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राष्ट्रीय गोकुल मिशन: देसी गाय और भैंस की नस्ल सुधार, मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स सॉर्टेड सीमन और गोपाल रत्न पुरस्कार

देसी नस्ल की गाय और भैंस का दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन चलाती है। जानिए किसानों को क्या फायदा है।

गांव में देसी गाय के साथ पशुपालक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और गांवों में करोड़ों परिवारों की आमदनी गाय और भैंस पालन पर टिकी है।
  • इसका मुख्य मकसद देसी गाय और भैंस नस्लों का संरक्षण और सुधार करना, दूध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, अच्छी नस्ल के सांडों की उपलब्धता बढ़ाना और कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा गांव गांव तक…
  • मिशन के तहत इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF और भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक की प्रयोगशालाएं भी बनाई गई हैं।
  • मिशन के तहत हर साल राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार दिए जाते हैं।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और गांवों में करोड़ों परिवारों की आमदनी गाय और भैंस पालन पर टिकी है। देश में गिर, साहीवाल, थारपारकर, राठी, लाल सिंधी और हरियाणा जैसी कई बेहतरीन देसी गाय नस्लें और मुर्रा, मेहसाणा और जाफराबादी जैसी भैंस नस्लें हैं। लेकिन लंबे समय तक इनकी नस्ल सुधार पर ध्यान कम रहा, जिससे औसत दूध उत्पादन कम रहा। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन शुरू किया। इस लेख में जानिए मिशन का मकसद, इसके मुख्य कार्यक्रम और पशुपालकों को मिलने वाले फायदे।

मिशन की शुरुआत

राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत दिसंबर 2014 में हुई। इसे केंद्र सरकार का मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, यानी इसका पशुपालन और डेयरी विभाग चलाता है। राज्यों में इसे राज्य पशुधन विकास बोर्ड और पशुपालन विभाग लागू करते हैं। बाद में इसे पशुधन क्षेत्र की दूसरी योजनाओं के साथ जोड़कर नए रूप में आगे बढ़ाया गया।

मुख्य बातें: गांव में देसी गाय के साथ पशुपालक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

मिशन का मकसद

इसका मुख्य मकसद देसी गाय और भैंस नस्लों का संरक्षण और सुधार करना, दूध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, अच्छी नस्ल के सांडों की उपलब्धता बढ़ाना और कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा गांव गांव तक पहुंचाना है। इससे पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने और दूध को ज्यादा फायदेमंद कारोबार बनाने की कोशिश है।

राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम

मिशन के तहत राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम चलाया जाता है। इसमें उन जिलों में, जहां कृत्रिम गर्भाधान का दायरा कम है, पशुपालकों के घर पर ही मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के सीमन का इस्तेमाल होता है। हर पशु को टैग लगाकर उसका रिकॉर्ड पशुधन के राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रखा जाता है, ताकि उसकी नस्ल और स्वास्थ्य की जानकारी बनी रहे।

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सेक्स सॉर्टेड सीमन

मिशन में सेक्स सॉर्टेड सीमन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक से करीब 90 प्रतिशत तक संभावना रहती है कि बछिया ही पैदा होगी। इससे पशुपालक के पास दूध देने वाले पशु बढ़ते हैं और आवारा नर पशुओं की समस्या भी कम होती है। सरकार ने इसकी कीमत कम करने के लिए देश में ही इसका उत्पादन बढ़ाया है और पशुपालकों को इस पर सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की दर राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है।

IVF और भ्रूण प्रत्यारोपण

मिशन के तहत इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF और भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक की प्रयोगशालाएं भी बनाई गई हैं। इससे एक उच्च गुणवत्ता वाली गाय से साल में कई बछड़े पैदा कराए जा सकते हैं। यह तकनीक बेहतरीन नस्ल के पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ाने में मदद करती है।

मैत्री: गांव के तकनीशियन

मैत्री यानी ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन, ऐसे स्थानीय युवा होते हैं जिन्हें कृत्रिम गर्भाधान और प्राथमिक पशु चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाती है। ये पशुपालकों के घर जाकर सेवा देते हैं। इससे गांव के युवाओं को रोजगार भी मिलता है।

गोकुल ग्राम और नस्ल संरक्षण

मिशन के शुरुआती दौर में देसी नस्लों के संरक्षण के लिए गोकुल ग्राम नाम के एकीकृत पशु विकास केंद्र बनाने का प्रावधान किया गया। इसके साथ देसी नस्लों के उच्च गुणवत्ता वाले सांड तैयार करने के लिए संतति परीक्षण और वंशावली चयन जैसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं। राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र भी देसी नस्लों के जर्मप्लाज्म के संरक्षण का काम करते हैं।

राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार

मिशन के तहत हर साल राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार दिए जाते हैं। ये देसी नस्ल पालने वाले सबसे अच्छे डेयरी किसान, सबसे अच्छे कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और सबसे अच्छी डेयरी सहकारी समिति या दूध उत्पादक कंपनी को दिए जाते हैं। पुरस्कार 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के मौके पर दिए जाते हैं। आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन होता है।

पशुपालक कैसे लें लाभ

मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान या सेक्स सॉर्टेड सीमन के लिए अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय, पशुपालन विभाग या मैत्री तकनीशियन से संपर्क करें। पशु का टैग जरूर लगवाएं और उसका पंजीकरण कराएं। कई राज्यों में पशुपालन विभाग की हेल्पलाइन पर भी जानकारी मिलती है। डेयरी सहकारी समितियों के जरिए भी ये सेवाएं दी जाती हैं।

किसानों के अनुभव

कई राज्यों में पशुपालकों ने बताया है कि अच्छी नस्ल के सीमन से पैदा हुई बछिया बड़ी होकर पहले से ज्यादा दूध देती है। साहीवाल और गिर जैसी देसी नस्लें गर्मी सहने और बीमारियों से लड़ने में भी बेहतर मानी जाती हैं, और इन्हें कम खर्च में पाला जा सकता है। पशु के अच्छे उत्पादन के लिए नस्ल के साथ संतुलित चारा, साफ पानी, समय पर टीकाकरण और कीड़े की दवा भी उतनी ही जरूरी है। पशुपालन विभाग खुरपका मुंहपका और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों के लिए मुफ्त टीकाकरण भी करता है, जिसका लाभ जरूर लें।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन कब शुरू हुआ

दिसंबर 2014 में।

सेक्स सॉर्टेड सीमन से क्या फायदा है

करीब 90 प्रतिशत तक बछिया पैदा होने की संभावना।

मैत्री कौन होते हैं

गांव के प्रशिक्षित कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन।

गोपाल रत्न पुरस्कार कब दिए जाते हैं

26 नवंबर, राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर।

स्रोत: Department of Animal Husbandry and Dairying, Rashtriya Gokul Mission, PIB: Rashtriya Gokul Mission

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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