हेपेटाइटिस बी लिवर का एक वायरल संक्रमण है, जो कई लोगों में सालों तक बिना लक्षण के रह सकता है। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर यह लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। अच्छी बात यह है कि इससे बचाव के लिए सुरक्षित और असरदार टीका उपलब्ध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जानकारी के आधार पर जानिए हेपेटाइटिस बी के बारे में जरूरी बातें।
हेपेटाइटिस बी कैसे फैलता है
WHO के अनुसार हेपेटाइटिस बी वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून और शरीर के कुछ तरल पदार्थों से फैलता है। इसके मुख्य तरीके हैं:
- जन्म के समय संक्रमित मां से बच्चे में
- संक्रमित खून चढ़ने या बिना जांच के खून के संपर्क से
- इस्तेमाल की गई सुई, सिरिंज या बिना साफ किए गए औजारों से, जैसे टैटू या कान छिदवाते समय
- असुरक्षित यौन संबंध से
- रेजर या टूथब्रश साझा करने से
यह वायरस साथ खाना खाने, पानी पीने, हाथ मिलाने, गले मिलने, खांसने या छींकने से नहीं फैलता। इसलिए संक्रमित व्यक्ति से भेदभाव करना गलत है।

लक्षण क्या हो सकते हैं
संक्रमण के शुरुआती दौर में कई लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते। कुछ लोगों में आंखों और त्वचा का पीला पड़ना यानी पीलिया, गहरे रंग का पेशाब, बहुत ज्यादा थकान, उल्टी और पेट में दर्द हो सकता है। WHO के अनुसार छोटे बच्चों में संक्रमण होने पर इसके लंबे समय तक रहने यानी क्रॉनिक होने का खतरा ज्यादा होता है। क्रॉनिक संक्रमण धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए बिना लक्षण के भी जांच अहम है।
जांच कैसे होती है
हेपेटाइटिस बी की पहचान खून की जांच से होती है। HBsAg टेस्ट से पता चलता है कि शरीर में वायरस मौजूद है या नहीं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दूसरी जांचें कराकर यह तय करते हैं कि संक्रमण नया है या पुराना और लिवर पर कितना असर है। गर्भवती महिलाओं में यह जांच खास तौर पर जरूरी मानी जाती है, ताकि बच्चे को जन्म के समय बचाव मिल सके। जिनके परिवार में किसी को हेपेटाइटिस बी है, उन्हें भी डॉक्टर से जांच के बारे में पूछना चाहिए।
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टीका सबसे अच्छा बचाव
WHO सभी नवजात बच्चों को जन्म के बाद जितनी जल्दी हो सके, बेहतर हो कि 24 घंटे के भीतर, हेपेटाइटिस बी का टीका देने की सलाह देता है। इसके बाद तय अंतराल पर आगे की खुराकें दी जाती हैं। भारत में यह टीका राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा है और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त लगता है। जिन बड़ों को बचपन में टीका नहीं लगा, खासकर स्वास्थ्य कर्मी, वे डॉक्टर से सलाह लेकर टीका लगवा सकते हैं।
इलाज और देखभाल
नए संक्रमण में अक्सर आराम, सही भोजन और डॉक्टर की निगरानी काफी होती है। क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी के कुछ मरीजों को लंबे समय तक एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं, जो वायरस को काबू में रखकर लिवर को नुकसान से बचाती हैं। मरीज शराब से दूर रहें, बिना सलाह कोई दवा या जड़ी-बूटी न लें और नियमित जांच कराते रहें। हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हेपेटाइटिस बी का टीका बड़े भी लगवा सकते हैं?
हां, डॉक्टर की सलाह से वयस्क भी टीका लगवा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Hepatitis B फैक्ट शीट। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





