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FCRA Amendment Bill 2026: FCRA संशोधन बिल 2026 पर मचा बवाल, चर्च और ईसाई संगठनों ने किया तीखा विरोध

FCRA Amendment Bill 2026
FCRA Amendment Bill 2026

सारांश

  • FCRA Amendment Bill 2026: केंद्र सरकार के प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर देशभर के चर्च और ईसाई संगठनों में भारी असंतोष फैल गया है।
  • प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल 2026 में सरकार को नामित प्राधिकरण नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।
  • ईसाई समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की।
  • अमेरिका के कुछ सांसदों ने इस प्रस्तावित कानून पर चिंता व्यक्त की है।

FCRA Amendment Bill 2026: केंद्र सरकार के प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर देशभर के चर्च और ईसाई संगठनों में भारी असंतोष फैल गया है। बिल विदेशी फंड से जुड़ी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण की बात कहता है, जिसे संगठनों ने अपने अधिकारों पर हमला बताया है। सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता का हवाला दे रही है।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार अगले सप्ताह लोकसभा में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक यानी FCRA संशोधन बिल 2026 पेश करने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित कानून को लेकर देश के कई चर्च और ईसाई संगठनों ने तीखा विरोध जताया है। उनका आरोप है कि बिल उनके संस्थानों को निशाना बनाता है और सामाजिक सेवाओं पर असर डाल सकता है। वहीं सरकार का स्पष्ट रुख है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने के लिए जरूरी है। ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखीं। अमेरिकी सांसदों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। बिल में विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जिन पर चर्चा तेज हो गई है।

FCRA Amendment Bill 2026: बिल में शामिल मुख्य प्रावधान क्या कहते हैं?

प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल 2026 में सरकार को नामित प्राधिकरण नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। अगर किसी संस्था का FCRA लाइसेंस रद्द होता है, वह खुद छोड़ देती है या नवीनीकरण नहीं होता तो यह प्राधिकरण विदेशी फंड और उससे बनी संपत्तियों का नियंत्रण ले सकेगा। साथ ही कानून तोड़ने पर अधिकतम सजा पांच साल से घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव है। पूजा स्थल वाली संपत्ति का धार्मिक स्वरूप बनाए रखने की जिम्मेदारी भी प्राधिकरण की होगी।

चर्च और ईसाई संगठन विरोध क्यों कर रहे हैं

ईसाई संगठनों की सबसे बड़ी आपत्ति नामित प्राधिकरण वाले प्रावधान पर है। देशभर में कई चर्च स्कूल, अस्पताल, अनाथालय और सामुदायिक केंद्र चलाते हैं। ये संस्थाएं विदेशी सहायता पर काफी हद तक निर्भर हैं। उनका कहना है कि बिल लागू होने से इन सेवाओं पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाएं बाधित हो सकती हैं।

FCRA Amendment Bill 2026: संपत्ति नियंत्रण को लेकर बढ़ी चिंता

कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ने बिल के प्रावधानों पर गहरी चिंता जताई है। संगठन का मानना है कि सरकार उन संपत्तियों पर स्थायी नियंत्रण कर सकती है जिन्हें सालों से विदेशी और घरेलू दोनों फंड से विकसित किया गया है। केरल लैटिन कैथोलिक एसोसिएशन ने भी कहा कि पर्याप्त चर्चा के बिना संशोधन किए गए हैं जिससे कानूनी रूप से काम कर रही संस्थाओं में अनिश्चितता बढ़ेगी।

गृह मंत्री से मुलाकात और मांगें

ईसाई समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने बिल वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग रखी। गृह मंत्री ने उनकी बातें सुनीं और आश्वासन दिया कि चिंताओं पर विचार होगा। गृह मंत्रालय का रुख साफ है कि यह बिल किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है।

FCRA Amendment Bill 2026: सरकार का पक्ष और सुरक्षा का तर्क

गृह मंत्रालय ने साफ कहा है कि FCRA संशोधन बिल 2026 राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा समान कानून है। इसका मकसद विदेशी फंडिंग की बेहतर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। जो धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं नियमों का पालन करेंगी उन्हें कोई चिंता करने की जरूरत नहीं। वे पहले की तरह अपना काम जारी रख सकेंगी।

अमेरिकी सांसदों ने भी जताई आपत्ति

अमेरिका के कुछ सांसदों ने इस प्रस्तावित कानून पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने दावा किया कि संशोधन सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं का नियंत्रण लेने का अधिकार देगा। उन्होंने इसे ईसाइयों के खिलाफ कदम बताया।

FCRA Amendment Bill 2026: सक्रिय लाइसेंस और रद्द प्रमाणपत्रों की स्थिति

FCRA पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक 15 जुलाई 2026 तक देश में 14449 सक्रिय FCRA प्रमाणपत्र मौजूद हैं। वहीं 22498 प्रमाणपत्र रद्द हो चुके हैं और 15212 प्रमाणपत्र नवीनीकरण न होने के कारण समाप्त हो गए हैं। ये आंकड़े विदेशी फंडिंग की निगरानी को लेकर सरकारी प्रयासों की तस्वीर साफ करते हैं।

FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर चर्च और ईसाई संगठनों का विरोध जारी है जबकि सरकार पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर दे रही है। दोनों पक्षों की बातें सामने आने के बाद अगले सप्ताह संसद में पेश होने वाले इस विधेयक पर चर्चा और तेज होने की संभावना है। गृह मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि नियमों का पालन करने वाली संस्थाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ईसाई प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठते हैं यह देखना महत्वपूर्ण होगा। विदेशी फंडिंग से जुड़ी पारदर्शिता और सामाजिक सेवाओं के बीच संतुलन बनाए रखना दोनों पक्षों के लिए चुनौती बना हुआ है।

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About The Author

Sudhanshu Tiwari Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Sudhanshu Tiwari

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