दीपावली का त्योहार केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह पांच दिनों तक चलने वाला महापर्व है। धनतेरस के अगले दिन और बड़ी दिवाली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जिसे लोक भाषा में छोटी दिवाली, रूप चौदस या काली चौदस भी कहा जाता है। साल 2026 में पंचांग की गणना के अनुसार तिथियों का संयोग कुछ इस प्रकार बन रहा है कि छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली के कृत्यों को लेकर समय का विशेष ध्यान रखना होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शाम के समय दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और यमराज का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नरक चतुर्दशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे से शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे तक रहेगी। लोक परंपराओं में छोटी दिवाली के दीये 7 नवंबर की शाम को जलाए जाएंगे, जबकि नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान और बड़ी दिवाली की लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को संपन्न होगी।
| महत्वपूर्ण आयोजन (2026) | तारीख | शुभ समय/मुहूर्त (नई दिल्ली) |
|---|---|---|
| यम दीपदान (धनतेरस शाम) | 6 नवंबर | शाम 5:33 से 6:51 तक |
| काली चौदस/छोटी दिवाली दीपदान | 7 नवंबर | शाम 5:32 के बाद (प्रदोष काल) |
| नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान | 8 नवंबर | सुबह 5:41 से 6:38 तक |
| दीवाली लक्ष्मी पूजा | 8 नवंबर | शाम 5:54 से 7:50 तक |
ध्यान दें कि ऊपर दिए गए समय नई दिल्ली के लिए प्रभावी हैं। आपके शहर के स्थानीय पंचांग या पुरोहित के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय समय की पुष्टि अवश्य करें।
यम दीपक: दक्षिण दिशा में दीपदान का महत्व
नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली की शाम को यमराज के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। मान्यता है कि यमराज के लिए दीपदान करने से नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु नहीं होती। यम दीपक के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है।
- दिशा: यम का दीपक हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है।
- तेल: इस दीपक में शुद्ध सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए। सरसों के तेल की तीक्ष्णता नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
- दीपक का प्रकार: यम दीपक के लिए अक्सर मिट्टी के पुराने या बड़े दीपक का उपयोग किया जाता है। कई घरों में आटे का चौमुखी दीपक बनाकर भी यमराज को समर्पित किया जाता है।
- स्थान: यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर ऐसी जगह रखा जाता है जहां से वह दक्षिण दिशा की ओर देख रहा हो। इसे कूड़े के ढेर के पास या घर के नाले के पास रखने की भी परंपरा है, ताकि घर की सारी दरिद्रता बाहर निकल जाए।
14 दीयों की परंपरा: किन स्थानों पर रखें दीपक?
परंपरा के अनुसार, नरक चतुर्दशी की शाम को घर के अलग-अलग हिस्सों में 14 दीये जलाए जाते हैं। इन 14 दीयों का महत्व यमराज के 14 नामों और घर की शुद्धि से जुड़ा है। इन दीयों को रखने के लिए कुछ खास स्थान निर्धारित किए गए हैं:
- मुख्य द्वार: घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दो दीये रखे जाते हैं ताकि सुख-समृद्धि का आगमन हो।
- पूजा घर: एक दीपक अपने इष्ट देव और कुलदेवता के पास जलाया जाता है।
- रसोई घर: अन्नपूर्णा मां के सम्मान में रसोई में एक दीपक रखना शुभ माना जाता है।
- पीपल का पेड़: घर के पास यदि पीपल का पेड़ हो, तो वहां एक दीपक जलाना चाहिए। मान्यता है कि इसमें देवताओं का वास होता है।
- तुलसी का पौधा: आंगन में स्थित तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना अनिवार्य है।
- पानी का स्थान: जहां घर में पीने का पानी रखा जाता है (नल या मटका), वहां एक दीपक रखें।
- अंधेरे कोने: घर के उन कोनों में जहां रोशनी कम पहुंचती है, वहां दीये जलाकर नकारात्मकता दूर की जाती है।
- छत और बालकनी: घर की छत पर भी दीपक रखने की परंपरा है।
- चौराहा: गांव या मोहल्ले के पास के चौराहे पर भी एक दीपक रखा जाता है।
- शौचालय के पास: घर के बाहर स्वच्छता बनाए रखने के प्रतीक स्वरूप वहां भी दीप रखा जाता है।
सरसों तेल और बत्ती के नियम
छोटी दिवाली के इन 14 दीयों में सरसों तेल का ही उपयोग करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन सरसों तेल के दीपक जलाने से शनि दोष में भी शांति मिलती है। बत्ती के लिए रूई का उपयोग करें, लेकिन यम दीपक में अक्सर दो लंबी बत्तियों को क्रॉस करके रखा जाता है ताकि चार मुख बन सकें। दीप जलाते समय मन में सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए।
अभ्यंग स्नान: रूप चौदस का विशेष विधान
8 नवंबर 2026 की सुबह नरक चतुर्दशी का मुख्य स्नान होगा। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर स्नान करने से सौंदर्य में वृद्धि होती है और पापों का नाश होता है। इस दिन तिल के तेल की मालिश और अपामार्ग (चिचड़ी) के पौधे को सिर पर घुमाकर स्नान करने की परंपरा है। 2026 में इसका शुभ समय सुबह 5:41 से 6:38 तक रहेगा।
सुरक्षा सावधानियां: दीप जलाते समय बरतें सावधानी
त्योहार की खुशी में सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दीपदान करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
- दीपक को हमेशा समतल जगह पर रखें ताकि वह गिरे नहीं।
- पर्दों, लकड़ी के सामान या ज्वलनशील पदार्थों से दीयों को दूर रखें।
- यम दीपक को घर के बाहर ऐसी जगह रखें जहां किसी का पैर न लगे।
- बच्चों को अकेले दीये जलाने न दें और पालतू जानवरों का भी ध्यान रखें।
- दीपक रखने के बाद उसे बार-बार पीछे मुड़कर न देखने की लोक मान्यता है, विशेषकर यम दीपक के मामले में।
नरक चतुर्दशी का यह पर्व हमें सिखाता है कि जिस प्रकार एक छोटा सा दीपक घने अंधकार को चीर देता है, उसी प्रकार ज्ञान और धर्म का प्रकाश हमारे जीवन से बुराइयों का अंत कर सकता है। 2026 के इस दीपोत्सव में नियमों और परंपराओं का पालन करते हुए अपने घर को खुशियों से रोशन करें।
यह भी पढ़ें: छोटी दिवाली 2026 कब है: 7 या 8 नवंबर? नरक चतुर्दशी और काली चौदस की सही तारीख और मुहूर्त पर पूरी स्पष्टता | यम दीपदान की परंपरा और विधि
स्रोत: द्रिक पंचांग (नई दिल्ली के लिए गणना), प्रचलित धार्मिक ग्रंथ और लोक परंपराएं। मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलते हैं, अपने शहर के पंचांग से पुष्टि करें।





