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सर्दियों में बनाएं आंवला मुरब्बा: आंवले गोदने से चाशनी के सही तार तक पूरी विधि, महीनों तक टिकाने के टिप्स

नवंबर-दिसंबर में बाजार में ताजे आंवले आते ही कई घरों में मुरब्बा बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। जानिए आसान तरीका।

कांच के जार में चाशनी में डूबे आंवला मुरब्बे का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • सर्दियों में बाजार में बड़े, हरे और रसीले आंवले आने लगते हैं।
  • चीनी की जगह गुड़ से भी मुरब्बा बनाया जा सकता है। इसके लिए गुड़ को थोड़े पानी में घोलकर छान लें, ताकि गंदगी निकल जाए।
  • आंवला कैंडी बनाने के लिए आंवले की फांकों को चीनी में रखकर रस निकलने दिया जाता है और फिर फांकों को धूप में सुखाया जाता है।
  • मुरब्बे में चीनी या गुड़ बहुत ज्यादा होता है, इसलिए इसे मिठाई की तरह सीमित मात्रा में खाएं।

सर्दियों में बाजार में बड़े, हरे और रसीले आंवले आने लगते हैं। उत्तर भारत के कई घरों में इसी मौसम में आंवले का मुरब्बा बनाने की परंपरा है। मीठी चाशनी में डूबे नरम आंवले सुबह-शाम एक-एक खाने का चलन पुराना है। घर पर बना मुरब्बा साफ-सफाई और मिठास के हिसाब से अपनी पसंद का बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं इसे बनाने का तरीका।

आंवले कैसे चुनें

मुरब्बे के लिए बड़े आकार के, सख्त, चिकने और बिना दाग वाले आंवले चुनें। बनारसी आंवला मुरब्बे के लिए काफी पसंद किया जाता है, क्योंकि इसका आकार बड़ा होता है और गूदा मोटा होता है। कटे-फटे या नरम पड़ चुके आंवले न लें, वरना मुरब्बा बनाते समय वे टूट सकते हैं।

मुख्य बातें: कांच के जार में चाशनी में डूबे आंवला मुरब्बे का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सामग्री

  • बड़े आंवले: 1 किलो
  • चीनी: लगभग 1.25 से 1.5 किलो, स्वाद के अनुसार (या गुड़)
  • पानी: जरूरत के अनुसार
  • इलायची पाउडर: 1 छोटा चम्मच
  • काली मिर्च पाउडर: आधा छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
  • केसर के कुछ धागे (वैकल्पिक)
  • फिटकरी या चूना: कुछ घरों में आंवले का कसैलापन कम करने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होता है, लेकिन यह जरूरी नहीं। इस्तेमाल करें तो बहुत कम मात्रा में और आंवलों को बाद में अच्छी तरह धो लें।

आंवले तैयार करना

  1. आंवलों को अच्छी तरह धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें।
  2. हर आंवले को कांटे या मोटी सुई से चारों तरफ गोद दें। इससे चाशनी अंदर तक जाती है।
  3. आंवलों को एक-दो दिन साफ पानी में भिगोकर रखने की परंपरा भी है, जिससे कसैलापन कुछ कम होता है। पानी रोज बदलें।

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उबालना

  1. एक बड़े बर्तन में पानी उबालें।
  2. उसमें आंवले डालें और 5 से 7 मिनट तक हल्का उबालें, जब तक वे थोड़े नरम न हो जाएं।
  3. ध्यान रखें कि आंवले ज्यादा न पकें, वरना उनकी फांकें अलग हो जाएंगी।
  4. पानी निकालकर आंवलों को छलनी में रखें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।

चाशनी बनाना और मुरब्बा तैयार करना

  1. एक भारी तले के बर्तन में आंवले और चीनी परत दर परत रखें।
  2. इसे ढककर कुछ घंटे या रात भर छोड़ दें। चीनी घुलकर आंवलों से पानी निकलेगा।
  3. अब बर्तन को धीमी आंच पर रखें और बीच-बीच में हल्के हाथ से चलाते हुए पकाएं।
  4. चाशनी गाढ़ी होने लगेगी। एक से डेढ़ तार की चाशनी बनने तक पकाएं।
  5. आंवले पारदर्शी और नरम दिखने लगें, तो आंच बंद कर दें।
  6. इलायची, काली मिर्च और केसर डालकर मिलाएं।

गुड़ वाला मुरब्बा

चीनी की जगह गुड़ से भी मुरब्बा बनाया जा सकता है। इसके लिए गुड़ को थोड़े पानी में घोलकर छान लें, ताकि गंदगी निकल जाए। फिर इसी चाशनी में आंवले पकाएं। गुड़ वाले मुरब्बे का रंग गहरा भूरा होता है और स्वाद अलग होता है।

जार में भरना

मुरब्बे को पूरी तरह ठंडा होने दें। फिर साफ, पूरी तरह सूखे कांच के जार में भरें। आंवले चाशनी में पूरी तरह डूबे रहने चाहिए। पहले दो-तीन दिन जार को धूप में रखा जा सकता है। मुरब्बा कुछ दिनों में और अच्छी तरह रस सोख लेता है और स्वाद बेहतर हो जाता है।

खराब होने से कैसे बचाएं

  • गीला चम्मच कभी न डालें।
  • जार का ढक्कन अच्छी तरह बंद रखें।
  • अगर चाशनी पतली रह गई हो, तो कुछ दिन बाद उसे निकालकर दोबारा गाढ़ा कर लें।
  • ऊपर फफूंद दिखे या खमीर जैसी गंध आए, तो मुरब्बा न खाएं।
  • गर्मियों में फ्रिज में रखना बेहतर रहता है।

आम गलतियां

  • आंवलों को ज्यादा उबाल देना, जिससे वे टूट जाएं।
  • आंवलों को ठीक से न गोदना, जिससे चाशनी अंदर तक न जाए।
  • चाशनी को बहुत पतला छोड़ देना।
  • गर्म मुरब्बा जार में भरकर बंद कर देना, जिससे भाप जमकर नमी बन जाती है।

मुरब्बा और कैंडी में अंतर

आंवला कैंडी बनाने के लिए आंवले की फांकों को चीनी में रखकर रस निकलने दिया जाता है और फिर फांकों को धूप में सुखाया जाता है। मुरब्बे में आंवले पूरे रहते हैं और चाशनी में डूबे रहते हैं। दोनों का स्वाद अलग है। अगर आपके पास छोटे आंवले हैं, जो मुरब्बे में टूट सकते हैं, तो उनसे कैंडी या अचार बनाना बेहतर रहता है।

बच्चों के लिए परोसने का तरीका

मुरब्बे के एक आंवले को छोटे टुकड़ों में काटकर चाशनी के साथ रोटी या पराठे के साथ परोसा जा सकता है। चाशनी को अलग से निकालकर ब्रेड पर जैम की तरह भी लगाया जा सकता है।

कितना खाएं

मुरब्बे में चीनी या गुड़ बहुत ज्यादा होता है, इसलिए इसे मिठाई की तरह सीमित मात्रा में खाएं। डायबिटीज के मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के मुरब्बा न खाएं।

आंवला मुरब्बा कितने दिन चलता है

सही तरीके से बने और साफ-सूखे जार में रखे मुरब्बे को कई महीनों तक रखा जा सकता है।

आंवलों को गोदना क्यों जरूरी है

ताकि चाशनी आंवले के अंदर तक पहुंचे और मुरब्बा अंदर तक मीठा और नरम बने।

स्रोत: FSSAI: Eat Right India, Wikipedia: Murabba

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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