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सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफ और एफपीआई के लाभार्थियों के सार्वजनिक खुलासे से किया इनकार

सर्वोच्च न्यायालय ने बिना कानूनी ढांचे के एआईएफ और एफपीआई के लाभार्थियों के पूर्ण सार्वजनिक खुलासे का आदेश देने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफ और एफपीआई के लाभार्थियों के सार्वजनिक खुलासे से किया इनकार
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

कानूनी ढांचे की आवश्यकता

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वैकल्पिक निवेश कोषों (AIF) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के अंतिम लाभार्थियों के पूर्ण सार्वजनिक प्रकटीकरण का आदेश देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना किसी उचित कानूनी ढांचे के इस तरह का आदेश नहीं दिया जा सकता है। यह मामला एक याचिका से संबंधित है जिसमें इन निवेश साधनों में पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई गई थी।

संसद में चर्चा का सुझाव

अदालत ने याचिकाकर्ता सांसद से सवाल किया कि वे अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिका क्यों दायर कर रही हैं। न्यायाधीशों ने सुझाव दिया कि इस विषय को संसद के भीतर उठाया जाना चाहिए, क्योंकि यह नीतिगत और विधायी सुधारों का क्षेत्र है। न्यायालय ने माना कि इस तरह के खुलासे के लिए पहले कानून बनाना आवश्यक है, न कि सीधे न्यायिक आदेश देना।

न्यायालय का रुख
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव
  • वैकल्पिक निवेश कोषों के विस्तार पर चिंता।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की पारदर्शिता का मुद्दा।
  • अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा तय की।
  • संसद को नीतिगत मामलों पर चर्चा का स्थान बताया।

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स्रोत: The Hindu

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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