भारत दुनिया के सबसे बड़े मछली उत्पादक देशों में शामिल है और करोड़ों लोगों की रोजी रोटी मछली पालन और उससे जुड़े कारोबार पर टिकी है। गांवों में तालाब, नदी के किनारे और समुद्री तट के इलाकों में मछली पालन आय का अच्छा जरिया बन सकता है। इसी क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना यानी PMMSY शुरू की। इसमें मछली पालन से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने तक के कई कामों के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। इस लेख में जानिए योजना की मुख्य बातें, सहायता की दर, पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया।
योजना की शुरुआत
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत सितंबर 2020 में हुई। इसे शुरुआत में पांच साल के लिए 20,050 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ मंजूर किया गया। इसमें केंद्र, राज्य और लाभार्थियों का हिस्सा शामिल है। योजना को केंद्र सरकार का मत्स्य पालन विभाग चलाता है, जो मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आता है। जमीन पर इसे राज्यों के मत्स्य विभाग लागू करते हैं।

योजना के उद्देश्य
इसका मकसद मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, मछुआरों और मछली पालकों की आय बढ़ाना और इस क्षेत्र में रोजगार पैदा करना है। योजना में मछली की गुणवत्ता, बीज, चारा, रोग नियंत्रण, कोल्ड चेन, बाजार और मछुआरों की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है।
कितनी मिलती है मदद
व्यक्तिगत लाभार्थी या समूह की परियोजनाओं में सामान्य वर्ग को इकाई लागत का 40 प्रतिशत तक सरकारी सहायता मिलती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को 60 प्रतिशत तक सहायता दी जाती है। बाकी रकम लाभार्थी खुद लगाता है या बैंक से कर्ज लेता है। हर घटक के लिए इकाई लागत की सीमा तय है, जिसकी जानकारी राज्य के मत्स्य विभाग से ली जा सकती है।
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किन कामों के लिए सहायता
योजना में कई तरह के कामों के लिए मदद का प्रावधान है:
- नए मछली पालन तालाब बनाना और पुराने तालाबों का सुधार।
- बायोफ्लॉक और रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम यानी RAS जैसी आधुनिक तकनीक।
- मछली बीज हैचरी और नर्सरी।
- केज कल्चर, यानी जलाशयों में पिंजरे लगाकर मछली पालन।
- मछली ढोने के लिए बर्फ वाले बक्से के साथ मोटरसाइकिल, साइकिल, ऑटो और इंसुलेटेड ट्रक।
- कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट और मछली बाजार।
- समुद्री शैवाल और सजावटी मछली पालन।
- गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नावें और सुरक्षा उपकरण।
कौन कर सकता है आवेदन
मछुआरे, मछली पालक, मछली विक्रेता, स्वयं सहायता समूह, मछली पालन सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठन, उद्यमी और निजी कंपनियां इस योजना का लाभ ले सकती हैं। जिन लोगों के पास अपनी जमीन या पट्टे पर तालाब है, वे तालाब निर्माण और सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदक को राज्य के नियमों के मुताबिक जरूरी दस्तावेज देने होते हैं।
आवेदन कैसे करें
आवेदन के लिए अपने जिले के मत्स्य विभाग के कार्यालय में संपर्क करें। कई राज्यों ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू की है। आवेदन के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR, जमीन या पट्टे के कागज, आधार, बैंक खाते की जानकारी, जाति प्रमाण पत्र अगर लागू हो, और फोटो लगती है। जिला स्तर की समिति आवेदनों की जांच करती है और मंजूरी के बाद काम पूरा होने पर किस्तों में सहायता दी जाती है।
मछुआरों के लिए दूसरे लाभ
योजना के तहत मछुआरों को दुर्घटना बीमा, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि में आजीविका और पोषण सहायता, और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। मछली पालक किसान क्रेडिट कार्ड भी बनवा सकते हैं, जिससे चारा, बीज और दूसरे खर्च के लिए सस्ता कर्ज मिलता है। मछुआरों और मछली पालकों के पंजीकरण के लिए सरकार ने राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है।
शुरू करने से पहले ध्यान दें
मछली पालन शुरू करने से पहले पानी की उपलब्धता, मिट्टी की जांच, बाजार की दूरी और मछली की प्रजाति के बारे में जानकारी लें। मत्स्य विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र ट्रेनिंग देते हैं। पहले छोटे स्तर पर शुरुआत करना और अनुभव के बाद विस्तार करना बेहतर रहता है। बायोफ्लॉक जैसी तकनीक में बिजली और देखभाल की लगातार जरूरत होती है, इसलिए उसकी लागत पहले समझ लें।
तालाब निर्माण का उदाहरण
मान लीजिए कोई किसान एक हेक्टेयर में नया मछली पालन तालाब बनाना चाहता है। योजना में इसकी इकाई लागत सीमा तय है। अगर कुल लागत उसी सीमा के भीतर है, तो सामान्य वर्ग के किसान को उसका 40 प्रतिशत और महिला या SC, ST किसान को 60 प्रतिशत सरकारी सहायता के रूप में मिल सकता है। बाकी पैसे के लिए बैंक से कर्ज लिया जा सकता है। पहले साल के लिए बीज, चारा और दवा जैसे इनपुट की लागत भी कई घटकों में शामिल की जाती है। सही अनुमान के लिए जिले के मत्स्य विकास अधिकारी से इकाई लागत की ताजा सूची जरूर लें।
PMMSY कब शुरू हुई
सितंबर 2020 में।
सामान्य वर्ग को कितनी सहायता मिलती है
इकाई लागत का 40 प्रतिशत तक।
महिलाओं को कितनी सहायता मिलती है
60 प्रतिशत तक।
आवेदन कहां करें
जिले के मत्स्य विभाग कार्यालय या राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर।
स्रोत: PMMSY Official Portal, Department of Fisheries, Government of India, PIB: PMMSY





