी है, और वर्तमान में प्रदेश के नौ लाख से अधिक घरों में स्थापित तीन हजार मेगावाट से अधिक की सौर क्षमता उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा का अग्रणी केंद्र बना रही है।
स्रोत: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पोर्टल
यह भी पढ़ें
सही कॉलेज कैसे चुनें: मान्यता, NIRF रैंकिंग, फैकल्टी, फीस और प्लेसमेंट के दावों की जांच
घर पर किचन गार्डन कैसे बनाएं: गमलों में सर्दियों की सब्जियां, मिट्टी, धूप और घरेलू खाद की जानकारी
त्योहार के खर्च के लिए पर्सनल लोन लेने से पहले क्या जानें: ब्याज, फीस, EMI और विकल्प





